आबादी अलग-अलग, पैसा एक समान

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आबादी अलग-अलग, पैसा एक समानपंचायतों के विकास में बढ़ेगा बड़ा गैप15 हजार की आबादी वाली पंचायत को वही राशि, जो 15 सौ आबादी वाली पंचायत को14 वें वित्त आयोग से हर पंचायत को मिले 13 लाख 51 हजार 24 रुपयेसंवाददाता,पटनापंचायतों की आबादी अलग-अलग और पैसे एक समान. पंद्रह सौ की आबादी और 10 हजार की […]

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आबादी अलग-अलग, पैसा एक समानपंचायतों के विकास में बढ़ेगा बड़ा गैप15 हजार की आबादी वाली पंचायत को वही राशि, जो 15 सौ आबादी वाली पंचायत को14 वें वित्त आयोग से हर पंचायत को मिले 13 लाख 51 हजार 24 रुपयेसंवाददाता,पटनापंचायतों की आबादी अलग-अलग और पैसे एक समान. पंद्रह सौ की आबादी और 10 हजार की आबादीवाली ग्राम पंचायतों को विकास कार्यों के लिए एक समान पैसे मिल रहे हैं. 14 वें वित्त आयोग की इस राशि के बांटने के इस फार्मूले से पंचायतों के विकास में बड़ा गैप बढ़ने की आशंका है. अब जो राशि पंचायतों के विकास के लिए भेजी जा रही है, उसका आधार आबादी नहीं है. किसी ग्राम पंचायत की आबादी 15 हजार हैं, तो उसको भी उतनी ही राशि मिलेगी, जितनी कि किसी दूसरी कम आबादीवाली पंचायत को मिलेगी. इसका असर राज्य की 8397 पंचायतों पर दिखने का संभावना है. 14 वें वित्त आयोग की अनुशंसा से प्राप्त राशि का हर पंचायत में समान वितरण किया जा रहा है. केंद्र से 14 वें वित्त आयोग से पहली किस्त के रूप में हर पंचायत को 13 लाख 51 हजार 24 रुपये आवंटित भी किया जा चुका है. 14 वें वित्त आयोग ने अपनी अनुशंसा में केंद्रीय सहायता के रूप में जारी सभी पैसे सीधे ग्राम पंचायतों को देने की अनुशंसा की है. आयोग की अनुशंसा में पंचायत समिति और जिला परिषद को राशि नहीं दी जानी है. अब इसका असर पंचायतों के विकास पर सीधा दिखेगा. 14 वित्त आयोग ने केंद्र द्वारा दी गयी राशि के खर्च करने की गाइड लाइन भी तैयार किया गया है. इस राशि का उपयोग ग्राम पंचायत नागरिकों के लिए जलापूर्ति, सफाई, सेप्टेज प्रबंधन सहित मल व्यवस्था (सिवरेज), वर्षा जल की निकासी, ठोस कचरा प्रबंधन, सड़कों पर रोशनी, सड़क व पैदल पथ, उद्यान, खेल का मैदान, कब्रिस्तान और श्मशान के सुदृढ़ीकरण पर खर्च कर सकेंगी. बिहार में ग्राम पंचायतों का गठन 1991 की जनसंख्या के आधार पर किया गया है. इस आधार पर पंचायतों की आबादी में असमान वितरण हुआ है. 2001 की जनसंख्या में ही सभी पंचायतों की आबादी में वृद्धि दर्ज की गयी है. 2001 की जनसंख्या के आधार पर पश्चिम चंपारण जिले में तीन व सारण में एक ऐसी पंचायत थी, जहां की आबादी महज 1000-1500 के बीच थी. 2001 की जनसंख्या के आधार पर ही राज्य के पूर्वी चंपारण जिले की 98 पंचायतें, दरभंगा में कुल 96 पंचायतें और सीतामढ़ी की 81 पंचायतों का जनसंख्या 10 हजार से अधिक थी. किसी पंचायत की आबादी 1500 तो किसी की तीन हजार, किसी की पांच हजार तो किसी की 10 हजार हैं. आबादी चाहे जैसी हो, पर सभी को विकास के लिए समान राशि दी जा रही है.2025 के बाद होगा पंचायतों का पुनर्गठन इधर सरकार ने पंचायतती राज एक्ट 2006 में संशोधन कर पंचायतों के पुनर्गठन को 2025 तक टाल दिया है. यानी कि राज्य में पंचायतों का गठन 2025 के बाद ही किया जायेगा. जिस पंचायत की जितनी जनसंख्या है, वह 2025 तक वही बनी रहेगी.

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