पैक्स की कुंडली खंगाल रहा विभाग

Published at :23 Dec 2016 4:03 AM (IST)
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पैक्स की कुंडली खंगाल रहा विभाग

शिकंजा . ऑिडट रिपोर्ट के अध्ययन में जुटे पदािधकारी सहकारिता विभाग ने पैक्स की ऑडिट पर जब सख्ती बरती, तो अब तक 234 पंचायतों में से 211 पंचायतों का ऑडिट हो चुका है. ऑडिट रिपोर्ट में डेढ़ दर्जन पैक्स पर लगभग 59 लाख की देनदारी सामने आयी है. गोपालगंज : वर्षों से पैक्स में ऑडिट […]

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शिकंजा . ऑिडट रिपोर्ट के अध्ययन में जुटे पदािधकारी

सहकारिता विभाग ने पैक्स की ऑडिट पर जब सख्ती बरती, तो अब तक 234 पंचायतों में से 211 पंचायतों का ऑडिट हो चुका है. ऑडिट रिपोर्ट में डेढ़ दर्जन पैक्स पर लगभग 59 लाख की देनदारी सामने आयी है.
गोपालगंज : वर्षों से पैक्स में ऑडिट नहीं हो रहा था. विभाग ने जब सख्ती बरती, तो पैक्स का ऑडिट होने लगा, जिसमें डेढ़ दर्जन ऐसे पैक्स पाये गये हैं, जिनमें लगभग 59 लाख रुपये की देनदारी तत्कालीन प्रबंधक और अध्यक्ष पर गिरी है. ऑडिट की रिपोर्ट जिला अंकेक्षण पदाधिकारी के द्वारा बैंक, डीसीओ, एआर के कार्यालय को भेजी जा चुकी है. ऑडिट रिपोर्ट के अध्ययन में एआर (सहायक निबंधक प्राथमिक सहकारी साख समितियां) कार्यालय जुटा है. अध्ययन के साथ ही यह अब स्पष्ट होने लगा है
कि किन पैक्स में पूर्व अध्यक्ष और प्रबंधक के द्वारा गबन किया गया है. विभाग ऑडिट के बाद इसे गबन मानता है. कारण स्पष्ट है पैक्स चुनाव के बीते एक साल से अधिक हो चुका है. इसके बाद भी अगर पैक्स अध्यक्ष और प्रबंधक पर देनदारी है, तो उनकी मंशा पर सवाल खड़ा होता है. पहले तो पूर्व अध्यक्ष और प्रबंधक ऑडिट कराने से ही भागते रहे. जब विभाग ने कड़ाई से ऑडिट कराया, तो गबन का मामला सामने आया. अब तक गबन करने वाले एक भी पैक्स अध्यक्ष या प्रबंधक ने देनदारी की राशि को संबंधित पैक्स में नहीं जमा किया है. नतीजा है कि सहकारी विभाग के पास देनदारी की राशि की रिकवरी एक बड़ी चुनौती साबित हो सकती है.
सहकारिता विभाग ने पैक्स की ऑडिट पर जब सख्ती बरती, तो अब तक 234 पंचायतों में से 211 पंचायतों का ऑडिट हो चुका है. ऑडिट रिपोर्ट में डेढ़ दर्जन पैक्स पर लगभग 59 लाख की देनदारी सामने आयी है.
गोपालगंज : वर्षों से पैक्स में ऑडिट नहीं हो रहा था. विभाग ने जब सख्ती बरती, तो पैक्स का ऑडिट होने लगा, जिसमें डेढ़ दर्जन ऐसे पैक्स पाये गये हैं, जिनमें लगभग 59 लाख रुपये की देनदारी तत्कालीन प्रबंधक और अध्यक्ष पर गिरी है. ऑडिट की रिपोर्ट जिला अंकेक्षण पदाधिकारी के द्वारा बैंक, डीसीओ, एआर के कार्यालय को भेजी जा चुकी है. ऑडिट रिपोर्ट के अध्ययन में एआर (सहायक निबंधक प्राथमिक सहकारी साख समितियां) कार्यालय जुटा है. अध्ययन के साथ ही यह अब स्पष्ट होने लगा है कि किन पैक्स में पूर्व अध्यक्ष और प्रबंधक के द्वारा गबन किया गया है. विभाग ऑडिट के बाद इसे गबन मानता है.
कारण स्पष्ट है पैक्स चुनाव के बीते एक साल से अधिक हो चुका है. इसके बाद भी अगर पैक्स अध्यक्ष और प्रबंधक पर देनदारी है, तो उनकी मंशा पर सवाल खड़ा होता है. पहले तो पूर्व अध्यक्ष और प्रबंधक ऑडिट कराने से ही भागते रहे. जब विभाग ने कड़ाई से ऑडिट कराया, तो गबन का मामला सामने आया. अब तक गबन करने वाले एक भी पैक्स अध्यक्ष या प्रबंधक ने देनदारी की राशि को संबंधित पैक्स में नहीं जमा किया है. नतीजा है कि सहकारी विभाग के पास देनदारी की राशि की रिकवरी एक बड़ी चुनौती साबित हो सकती है.
डीसीओ ऑफिस.
सासामुसा पैक्स तीन दशक से है डिफाल्टर
सासामुसा पैक्स 1992 से डिफाल्टर है. डिफाल्टर होने के कारण पैक्स के कार्यों का लाभ किसानों को नहीं मिल रहा. किसान सफर कर रहे हैं. वैसे तो जिले में 46 पैक्स अब भी डिफाल्टर हैं. लेकिन सासामुसा पैक्स का इस तीन दशक से ऑडिट तक नहीं हो सका है. जानकारों का मानना है कि सासामुसा पैक्स में तत्कालीन अध्यक्षों ने अपने जिम्मेवारी का निर्वहन नहीं किया और न ही विभाग ने इस पर कभी ध्यान दिया. इसके कारण अकेले सासामुसा पैक्स में 50 लाख से अधिक का देनदारी होने की बात कही जा रही है, जो ऑडिट के बाद ही सामने आ सकती है.
सर्टिफिकेट केस की तैयारी
एआर ऑफिस सहकारी नियमों के अनुसार ऑडिट रिपोर्ट में सामने आयी देनदारी की रिकवरी के लिए डीसीओ के कोर्ट में सरचार्ज करने या सर्टिफिकेट केस के लिए आवेदन करेगा. डीसीओ कोर्ट इस मामले की सुनवाई कर या तो राशि रिकवरी के लिए सरचार्ज या सर्टिफिकेट केस चला सकता है, यह कोर्ट के ऊपर निर्भर होगा. वैसे एआर ऑफिस कार्रवाई की तैयारी में ऑडिट रिपोर्ट को खंगालने में जुटा हुआ है. गबन में पूर्व पैक्स अध्यक्ष और प्रबंधनों की मुश्किल बढ़ सकती है.
क्या कहते हैं अधिकारी
ऑडिट कराया गया है. अभी भी 23 पैक्स का ऑडिट होना बाकी है. ऑडिट रिपोर्ट में जिन पैक्स पर देनदारी निकल रही है. नियमानुकूल विभाग कार्रवाई की तैयारी में है. गलत करने वाले कोई भी होंगे, बख्शा नहीं जायेगा.
बबन मिश्र, डीसीओ, गोपालगंज
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