फल्गु व इसकी सहायक नदियों के किनारे लगेंगे दो लाख 16 हजार पौधे
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 14 Jun 2024 10:19 PM
जिले को वनाच्छादित करने के लिए लगातार हो रहा काम
गया. जल जीवन हरियाली अभियान के अंतर्गत मनरेगा से गया में लगभग छह लाख से अधिक पौधे प्रतिवर्ष लगाये जा रहे हैं, ताकि जिले को अधिक से अधिक वनाच्छादित किया जा सके. इस वित्तीय वर्ष फल्गु नदी व उसकी सहायक वितरिकाओं के किनारे वृहद पैमाने पर पौधारोपण का लक्ष्य है, जिसमें लगभग 2,16,000 पौधे फल्गु और उसकी सहायक नदियों के किनारे लगाये जायेंगे. वित्तीय वर्ष 2023-24 में भी ग्रामीण विकास विभाग से प्राप्त 640000 के लक्ष्य के विरुद्ध 952000 पौधे लगाये गये थे. इस वर्ष भी 7.04 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य प्राप्त है. उप विकास आयुक्त ने बताया कि इस बार जिले में पिछले वर्ष की तुलना में अधिक पौधे लगाये जायेंगे. 7.04 लाख विभागीय लक्ष्य के अलावा प्रत्येक प्रखंड में कम से कम 5000 मोरिंगा (सहजन) के पौधे लगाने का लक्ष्य है. मोरिंगा का पौधारोपण विशेष रूप से स्वयं सहायता सदस्य की जीविका दीदियों की निजी जमीन पर मनरेगा की व्यक्तिगत लाभ की योजना के तहत कराया जायेगा. इससे एक तरफ दीदी को जहां रोजगार उपलब्ध होगा. वहीं दूसरी तरफ दीदियां मोरिंगा के फल व फूल को बेचकर तथा मोरिंगा के पौधे से प्राप्त पत्तियों का पाउडर बनाकर उसका पशु आहार बनाकर व्यावसायिक रूप से उनका इस्तेमाल कर आर्थिक स्वावलंबी बनेंगे. गया में सहजन के पत्तों का प्रसंस्करण व विपणन का प्रयास डीडीसी ने बताया कि मोरिंगा के पत्तों के प्रसंस्करण व विपणन के लिए नाबार्ड की सहायता ली जा रही है. बिहार में गया जिला में इस प्रकार का पहला प्रयास किया जा रहा है. जिससे नरेगा पौधारोपण के तहत दीदियों की सतत आजीविका सुरक्षित किया जा सके. बताया कि जो सड़कें बाहर के प्रदेशों से गया जिला में प्रवेश करती हैं उन रास्तों के किनारे पड़ने वाली पंचायतों मे जापानी तकनीक मियावाकी का प्रयोग कर मनरेगा से पौधारोपण करने का प्रयास किया जा रहा है. मियावाकी तकनीक के तहत लगाये गये पौधों में काफी वृद्धि होती है तथा कम स्थान में ज्यादा पौधे लगते हैं. गया के प्रत्येक प्रखंड में लगेंगे एक-एक हजार बांस के पौधे उप विकास आयुक्त ने बताया कि गया जिले में सूक्ष्म कुटीर उद्योग को बढ़ावा देने के लिए प्रत्येक प्रखंड में लगभग 1000 बांस के पौधे लगाने का सभी कार्यक्रम पदाधिकारी को निर्देश दिया है. इससे जिले में टोकरी, गैबियन, झाडू व अन्य कुटीर उद्योग को विकसित किया जा सकेगा.
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