मैनेज के लिए मांगे थे 50 हजार रुपये

Updated at :30 Jan 2016 8:11 AM
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मैनेज के लिए मांगे थे 50 हजार रुपये

मांझा (गोपालगंज) : प्रखंड के बलुही उत्क्रमित मध्य विद्यालय में जांच करने पहुंची पकड़ी गयी निगरानी की फर्जी टीम पहले सेे ही चार स्कूलों की जांच कर चुकी थी. खुद को निगरानी के अधिकारी बता कर स्कूल की एमडीएम, उपस्थिति पंजी, शिक्षकों की उपस्थिति पंजी, स्कूल की व्यय राशि, स्कूल भवन निर्माण से जुड़े कागजातों […]

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मांझा (गोपालगंज) : प्रखंड के बलुही उत्क्रमित मध्य विद्यालय में जांच करने पहुंची पकड़ी गयी निगरानी की फर्जी टीम पहले सेे ही चार स्कूलों की जांच कर चुकी थी. खुद को निगरानी के अधिकारी बता कर स्कूल की एमडीएम, उपस्थिति पंजी, शिक्षकों की उपस्थिति पंजी, स्कूल की व्यय राशि, स्कूल भवन निर्माण से जुड़े कागजातों की जांच तथा भौतिक सत्यापन कर शिक्षकोंं को अपनी गिरफ्त में लेने के बाद मोटी रकम मैनेज के नाम पर वसूलता था.
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के विधि सचिव रोहित चौबे खुद को अधिकारी बताता था. बाकि अन्य जवान अपने को सब इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी बताते थे. चालक से लेकर सब इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी कागजातों की जांच करते थे. जबकि, रोहित चौबे उसे जब्त कर लेता था तथा चालक एकमा के रहनेवाले अनवर अंसारी धीरे से पैसा देकर मैनेज कर लेने की बात कहता था. बलुही स्कूल में जिप्सी पर निगरानी का बोर्ड लगाये ये लोग गुरुवार की सुबह 11.30 बजे पहुंचे थे.
बारी-बारी से स्कूल के रजिस्टर की जांच करने के बाद बन रहे भवन में धांधली बता कर कार्रवाई की बात करने लगे, तभी चालक अनवर ने हेडमास्टर राकेश शुक्ला को अलग बुला कर 50 हजार रुपये में मैनेज कर लेने की बात कही. शिक्षक का चेहरा उड़ गया. इतनी बड़ी रकम कहां से लाएं. इसी ऊहापोह में पड़े हुए थे, तभी उसके पास इस टीम में अनिल यादव, विश्ववनाथ शर्मा व अशोक यादव पहुंच कर दो घंटे में व्यवस्था कर लेने की बात कह चले गये. इसके बाद मध्य विद्यालय, पथरा, मध्य विद्यालय, भैंसही, उत्क्रमित मध्य विद्यालय, प्यारेपुर में भी रेकाॅर्ड की जांच कर दो-दो हजार रुपये चालक ने बतौर रिश्वत ले लिया था.
गैंग के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी पुलिस : पटना के गर्दनीबाग के मिठाचक मुहल्ला में बजाप्ता कार्यालय खोल कर गिनरानी का फर्जी कारोबार चलाया जा रहा था, जिसका मास्टर माइंड सारण के शीतलपुर का रहनेवाला रोहित कुमार चौबे ने अपना कार्यालय खोल कर पढ़े-लिखे युवकों को अपने नेटवर्क में शामिल कर निगरानी का अधिकारी बना रखा था.
खुद मानवाधिकार आयोग में विधि सचिव के पद पर अवैतनिक कार्यरत था. राज्य भर के सरकारी दफ्तरों में अचानक छापेमारी कर मैनेज करने के नाम पर पैसा वसूलने का खेल पिछले तीन सालों से कर रहा था. बलुही में हुई गिरफ्तारी के बाद इस गैंग में खलबली मची हुई है.
बलुही स्कूल में जिस जिप्सी से निगरानी के फर्जी अधिकारी पहुंचे थे, उस जिप्सी की जांच में पुलिस जुट गयी है. पुलिस ने परिवहन विभाग को पत्र लिख कर गाड़ी की सच्चाई जानने के लिए पूरी कोशिश में जुटी है. मोटे तौर पर पुलिस को पता चला है कि जिप्सी को एकमा के रहनेवाले चालक अनवर अंसारी ने व्यवस्था की थी. जिप्सी किसकी है,
स्कूल में आइकार्ड के साथ जायेंगे अधिकारी : डीइओ अशोक कुमार ने बलुही स्कूल में हुई घटना को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट कर दिया है कि शिक्षा विभाग के कोई भी अधिकारी स्कूल में जांच करने पहुंचते हैं, तो आइकार्ड के साथ जायेंगे. जिन अधिकारी के पास आइकार्ड नहीं है, वे अपना आइकार्ड बनवा सकते हैं. ताकि, अधिकारी को अगर शिक्षक नहीं पहचानता है, तो कंफ्यूजन की स्थिति में झड़प जैसी घटना न हो.
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