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Gaya News: स्वास्थ्य सेवाएं आसानी से पहुंचाने में क्यों बढ़ी परेशानी, जानें किस तरह की आ रही चुनौतियां

Gaya News: आईआईएम बोधगया अस्पताल एवं स्वास्थ्य देखभाल प्रबंधन कार्यक्रम की ओर से बिहार में किफायती स्वास्थ्य देखभाल तक समान पहुंचाने को बढ़ावा देने के लिए कार्यशाला का आयोजन किया गया. कार्यशाला में स्वास्थ्य सेवा तक पहुंचने से संबंधित चुनौतियों पर चर्चा की गयी.

Gaya News: बिहार में ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को बढ़ावा देना जरूरी है. लेकिन, इसकी चुनौतियां भी हैं. इन चुनौतियों में आधारभूत संरचनाओं का अभाव, आपातकालीन सेवा, ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सकों का नहीं रूकना, सेवाओं की पहुंच में देरी, रात्रिकालीन आपात सेवा प्रबंधन में समस्या आदि शामिल हैं, इसे दूर करना बहुत ही आवश्यक है. इन चुनौतियों पर चर्चा करने के लिए आईआईएम बोधगया अस्पताल एवं स्वास्थ्य देखभाल प्रबंधन कार्यक्रम की ओर से बिहार में किफायती स्वास्थ्य देखभाल तक समान पहुंच को बढ़ावा देने के लिए हितधारक परामर्श विषय पर परिचर्चा सह कार्यशाला का आयोजन किया गया.

स्वास्थ्य की सेवा वितरण की गारंटी देने की जरूरत

कार्यशाला के दौरान वक्ताओं ने स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच से संबंधित चुनौतियों की पहचान, वंचित और ग्रामीण समुदायों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार लाने के उद्देश्य में पहल का सुझाव, शहरी तथा ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए रणनीतियों की सिफारिश करने की जरूरत है. स्वास्थ्य सेवा में डिजिटल स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियों को शामिल करने की नीति विकसित के साथ स्वास्थ्य की सेवा वितरण की गारंटी देने की जरूरत है.

ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा की पहुंच में चुनौतियां

डीपीएम नीलेश कुमार ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में आधारभूत संरचनाओं को अधिक मजबूत करने की दिशा में काम किया जा रहा है, इसके लिए हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के परिकल्पना को साकार किया जा रहा हैं. डॉ एएन राय ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में स्थित स्वास्थ्य केंद्रों में रात में चिकित्सक नहीं रह पाते है. यह एक बड़ी चुनौती है. एएनएमएमसीएच के प्राचार्य डॉ विनोद सिंह ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण सेवाओं की कमी के साथ मानव बल की कमी एक चुनौती है. डॉ एमइ हक ने कहा कि चिकित्सकों का बेहतर और नियमित ट्रेनिंग जरूरी है.

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डिजिटल स्वास्थ्य में चुनौतियां

हालांकि वर्तमान समय में डिजिटल स्वास्थ्य में चुनौतियां हैं. लेकिन, इसके लिए ट्रेनिंग मुहैया करायी जा रही है. भाव्या, स्केन एंड शेयर, टेलीमेडिसीन, टेलीकंसल्टेशन का इस्तेमाल बढ़ा हैं. प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक अभय कुमार सिन्हा ने कहा कि चिकित्सकों की कमी चुनौती है. लेकिन, इसी जगह पर सरकार द्वारा ग्रामीण चिकित्सकों को प्रशिक्षण देकर स्वास्थ्य सेवा मुहैया कराने की दिशा में काम किया गया है. लेकिन, यह बहुत अधिक फलीभूत नहीं हो पा रहा है. डॉ संजय अंबष्टा ने बजट के मुद्दों पर चर्चा की. डॉ विजय लक्ष्मी ने मोबाइल हेल्थ यूनिट की जरूरत पर प्रकाश डाला.

कार्यक्रम में ये रहे मौजूद

आईआईएम व महिला सामूहिक मंच के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित इस परिचर्चा के दौरान पैनेलिस्ट के तौर पर मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल प्राचार्य डॉ विनोद सिंह, डॉ एनएन राय, डीपीएम स्वास्थ्य नीलेश कुमार, जिला अनुश्रवण एवं मूल्यांकन पदाधिकारी जयशंकर, गैर संचारी पदाधिकारी डॉ एमइ हक, संचारी रोग पदाधिकारी डॉ पंकज सिंह, आईआईएम डायरेक्टर प्रो विनिता सहाय, आईआईएम बोधगया के अस्पताल एवं स्वास्थ्य देखभाल प्रबंधन कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रो स्वप्नराग स्वैन, प्रो मेधा श्रीवास्तव व प्रो चारू नैथानी, मोहरा व बोधगया के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, बांकेबाजार व टिकारी सीएचसी के बीएचएम तथा नगर प्रखंड के बीसीएम आदि मौजूद थे.

Radheshyam Kushwaha
Radheshyam Kushwaha
पत्रकारिता की क्षेत्र में 13 साल का अनुभव है. इस सफर की शुरुआत राज एक्सप्रेस न्यूज पेपर भोपाल से की. यहां से आगे बढ़ते हुए समय जगत, राजस्थान पत्रिका, हिंदुस्तान न्यूज पेपर के बाद वर्तमान में प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में धर्म अध्यात्म एवं राशिफल डेस्क पर कार्यरत हैं. ज्योतिष शास्त्र, व्रत त्योहार, राशिफल के आलावा राजनीति, अपराध और पॉजिटिव खबरों को लिखने में रुचि हैं.

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