बंगाल में क्यों ढहा 'दीदी' का किला? बेरोजगारी और आरजी कर कांड समेत इन मुद्दों ने पलटी ममता की सत्ता

Edited by Sameer Oraon
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ममता बनर्जी

West Bengal Election Result 2026: पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 में ममता बनर्जी की हार ने सबको चौंका दिया है. आखिर क्यों ढह गया 'दीदी' का अभेद्य किला? बेरोजगारी के आंकड़ों, आरजी कर कांड का आक्रोश और शीतलकुची जैसी हिंसा की घटनाओं ने कैसे बदली बंगाल की सत्ता, पढ़िए इस विस्तृत रिपोर्ट में.

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West Bengal Election Result 2026, कोलकाता : पश्चिम बंगाल की राजनीति में ममता बनर्जी का किला आखिरकार ढह गया है. 2026 के विधानसभा चुनाव के नतीजों ने साफ कर दिया है कि बंगाल की जनता ने बदलाव का मन बना लिया था. ताजा आंकड़ों के मुताबिक बीजेपी 177 सीट पर आगे चल रही है तो टीएमसी केवल 94 सीटों पर ही बढ़त बनाए हुए है. ऐसे में सवाल ये है कि कभी बंगाल की राजनीति में अपनी दबदबा रखने वाली दीदी कैसे हार गई. क्या इसके पीछे केवल बीजेपी का मजबूती से चुनाव लड़ना और अच्छी रणनीति बनना भर रहा? नहीं. बल्कि इसके पीछे कुछ ऐसे भी बुनयादी मुद्दे रहे जिसे आम आदमी बीते कई सालों से जूझ रहा था. आइए जानते हैं वे 4 बड़ी वजहें, जिन्होंने ‘दीदी’ को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाया.

रोजगार के दावों और हकीकत में जमीन-आसमान का अंतर

ममता बनर्जी ने चुनाव प्रचार के दौरान बार-बार दावा किया कि उनकी सरकार ने 2 करोड़ लोगों को रोजगार दिया है. लेकिन हकीकत कुछ और ही बयां कर रही थी. जब सरकार ने ‘युवा साथी योजना’ शुरू की, तो उसके लिए 85 लाख युवाओं ने आवेदन कर दिए. यह आंकड़ा खुद-ब-खुद चीख-चीख कर कह रहा था कि बंगाल में बेरोजगारी की स्थिति कितनी भयानक है. दावों और हकीकत के इसी अंतर ने युवाओं को तृणमूल से दूर कर दिया.

प्रवासी श्रमिकों की अनसुनी चीखें

एक तरफ सरकार बंगाल के विकास का मॉडल पेश कर रही थी, वहीं दूसरी तरफ चुनावों से ठीक पहले विभिन्न राज्यों से बंगाल के प्रवासी श्रमिकों की मौत की दुखद खबरें आती रहीं. इन घटनाओं ने ममता सरकार के विकास के दावों की कलई खोल दी. जनता के बीच यह संदेश गया कि अगर राज्य में विकास और रोजगार होता, तो राज्य के लोगों को दूसरे राज्यों में जाकर जान नहीं गंवानी पड़ती.

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राजनीतिक हिंसा और शीतलकुची का जख्म

बंगाल में पिछले कुछ चुनावों से जारी राजनीतिक हिंसा ने आम लोगों के मन में डर और गुस्सा दोनों भर दिया था. 2021 के चुनाव के दौरान शीतलकुची में हुई गोलीबारी में जान गंवाने वालों के परिजनों को सरकार ने अब तक कोई ठोस राहत नहीं दी. अपनों को खोने का यह गम और न्याय न मिलने का गुस्सा इस बार मतदान केंद्रों पर साफ दिखा. कानून-व्यवस्था की बदहाली ममता बनर्जी के खिलाफ बीजेपी का सबसे बड़ा हथियार बनी.

आरजी कर कांड: जब गुस्से ने लिया जनाक्रोश का रूप

बंगाल चुनाव में ‘दीदी’ के किले को गिराने वाली आखिरी और सबसे बड़ी चोट आरजी कर मेडिकल कॉलेज की घटना थी. एक महिला ट्रेनी डॉक्टर के साथ हुई उस बर्बरता ने पूरे देश को हिला दिया था. बंगाल की सड़कों पर उतरे छात्र, डॉक्टर और आम नागरिकों के गुस्से को सरकार भांप नहीं पाई. महिला सुरक्षा के मुद्दे पर ममता बनर्जी का गिरता ग्राफ चुनाव परिणामों में उनकी हार की सबसे बड़ी वजह बनी.

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Sameer Oraon

लेखक के बारे में

By Sameer Oraon

समीर उरांव, डिजिटल मीडिया में सीनियर जर्नलिस्ट हैं और वर्तमान में प्रभात खबर.कॉम में सीनियर कटेंट राइटर के पद पर हैं. झारखंड, लाइफ स्टाइल और स्पोर्ट्स जगत की खबरों के अनुभवी लेखक समीर को न्यूज वर्ल्ड में 5 साल से ज्यादा का वर्क एक्सपीरियंस है. वह खबरों की नब्ज पकड़कर आसान शब्दों में रीडर्स तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं. साल 2019 में बतौर भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता करने के बाद उन्होंने हिंदी खबर चैनल में बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद समीर ने डेली हंट से होते हुए प्रभात खबर जा पहुंचे. जहां उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग और वैल्यू ऐडेड आर्टिकल्स लिखे, जो रीडर्स के लिए उपयोगी है. कई साल के अनुभव से समीर पाठकों की जिज्ञासाओं का ध्यान रखते हुए SEO-ऑप्टिमाइज्ड, डेटा ड्रिवन और मल्टीपल एंगल्स पर रीडर्स फर्स्ट अप्रोच राइटिंग कर रहे हैं.

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