29-30 जून को निकलेगी दो दिवसीय किसान पदयात्रा, 500 से अधिक किसान होंगे शामिल
Kisan Padyatra: जमुई. हूल दिवस के अवसर पर 29 एवं 30 जून को भाकपा माले के जन संगठन आदिवासी संघर्ष मोर्चा तथा अखिल भारतीय किसान महासभा के नेतृत्व में दो दिवसीय किसान पदयात्रा निकाली जाएगी. पदयात्रा में लगभग 500 किसानों और ग्रामीणों के शामिल होने की संभावना है. इसे लेकर भाकपा माले के जिला सचिव शंभू शरण सिंह ने जिलाधिकारी को आवेदन देकर मार्ग में पेयजल, स्वास्थ्य सुविधा एवं सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है.
जमुई से अर्जुन अरनव की रिपोर्ट
Kisan Padyatra: 29-30 जून को निकलेगी दो दिवसीय किसान पदयात्रा, 500 से अधिक किसान होंगे शामिलहूल दिवस के अवसर पर आदिवासी संघर्ष मोर्चा और अखिल भारतीय किसान महासभा के नेतृत्व में दो दिवसीय किसान पदयात्रा आयोजित होगी. पदयात्रा में सैकड़ों किसान, आदिवासी और ग्रामीण अपने अधिकारों की आवाज बुलंद करेंगे.
किसानों और विस्थापितों के मुद्दों को लेकर निकलेगी यात्रा
आयोजकों ने बताया कि पदयात्रा एनएच-333ए के चौड़ीकरण, बरनार जलाशय परियोजना से प्रभावित किसानों के पुनर्वास, अधिग्रहित भूमि के बदले भूमि देने, विस्थापित परिवारों के एक सदस्य को रोजगार उपलब्ध कराने, वर्तमान एमवीआर का चार गुना मुआवजा देने तथा वन अधिकार अधिनियम के तहत लंबित मामलों के निष्पादन की मांग को लेकर आयोजित की जा रही है. इसके अलावा भूमिहीन गरीब परिवारों को वास एवं आवास के लिए भूमि उपलब्ध कराने की मांग भी प्रमुख रूप से उठाई जाएगी.
बटिया से शुरू होकर जमुई में होगा समापन
जानकारी के अनुसार 29 जून की सुबह सात बजे पदयात्रा बटिया से प्रारंभ होगी. यात्रा काली पहाड़ी और झुमराज स्थान होते हुए सुबह 11 बजे सोनो प्रखंड मुख्यालय पहुंचेगी. यहां प्रखंड विकास पदाधिकारी एवं अंचलाधिकारी को स्थानीय जनसमस्याओं से संबंधित ज्ञापन सौंपा जाएगा. इसके बाद पदयात्रा केंदुआ और दिहिया होते हुए मांगोबंदर पहुंचेगी, जहां भंडारी होटल परिसर में रात्रि विश्राम किया जाएगा.दूसरे दिन 30 जून की सुबह सात बजे यात्रा पुनः प्रारंभ होगी. यह हरदीमोह और नरियाना मोड़ होते हुए दोपहर करीब एक बजे जमुई शहर पहुंचेगी. कचहरी चौक स्थित शहीद स्मारक परिसर में सभा आयोजित कर पदयात्रा का समापन किया जाएगा. इसके बाद जिलाधिकारी को विभिन्न मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा जाएगा.
प्रशासन से मांगी गई विशेष व्यवस्था
आयोजकों ने बताया कि भीषण गर्मी और बड़ी संख्या में प्रतिभागियों को देखते हुए जिला प्रशासन से पूरे मार्ग में पेयजल, स्वास्थ्य सुविधा और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की गई है. पदयात्रा को सफल बनाने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक जनसंपर्क अभियान भी चलाया जा रहा है. संगठन का कहना है कि यह यात्रा किसानों, आदिवासियों और भूमिहीन परिवारों के अधिकारों की आवाज को मजबूत करने का माध्यम बनेगी.
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