जोरहाट विधानसभा क्षेत्र से चुनाव हारे गौरव गोगोई
गौरव गोगोई
GAURAV GOGOI : पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रहे कांग्रेस नेता गौरव गोगोई चुनाव हार गए हैं. वे जोरहाट विधानसभा क्षेत्र से चुनावी मैदान में थे. उनके पिता तरुण गोगोई सबसे लंबे समय तक असम के मुख्यमंत्री रहे थे.
GAURAV GOGOI : कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गौरव गोगोई जोरहाट विधानसभा क्षेत्र से चुनाव हार गए हैं. उन्हें बीजेपी के नेता हितेंद्रनाथ गोस्वामी ने 23182 वोट से हराया. गौरव गोगोई असम कांग्रेस के अध्यक्ष हैं.यह जानकारी निर्वाचन आयोग की ओर से दी गई है.
14 राउंड की गिनती के बाद आया चुनाव परिणाम
गौरव गोगोई जोरहाट से लोकसभा सदस्य हैं. 14 राउंड की गिनती के बाद गौरव गोगोई चुनाव हार गए. उन्हें चुनाव में कुल 46257 वोट मिले, जबकि हितेंद्रनाथ गोस्वामी को 69457 वोट मिले. गोगोई विधानसभा चुनाव में पहली बार मैदान में उतरे थे, जबकि गोस्वामी यहां से पांच बार विधायक रह चुके हैं.
2024 के लोकसभा चुनाव में जोरहाट सीट से जीते थे गौरव गोगोई
लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई ने 2024 में चुनाव जीता था. उन्होंने लोकसभा चुनाव में भाजपा के तपन कुमार गोगोई को 1,44,393 मतों के अंतर से हराकर जोरहाट लोकसभा सीट जीती थी. असम की सभी 126 विधानसभा सीट के लिए मतदान नौ अप्रैल को हुआ था. गौरव गोगोई कालियाबोर लोकसभा सीट से 2014 और 2019 में चुनाव जीत चुके हैं.
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By रजनीश आनंद
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राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.
रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.
आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.
रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.
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