Gaya Ji News: मगध मेडिकल में दलालों का सिंडिकेट, सुरक्षा कड़ी, फिर भी हर दिन फंस रहे 5-10 मरीज

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मगध मेडिकल अस्पताल

Gaya Ji News: मगध मेडिकल अस्पताल की इमरजेंसी में दलालों का नेक्सस प्रशासन की सख्ती पर भारी पड़ रहा है. यहां बाहरी लोगों और एंबुलेंस चालकों की इंट्री बैन है फिर भी जांच के बहाने मरीजों का ब्रेनवॉश किया जा रहा है. जिसका नतीजा है कि निजी अस्पतालों और झोलाछाप डॉक्टरों के जरिए मरीजों का इलाज किया जा रहा है. इस गंभीर मसले पर ठोस कार्रवाई करने के बजाय अस्पताल प्रशासन अपनी जिम्मेदारी से भाग रहा है.

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Gaya Ji News: (जितेन्द्र मिश्रा की रिपोर्ट) मगध मेडिकल अस्पताल की इमरजेंसी में दलालों का नेक्सस प्रशासन की सख्ती पर भारी पड़ रहा है. मेन गेट पर बिना पास इंट्री बैन होने के बावजूद, यहां से हर दिन पांच से 10 मरीजों को बरगला कर निजी अस्पतालों में पहुंचाया जा रहा है. बाहरी लोगों और एंबुलेंस चालकों के प्रवेश पर रोक के बाद अब यह साफ होने लगा है कि इस गोरखधंधे में अस्पताल के अपने कर्मचारी और यहां काम कर रही प्राइवेट एजेंसियों का स्टाफ ही शामिल है. अस्पताल सूत्रों के मुताबिक, मरीजों के परिजनों को बरगलाने का काम ज्यादातर मेडिकल जांच के दौरान किया जाता है. खासकर सीटी स्कैन जैसी जांचों में लगने वाले समय का फायदा उठाकर कर्मचारी तीमारदारों को डराते हैं और निजी अस्पतालों का रास्ता दिखाते हैं. कड़ी सुरक्षा के दावों के बीच अंदर ही अंदर यह खेल बदस्तूर जारी है, जिसे रोकने में प्रशासन पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है.

30 से 35 प्रतिशत तक तय है कमीशन

निजी अस्पतालों के दलालों के नेटवर्क का दायरा पटना तक फैला हुआ है. सूत्रों के अनुसार, मगध मेडिकल से मरीज लाने पर कमीशन का रेट पहले से तय होता है. मरीजों को बाहर से आलीशान दिखने वाले, लेकिन बुनियादी सुविधाओं से वंचित अस्पतालों में भेज दिया जाता है. इन जगहों पर अक्सर नौसिखिए डॉक्टर इलाज के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति करते हैं, जबकि बोर्ड पर नामी डॉक्टरों के नाम दर्ज होते हैं. इस अमानवीय सौदे में दलालों को मरीज के कुल बिल का 30 से 35 प्रतिशत तक हिस्सा मिलता है. मरीज के भर्ती होने पर एडवांस और छुट्टी के समय पूरा हिसाब चुकता किया जाता है.

क्या कहते हैं अस्पताल उपाधीक्षक

इस गंभीर मसले पर ठोस कार्रवाई करने के बजाय अस्पताल प्रशासन अपनी जिम्मेदारी से भाग रहा है. अस्पताल उपाधीक्षक डॉ प्रवीण कुमार अग्रवाल का कहना है कि मरीजों को निजी अस्पताल में ले जाने से पहले परिजनों को सोच-समझ लेना चाहिए और उनकी समझदारी से ही यह घटना बंद होगी. उन्होंने दावा किया कि मगध मेडिकल में बेहतर डॉक्टर और मुफ्त जांच-दवा उपलब्ध है. डॉ अग्रवाल ने यह भी स्वीकार किया कि जब निजी अस्पतालों में मरीजों का पैसा खत्म हो जाता है, तो उन्हें वापस यहीं भेज दिया जाता है.

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निखिल अनुराग

लेखक के बारे में

By निखिल अनुराग

मूलतः निखिल अनुराग. पेशे से पत्रकार. बुद्ध की धरती पर जन्म. बिहार का सबसे नवीनतम जिला (अरवल) से ताल्लुक. पढ़ाई की शुरूआत गांव से ही. फिर गंगा के तट पटना पहुंचा. ज्ञान की धरती से कुछ तालीम हासिल कर राष्ट्रीय राजधानी की ओर कूच. पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट. नोएडा की धरती पर विद्वतजन से कुछ न कुछ सीखा. करंट अफ़ेयर्स, राजनीति, खेल, अंतरराष्ट्रीय संबंध, गाँव, खेत-किसान पसंदीदा टॉपिक. स्कूल, कॉलेज युनिवर्सिटी में यूथ से गपशप करना एनर्जी का अतिरिक्त स्रोत. साल 2020 में नोएडा से शुरू हुई इस लेखन यात्रा कलम, डेस्कटॉप, लैपटॉप के की-बोर्ड से होते हुए स्मार्ट फोन तक पहुंच गयी. ज्यों-ज्यों उम्र बढ़ रही है, सीखने, पढ़ने, लिखने की भूख भी बढ़ रही है.

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