बरहट थाने में लोगों ने किया हंगामा

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इधर सता रहा नक्सलियों का डर, तो उधर परेशान कर रही पुलिस पुलिस द्वारा की जा रही बेवजह गिरफ्तारी व नक्सली हत्याओं से जीना हुआ दुश्वार जमुई : नक्सली हत्याओं और पुलिस द्वारा बेवजह कार्रवाई से परेशान जिले के बरहट थाना क्षेत्र के गुरमाहा, कुमतरी, बिचला टोला , मुसहरी टांड़ गांव के सैकड़ों लोगों ने […]

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इधर सता रहा नक्सलियों का डर, तो उधर परेशान कर रही पुलिस

पुलिस द्वारा की जा रही बेवजह गिरफ्तारी व नक्सली हत्याओं से जीना हुआ दुश्वार
जमुई : नक्सली हत्याओं और पुलिस द्वारा बेवजह कार्रवाई से परेशान जिले के बरहट थाना क्षेत्र के गुरमाहा, कुमतरी, बिचला टोला , मुसहरी टांड़ गांव के सैकड़ों लोगों ने गुरुवार को बरहट थाना पहुंचकर जमकर हंगामा किया. इस दौरान लोगों का कहना था कि बीते कुछ सालों से कुछ आवारा और उचक्के किस्म के लड़कों ने हमें इस कदर बदनाम कर दिया है कि हम लोग वर्तमान समय में न घर के रहे हैं न घाट के हैं. स्थिति यह है कि जब हम लोग गुरमाहा से डरकर गांव छोड़कर बाहर आये, तब हमें प्रशासन द्वारा न तो रहने की जगह दी गयी और न ही हमारे जीवन यापन की व्यवस्था की गयी. बल्कि प्रशासनिक अधिकारियों ने हमें उजाड़ दिया. जिसके बाद प्रशासनिक पदाधिकारियों के द्वारा हमें पुनः गांव वापस लौट कर रहने को कहा गया और उनकी बात मान हम अपने गांव वापस चले भी गये.
परंतु अब नक्सली द्वारा चिह्नित लोगों की हो रही हत्याएं और पुलिस द्वारा बेवजह किसी की भी गिरफ्तारी और कार्रवाई ने हमलोगों का जीना मुहाल कर दिया है. ग्रामीणों का कहना था कि पुलिस मुझे झूठे तौर पर केस में फंसा रही है और नक्सली वारदात से जुड़े मामला में कई निर्दोष लोगों को भी नामित कर दिया है. लोगों ने कहा कि वर्तमान समय में हम जितने लोग भी वापस गांव लौट कर आये हैं उनमें से किसी का न तो नक्सली से कोई वास्ता है और न ही पुलिस से कोई सरोकार है, परंतु फिर भी हमें सताया और डराया जा रहा है. ऐसे में हम क्या करें कहां जाएं कुछ समझ में नहीं आता. गांव के लोगों ने थाना के समक्ष हो-हंगामा कर इसे लेकर जिलाधिकारी के नाम पर ज्ञापन भी सौंपा. बाद में मामले की सूचना पाकर मौके पर पहुंचे अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी रामपुकार सिंह के समझाने-बुझाने के बाद लोग शांत हुए और वापस गांव लौटे.
पिछले वर्ष 15 जुलाई को छोड़ा था गांव
14 जुलाई 2017 को बरहट थाना क्षेत्र के कुकुरझप डेम में शुक्रवार को नक्सली द्वार तीन लोगों की हत्या के उपरांत गुमराहा तथा कुमरतरी के दर्जनों परिवारों ने 15 जुलाई को घर छोड़ दिया था और यह दो महीने तक विद्यालय में रहे. जिसके बाद इन्होंने पतनेश्वर पहाड़ी पर अपना डेरा बनाया था. बीते जून महीने की 18 तारीख को सीआरपीएफ ने बरहट के जंगलों में पीएलजीए के सदस्य दो नक्सलियों को मार गिराया था. दो नक्सली की मौत के बाद नक्सली संगठन के सदस्य जंगल छोड़कर फरार तो हो गये थे. लेकिन लोगों में यह भय तब से ही पैदा हो गया था कि नक्सली जरूर प्रतिशोध की ज्वाला में आकर किसी घटना को अंजाम देंगे. जिसके प्रतिशोध में 14 जुलाई को नक्सलियों ने कुमरतरी निवासी शिव कोड़ा, बजरंगी कोड़ा तथा मीना देवी पर पुलिस मुखबिरी का आरोप लगाते हुए पत्थर से कुचकर बेरहमी से हत्या कर दी. इस नृशंश हत्या के बाद लोगों की रूह कांप उठी.
लोगों से मिल कर उनकी बातें सुनी है. साथ ही ऐसे लोग जिनका नाम केस में है या जिनके नाम से नोटिस गया है, उनसे आवेदन की मांग की गयी है. उन्होंने कहा कि इसे लेकर जांच-पड़ताल किया जायेगा. निर्दोष लोगों पर किसी भी तरह की कार्रवाई नहीं की जायेगी.
राम पुकार सिंह, एसडीपीओ जमुई.
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