गया : राज्य में पूर्ण शराबबंदी के बाद से ही कई ऐसे लोग परेशान हैं, जिन्हें शराब की बड़ी लत है. ये वैसे लोग हैं जिन्हें हर रोज शराब चाहिए. चाहे देसी हो या विदेशी. लेकिन अब मुश्किल है. ऐसे में अब जय प्रकाश नारायण अस्पताल में खोले गये नशा मुक्ति केंद्र उन लोगों के लिए अच्छी उम्मीद है. एक अप्रैल के बाद से अब तक कई लोगों ने यहां संपर्क किया. इनमें से सात लोगों ने यहां कुछ देर इलाज भी कराया, फिर दवा ले कर गये. इसी क्रम में दो व्यक्ति यहां स्थायी तौर पर भरती हुए. कहते हैं कि हर हाल में शराब की आदत छोड़ कर ही यहां से जायेंगे. बातचीत से लग भी रहा है कि शराब की आदत से खुद भी परेशान थे. इलाज करा रहे यह लोग दूसरों से भी यहां आने की अपील कर रहे हैं.
केंद्र में किये गये हैं खास इंतजाम
जेपीएन में बने नशा मुक्ति केंद्र में आने वाले मरीजों के लिए कुछ खास इंतजाम किये गये हैं. इस सेंटर में कुछ भी ऐसी चीजें नहीं रखी गयी हैं जिससे की मरीज खुद को नुकसान पहुंचा सके. जैसे सिलिंग फैन, नंगी तार आदि. यहां भरती होने वाले मरीजों की काउंसिलिंग की जाती है. इसके बाद यह तय किया जाता है कि उसे किस स्तर के इलाज की जरूरत है. इसके बाद उसे दी जाने वाली दवाएं तय होती हैं. वैसे लोग जिन्हें शराब की कम लत है, उन्हें दवा देकर भेज दिया जाता है. साथ ही हर कुछ दिनों के बाद आकर मिलने की सलाह भी दी जाती है. मरीजों का ध्यान शराब पर नहीं जाये इसके लिए वार्ड में टेलिविजन भी लगाया गया है. इसमें योगा से जुड़े चैनल पर आने प्रोगाम प्रसारित किये जाते हैं. इसके साथ ही शराब से होने वाले नुकसान से जुड़े विज्ञापन भी दिखाये जाते हैं.
इलाज के लिए पहुंची एक महिला भी : बुधवार को नशा मुक्ति केंद्र में इलाज के लिए एक महिला भी पहुंची. वार्ड 22 के पार्षद लालजी प्रसाद अपने मुहल्ले के इन लोगों को लेकर पहुंचे. इनमें तेतर मांझी, फगुनी मांझी, मल्लु मांझी, जामुन मांझी और एक महिला कैली देवी भी थी. पार्षद ने बताया कि उनके वार्ड में कई ऐसे लोग हैं, जिन्हें शराब पीने की लत है. वह स्वयं घूम-घूम कर इन लोगों को नशा मुक्ति केंद्र के बारे में बता रहे हैं. इन लोगों को वह लेकर अस्पताल गये. अस्पताल अधिकारियों ने बताया कि सभी को दवा दे दी गयी है, उनकी स्थिति भरती करने लायक नहीं है. दवा का नियमित सेवन उन्हें शराब से छुटकारा दिला देगा.
बेहतर इलाज की कोशिश
बेहतर व्यवस्था के साथ मरीजों के इलाज की कोशिश हो रही है. यहां के सभी लोगों की कोशिश है कि आने वाले शराब के आदी लोग अपनी आदत छोड़ कर जायें.
मनीष कुमार, डीपीएम , जिला स्वास्थ्य समिति
शराब ने नहीं होने दी शादी
संजय कुमार शहर के गोदावरी इलाके के रहने वाले हैं. उम्र 30 वर्ष है. घर में मां – बाप हैं . दो भाई हैं. संजय भी अपने भाइयाें के साथ काम में हाथ बंटाते थे. 2001 में कुछ दोस्तों के साथ देसी शराब पीनी शुरू की. 2008 तक वह शराब के आदी हो गये. आदत ऐसी हो गयी कि हर रोज शराब चाहिए. घर में भी इसे लेकर अशांति शुरू हो गयी. लेकिन अब तो यह आदत हो गयी थी. चाहे जैसे हो , बस शराब चाहिए .
संजय खुद बताते हैं कि शराब की वजह से उनके घर में अशांति होती रही. दोनों भाईयाें की शादी हो गयी, लेकिन शराब की लत ने संजय की शादी नहीं होने दी. परिवार वाले भी डरते हैं कि शराबी लड़के की शादी आखिर किससे कर दें. इसी बीच राज्य में शराबबंदी हो गयी. शराब नहीं मिल रही थी. एक अप्रैल को वह कुछ सामान खरीदने बाजार गये. चौक के पास उनकी तबीयत खराब हो गयी. हाथ पैर में एंठन और थरथराहट होने लगी. लोगों ने जेपीएन में भरती करा दिया. परिवार वालों को सूचना दी. थोड़ा ठीक होने के बाद संजय ने खुद नशा मुक्ति केंद्र में रहने की इच्छा जाहिर की. कहते हैं कि अच्छा लग रहा है, इस बुरी आदत को छोड़ कर ही घर जाउंगा.
अब नहीं होगा घर में कोई झगड़ा
पेशे से ड्राइवर नागदेव पासवान खरखुरा के रहने वाले हैं. उम्र 54 साल है. जब युवा थे तब से ही देसी शराब पीने की लत लग गयी है. खुद बताते हैं कि लगभग 25 सालों से शराब पी रहे हैं. एक संपन्न और सभ्रांत परिवार है. घर में पत्नी है. तीन बच्चे भी हैं. बेटा एम कॉलेज में लाॅ की पढ़ाई कर रहा है. एक बेटी गया में ही एक बैंक में क्लर्क की नौकरी करती है. एक और बेटी है , दिल्ली में फैशन डिजाइनिंग की पढ़ाइ करती है. परिवार में सब कुछ अच्छा ही चलता आ रहा है,लेकिन शराब की आदत की वजह से हर रोज घर में अशांति होती रही. वह कहते हैं कि होली के बाद से लगातार शराब का सेवन कर रहे थे. कुछ ज्यादा भी हो रहा था. तबीयत भी बिगड़ने लगी. कहते हैं कि कमजोरी , थरथराहट सी महसूस होने लगी. इसी बीच शराब भी बंद हो गयी, तो परेशानी और भी बढ़ गयी . कंट्रोल नहीं हो रहा था. नशा मुक्ति केंद्र की जानकारी अखबारों में मिली. नागदेव यहां चार अप्रैल को आ गये. कहते हैं कि अभी थोड़ी कमजोरी तो है घबराहट भी है. लेकिन अच्छा लग रहा है, पूरी तरह आदत को छोड़ने के बाद ही यहां से जायेंगे.