अस्पताल को चाहिए संजीवनी
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :03 Dec 2016 9:02 AM (IST)
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सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में संक्रमण फैलने की आशंका बनी हुई है. यहां आनेवाले मरीजों को बदबू और सड़ांध के बीच इलाज किया जा रहा है. गोपालगंज : आप सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में इलाज के लिए आ रहे हैं, तो जरा ठहरें. यहां संक्रमण फैलने का पुख्ता इंतजाम है. इमरजेंसी वार्ड इन […]
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सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में संक्रमण फैलने की आशंका बनी हुई है. यहां आनेवाले मरीजों को बदबू और सड़ांध के बीच इलाज किया जा रहा है.
गोपालगंज : आप सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में इलाज के लिए आ रहे हैं, तो जरा ठहरें. यहां संक्रमण फैलने का पुख्ता इंतजाम है. इमरजेंसी वार्ड इन दिनों खुद बीमार है. इस वार्ड को अब संजीवनी की जरूरत है. सदर अस्पताल की इमरजेंसी जिस कमरे में चल रही है, वहां से हटाना होगा. इमरजेंसी के लिए या तो नया भवन नयी तकनीक से बनाया जाये या पहले जिस कमरे में था वहां शिफ्ट किया जाये. जिस कमरे में इमरजेंसी वार्ड चल रहा है वह कमरा पूरी तरह से जर्जर था. तत्कालीन डीएम पंकज कुमार ने इस लावारिश भवन में 30 लाख रुपये खर्च कर इमरजेंसी को यहां शिफ्ट कराया, लेकिन पीछे से शौचालय का पानी इमरजेंसी वार्ड तक पहुंचता है, जो सामान्य लोगों को भी बीमार करने के लिए काफी है. इसके अलावा वार्ड की साफ-सफाई भी बेहतर तरीके से नहीं होने के कारण स्थिति और भयावह बन गयी है.
इमरजेंसी को चाहिए माननियों का साथ
सदर अस्पताल की इमरजेंसी को संजीवनी जिले के माननीय ही दे सकते हैं. सांसद, विधायक, विधान पार्षद, अपने एेच्छिक मद से 40-50 लाख रुपये का आवंटन अगर सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड के लिए करते हैं तो यहां सौ बेडों का अत्याधुनिक इमरजेंसी वार्ड का निर्माण किया जा सकता है. इस दिशा में अब तक किसी माननीय ने पहल नहीं की है. अगर माननीय पहल करते हैं तो जिले में प्रतिदिन 4-5 लोगों की जान बचायी जा सकती है जिनको इमरजेंसी में आते ही डॉ रेफर कर देते हैं और इलाज के लिए जाने के दौरान रास्ते में मौत हो जाती है.
बेड पर गंदगी देख भड़के सीएस
इमरजेंसी वार्ड की अचानक जांच करने के लिए सिविल सर्जन डॉ मधेश्वर प्रसाद शर्मा पहुंच गये. इमरजेंसी वार्ड के बेड पर चादर नहीं थी. गंदगी जहां-तहां पसरी थी. सीएस की फटकार के साथ ही बेड पर चादर बिछा दी गयी. उनके जाने के बाद फिर स्थिति जैसी को तैसी बन गयी.
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