ताकि कुहरे के ''प्रहार'' से सुरक्षित रहें होनहार
गोपालगंज : शहर के अंदर तकरीबन सात स्कूल ऐसे हैं, जो खुद वाहन नहीं रखते. लेकिन, प्रतिमाह अच्छी खासी रकम स्कूल प्रबंधतंत्र को बतौर कमीशन मिलती रहती है. वाहनचालक भी कमाने की होड़ में रहते हैं. ऐसे स्कूल के मालिक बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं. इनके वाहनों में ठुंस कर बच्चे भरे […]
गोपालगंज : शहर के अंदर तकरीबन सात स्कूल ऐसे हैं, जो खुद वाहन नहीं रखते. लेकिन, प्रतिमाह अच्छी खासी रकम स्कूल प्रबंधतंत्र को बतौर कमीशन मिलती रहती है. वाहनचालक भी कमाने की होड़ में रहते हैं. ऐसे स्कूल के मालिक बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं. इनके वाहनों में ठुंस कर बच्चे भरे जाते हैं.
यही नहीं, तमाम नियमों को दरकिनार कर रसोई गैस सिलेंडरों से भी वाहन चलाते हैं. मारुति वैन में तय सात सीट की अपेक्षा बच्चों की संख्या कम से कम 18 रहती है. जितने बच्चे बढ़ेंगे, उतनी इनकी आमदनी भी बढ़ेगी. ठंड के इस मौसम में कई वाहनों के शीशे फूटे हैं, तो कई की स्थिति काफी जर्जर है. सनसनाती हवा बच्चों को मुश्किल में डाल रही है. स्कूल से लौट रहे बच्चों को ठंड से सर्दी, बुखार व जुकाम जैसी बीमारियां परेशान कर रही है.
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