सदर अस्पताल में कराहते रहे मरीज, रणनीति बनाते रहे डॉक्टर

Published at :07 Jun 2016 4:09 AM (IST)
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सदर अस्पताल में कराहते रहे मरीज, रणनीति बनाते रहे डॉक्टर

आरोपितों की नहीं हुई गिरफ्तारी, तो होगी अनिश्चितकालीन हड़ताल गोपालगंज : सोमवार को सदर अस्पताल के ओपीडी में ताला लटका हुआ था. मरीज और उनके परिजन ओपीडी में परचा कटवा कर डॉक्टर के आने का इंतजार कर रहे थे. सुबह 10.30 बजे अस्पताल के ओपीडी में लंबी कतार लगी थी. जब डॉक्टर नहीं आये, तो […]

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आरोपितों की नहीं हुई गिरफ्तारी, तो होगी अनिश्चितकालीन हड़ताल

गोपालगंज : सोमवार को सदर अस्पताल के ओपीडी में ताला लटका हुआ था. मरीज और उनके परिजन ओपीडी में परचा कटवा कर डॉक्टर के आने का इंतजार कर रहे थे. सुबह 10.30 बजे अस्पताल के ओपीडी में लंबी कतार लगी थी. जब डॉक्टर नहीं आये, तो मरीज जहां-तहां फर्श पर कराह रहे थे. इनके दर्द की आवाज बगल में बैठक कर रहे डॉक्टरों के कानों तक नहीं पहुंच रही थी. कटेया से इलाज कराने पहुंची बहुरानी देवी ने बताया कि उनके पेट में जोर का दर्द है कोई इलाज नहीं कर रहा है.
वह अस्पताल के फर्श पर कराह रही थी. अकेले बहुरानी ही नहीं बल्कि दो दर्जन मरीज कराह रहे थे. उधर, डॉक्टर हड़ताल की रणनीति बनाने में लगे हुए थे. अस्पताल में आये दिन मरीजों के अभिभावकों के द्वारा डॉक्टर से किये जा रहे दुर्व्यवहार, मारपीट, अस्पताल में तोड़फोड़ की घटना को लेकर डॉक्टर मंथन कर रहे थे.
डॉक्टरों के बीच असुरक्षा और भीड़ की बर्बरता का खौफ दिख रहा था. इस खौफ और भय के बीच पुलिस से सुरक्षा की उम्मीद लिये डॉक्टर ने एक दिवसीय हड़ताल कर जिला प्रशासन को चेतावनी दी कि दो दिनों के भीतर हमलावरों की गिरफ्तारी नहीं होती है, तो अनिश्चि›तकालीन हड़ताल पर डॉक्टर जाने को विवश होंगे. इस बैठक में डॉ एसके गुप्ता, डॉ मिथिलेश शर्मा, डॉ एसएस मिश्रा, डॉ नौशाद, डॉ प्रमोद कुमार, डॉ नेयाज, डॉ अशोक कुमार, डॉ पीसी सिन्हा, डॉ आरडब्लू सिंह, डॉ संजय कुमार, डॉ एके चौधरी, डॉ विजय कुमार, डॉ अमर कुमार, डॉ रमेश राम आदि मौजूद थे.
बिना इलाज कराये लाैट गये मरीज
मरीजों की जान पर भारी पड़ी हड़ताल : ओपीडी में ताला लटक जाने से मरीजों की जान पर डॉक्टरों की हड़ताल भारी पड़ गयी. सुबह सात बजे से ओपीडी में इलाज के लिए कतार में लगे मीरगंज के विमल कुमार ने बताया कि उनकी पत्नी पेट से है. महिला डॉक्टर से दिखाना था. दिन के 10.30 बजे पता चला कि डॉक्टर इलाज नहीं करेंगे. कई ने नर्सिंग होम में दिखाने का प्रयास किया, तो देर रात में डॉक्टर को देखने को वक्त मिला है. पूरा दिन बरबाद हो गया.
वहीं, बगल में बैठी रश्मि त्रिपाठी के पैर में दर्द से परेशान थी. रश्मि त्रिपाठी ने प्राइवेट डॉक्टर से दिखाने के लिए कई जगह प्रयास किया. लेकिन, देर शाम में नंबर मिलने से उन्हें बिना इलाज कराये लौटना पड़ा. उसी तरह कुचायकोट से अपनी मां विमला देवी को इलाज कराने पहुंचे राजीव ने बताया कि आंख की जांच करानी थी. इसके लिए छुट्टी लेकर आया था. मजबूरन प्राइवेट में आंख की जांच करानी पड़ी.
मांझा में चौथे दिन भी नहीं हुआ इलाज : मांझा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में चौथे दिन भी ताला लटका रहा. इमरजेंसी सेवा बहाल होने का दावा किया गया था, लेकिन अधिकतर डॉक्टर सदर अस्पताल में आंदोलन को धरदार बनाने में लगे रहे. इसके कारण मरीजों का इलाज नहीं हुआ.
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