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गरीबों के हक व अधिकार की लड़ाई सच्ची श्रद्धांजलि

Updated at : 28 Jul 2024 10:02 PM (IST)
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गरीबों के हक व अधिकार की लड़ाई सच्ची श्रद्धांजलि

भाकपा माले के संस्थापक महासचिव कॉमरेड चारु मजूमदार का मना 52वां शहादत दिवस

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जमुई. जिले के बरहट प्रखंड क्षेत्र के धीरनपुरी गांव में रविवार को भाकपा माले के संस्थापक महासचिव कॉमरेड चारु मजूमदार के 52वें शहादत दिवस पर कार्यकर्ताओं ने उन्हें नमन किया. सर्वप्रथम कार्यकर्ताओं ने पार्टी के संस्थापक महासचिव के तैल चित्र पर माल्यार्पण किया. इसके उपरांत भाकपा माले के जिला सचिव शंभू शरण सिंह ने कहा कि पार्टी पुनर्गठन की 50वीं वर्षगांठ के अवसर पर केन्द्रीय कमेटी ने पार्टी को विकास और विस्तार के नये दौर में ले जाने का आह्वान किया है. विगत विधानसभा और हाल ही में संपन्न लोकसभा चुनाव में मिली सफलता ने पार्टी के विकास और विस्तार की बड़ी संभावना पेश की है. इस आलोक में राज्य कमेटी ने एक ओर जहां बड़ी संख्या में पार्टी सदस्य भर्ती करने और उन्हें पार्टी ब्रांचों में संगठित करने का कार्यभार तय किया है. वहीं दूसरी ओर राज्य में गरीबों की दावेदारी मजबूत करने व उनके अधिकार की लड़ाई को आगे बढ़ाने के लिए हक दो-वादा निभाओ अभियान चलाने का फैसला किया है. भाकपा माले नेता बाबू साहब सिंह ने कहा हम सभी जानते हैं कि बिहार में हुए जाति आधारित गणना ने बिहार में गरीबी की भयावह तस्वीर पेश की है. करीब साढ़े 94 लाख अतिनिर्धन परिवारों की मासिक आय महज 6 हजार रुपये तक है. सामाजिक लिहाज से देखें तो ये मूलतः समाज के दलित-अतिपिछड़ा-पिछड़ा समुदाय के हैं. चारु मजूमदार ने कहा था कि जनता की स्वार्थ ही पार्टी का स्वार्थ है. वहीं माले के वरिष्ठ नेता बासुदेव रॉय और मो हैदर ने कहा कि जाति आधारित गणना ने बिहार की भयावह तस्वीर पेश किया है कि बिहार की 34 प्रतिशत आबादी की मासिक आमदनी छह हजार से कम है. जाति आधारित गणना के बाद नीतीश सरकार ने ऐसे परिवार को गरीबी से निकालने के लिए और स्वरोजगार उपलब्ध कराने को तीन किस्तों में 2 लाख रुपये देने की घोषणा की थी, लेकिन छह माह गुजर जाने के बाद इसकी भी हालत प्रधानमंत्री मोदी के 15 लाख रुपये के जुमले की तरह न हो जाये, इसलिए लड़कर इस घोषणा को लागू करवाना जरूरी है. गरीबों के लिए की गयी दो और घोषणा आवास भूमि के लिए 5 डिसमिल जमीन और पक्का मकान को भी लागू करने के लिए सरकार पर दबाव बनाने की जरूरत है. इसके अलावा किसानों, महिलाओं, छात्र-युवाओं, विकास के विभिन्न मुद्दे, केंद्र सरकार से बिहार को विशेष राज्य का दर्जा, 65 प्रतिशत आरक्षण को संविधान की 9वीं अनुसूची में शामिल करने और पूरे देश में जाति आधारित गणना कराने की मांग समेत देश में लोकतंत्र व संविधान बचाने के सवालों को भी आंदोलन का विषय बनाना तय किया गया है. पार्टी कार्यकर्ताओं को इसे लागू करने के लिए संजीदगी से प्रयास करना चाहिए. ऐसा करके ही गरीबों की दावेदारी मजबूत होगी, पार्टी का व्यापक विस्तार होगा, उसे मजबूती मिलेगी और फासीवादी भाजपा से मुकाबले की हमें मजबूत ताकत मिलेगी. मौके पर ब्रह्मदेव ठाकुर, किरण गुप्ता, राजकुमार मांझी, ब्रह्मदेव मांझी, गोरेलाल माझी, सुरेश कुमार, शंभू कुमार, सुनीता देवी, रूबी देवी, रमणी देवी, चालो देवी, लालो देवी समेत दर्जनों माले कार्यकर्ता मौजूद थे.

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