होलिका दहन में भद्रा की काली छाया

Published at :22 Mar 2016 12:19 AM (IST)
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होलिका दहन में भद्रा  की काली छाया

23 के भोर में होलिका दहन का है शुभ मुहूर्त गोपालगंज : ग्रह नक्षत्रों का उचित संयोग न बनने से होलिका दहन में पेच फंसा है. तकरीबन 60 साल बाद ऐसा संयोग बना है जब चतुर्दशी और पूर्णिमा का मान स्पष्ट नहीं है. लिहाजा, धर्मग्रथों के निर्देशानुसार इस बार होलिका दहन 23 मार्च के भोर […]

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23 के भोर में होलिका दहन का है शुभ मुहूर्त

गोपालगंज : ग्रह नक्षत्रों का उचित संयोग न बनने से होलिका दहन में पेच फंसा है. तकरीबन 60 साल बाद ऐसा संयोग बना है जब चतुर्दशी और पूर्णिमा का मान स्पष्ट नहीं है. लिहाजा, धर्मग्रथों के निर्देशानुसार इस बार होलिका दहन 23 मार्च के भोर में होगा. यानी सूर्योदय से पहले अगर होलिका दहन न हुआ,
तो उसका उचित संयोग नहीं मिल पायेगा. होलिका दहन के बाद रंगों का पर्व होली मनायी जायेगी. कुछ विद्वानों का मत है कि रंग 23 के बजाय 24 मार्च को खेलना उचित रहेगा.अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा के अध्यक्ष राजेंद्र पांडेय, ज्योतिषि बलराम पाठक आदि ने कहा है कि फाल्गुन शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि 22 मार्च को दिन में 2.29 तक रहेगी. इसके बाद पूर्णिमा तिथि लगेगी जो 23 मार्च को दिन में 4.08 बजे तक रहेगी,
जो 22 मार्च को दिन में 2.29 से रात 3.19 बजे तक भद्रा भी रहेगा. भद्रा में होलिका दहन व राखी बांधना वर्जित है. वहीं, होलिका दहन पूर्णिमा तिथि में ही होना चाहिए. 23 मार्च को 5.58 बजे सूर्योदय होगा. ऐसे में होलिका दहन भद्रा के बाद यानी 23 मार्च को भोर 3.20 से 5.58 बजे के पहले करना चाहिए. निर्णय सिंधु व धर्म सिंधु का हवाला देते हुए वह बताते हैं कि रंग पूर्णिमा नहीं प्रतिप्रदा तिथि में खेलना चाहिए. यह स्थिति 24 मार्च को बनेगी.
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