महंगा होने से रोजेदारों की थाली से गायब हुआ खजूर

Updated at : 04 May 2020 11:05 PM (IST)
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महंगा होने से  रोजेदारों की थाली से  गायब हुआ खजूर

कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाबव के लिए देश सहित दुनिया के अधिकतर में देशों में लागू लॉकडाउन से खजूर की आवक काफी कम हो रही है. आवक कम होने के कारण इस वर्ष रमजान महीने में रोजा रखने वाले रोजेदारों की थाली से खजूर गायब हो गया है.

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गया : कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाबव के लिए देश सहित दुनिया के अधिकतर में देशों में लागू लॉकडाउन से खजूर की आवक काफी कम हो रही है. आवक कम होने के कारण इस वर्ष रमजान महीने में रोजा रखने वाले रोजेदारों की थाली से खजूर गायब हो गया है. जानकारी के अनुसार पाक रमजान में रोजा रखने वाले रोजेदार शाम में रोजा खोलने के समय फलों के अलावा खजूर सहित सूखे मेवे का भी उपयोग करते रहे हैं. लेकिन लॉकडाउन के कारण खजूर की आवक कम होने से इसके दाम में बीते वर्ष की तुलना में करीब 25 प्रतिशत की वृद्धि हो गयी है.

एक तरफ जहां लॉकडाउन में बंदी के कारण धीरे-धीरे आम लोगों की अर्थव्यवस्था प्रभावित होने लगी है. वहीं, खजूर के दाम महंगे होने के कारण रोजेदारों की थाली से इस वर्ष रमजान में खजूर गायब हो गये हैं. कारोबारियों के अनुसार इस वर्ष करीब एक दर्जन अलग-अलग वैरायटी के खजूर बाजार में बेचे जा रहे हैं. इस वर्ष खजूर की क्वालिटी के अनुसार अलग-अलग रेट में बाजार में उपलब्ध है.

कारोबारियों के अनुसार इस वर्ष 70 से 140 रुपये प्रति आधा किलो का पैकेट बाजार में बिक रहा है. इन देशों से आता है खजूरखजूर सहित सूखे मेवे के कारोबारियों ने पूछने पर बताया कि भारत में अरब देशों से खजूर बेचने के लिए लाया जाता है. पूरी दुनिया में लागू लॉकडाउन के कारण खजूर का आना लगभग पूरी तरह से बंद हो गया है. इसके कारण खजूर के दाम में करीब 25 प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान कारोबारियों द्वारा लगाया गया है.

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Pritish Sahay

लेखक के बारे में

By Pritish Sahay

12 वर्षों से टीवी पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सेवाएं दे रहा हूं. रांची विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग से पढ़ाई की है. राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय विषयों के साथ-साथ विज्ञान और ब्रह्मांड विषयों पर रुचि है. बीते छह वर्षों से प्रभात खबर.कॉम के लिए काम कर रहा हूं. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में काम करने के बाद डिजिटल जर्नलिज्म का अनुभव काफी अच्छा रहा है.

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