खजूरबानी में बांस को बनाया था सिंबल
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :27 Aug 2016 6:06 AM (IST)
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शराब कांड के बाद खजूरबानी सुर्खियों में है. यहां शराब को सुनियोजित तरीके से बना कर कारोबार किया जाता था. खजूरबानी का परदा अब परत-दर-परत खुलने लगा है. चापाकल से शराब निकलने के बाद एक और सनसनीखेज खुलासा हुआ है. प्रस्तुत है यह रिपोर्ट. गोपालगंज : खजूरबानी ने अपने कारनामों से काला इतिहास बनाया है. […]
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शराब कांड के बाद खजूरबानी सुर्खियों में है. यहां शराब को सुनियोजित तरीके से बना कर कारोबार किया जाता था. खजूरबानी का परदा अब परत-दर-परत खुलने लगा है. चापाकल से शराब निकलने के बाद एक और सनसनीखेज खुलासा हुआ है. प्रस्तुत है यह रिपोर्ट.
गोपालगंज : खजूरबानी ने अपने कारनामों से काला इतिहास बनाया है. यहां शराब माफियाओं ने अपने नेटवर्क को काफी मजबूती के साथ तैयार किया था. 21 लोगों की मौत के बाद परत-दर-परत नये-नये खुलासे हो रहे हैं. खजूरबानी से गुजरने वाली छाड़ी नदी के बीच में शराब को जार में रख कर छुपाया जाता था. महीनों तक शराब को नशीला बनाने के लिए पानी के बीच में रखा जाता था.
नदी में शराब कहां रखी गयी है, इसके लिए सिंबल के रूप में नदी के किनारे बांस लगा दिया जाता था. बांस के आस-पास ही शराब को रखा गया था. उत्पाद विभाग की टीम ने 19 अगस्त की रात में यहां जब रेड की. 20 अगस्त की सुबह उत्पाद विभाग के अधिकारी की नजर बांस पर पड़ी. बांस के आसपास जब खंगाला गया, तो यहां से बड़ी मात्रा में शराब बरामद हुई. इतना ही नहीं रेलवे लाइन के किनारे भी शराब को छुपाया गया था. अधिकारियों ने जेसीबी लगा कर एक-एक ठिकानों को ध्वस्त किया. नदी का उपयोग यहां अवैध शराब के लिए पिछले दो दशकों से किया जाता था.
जहां-जहां मिली ईंट, वहीं निकली शराब : खजूरबानी में रेड करने जब अधिकारी पहुंचे, तो उनके भी होश उड़ गये थे.जहां-जहां खजूरबानी के इलाके में ईंट दिखायी दी, उसी के आसपास मिट्टी में दबी शराब बरामद हुई. शराब इतनी कि एक साथ 10 हजार लोगों को पिलायी जा सकती थी. महुआ, मीठा से लेकर केमिकल और उपकरण तक बरामद किये गये. अब उत्पाद विभाग की टीम एक-एक बिंदुओं पर कार्रवाई में जुटी है.
महावीरी अखाड़ा था मिशन : शराब माफिया इतने बड़े पैमाने पर शराब बना कर महावीरी अखाड़ा में बेचने की तैयारी में थे.
महज संयोग था कि 15 अगस्त को यहां शराब पीने, जितने लोग पहुंचे, उनमें अधिकतर ने या तो मौत को गले लगा लिया या आंखों की रोशनी छिन गयी. कुछ लोग अब भी बीमार है. अगर यह शराब महावीरी अखाड़ा के दिन लोगों ने पी होती, तो शायद मौत की संख्या सैकड़ों तक पहुंच गयी होती.
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