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बोधगया : बालू के ठेकेदारों ने फल्गु नदी में बना डाला ''मौत का कुआं''

Updated at : 04 Jul 2019 9:16 AM (IST)
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बोधगया : बालू के ठेकेदारों ने फल्गु नदी में बना डाला ''मौत का कुआं''

कलेंद्र प्रताप, बोधगया : इस बरसात में खिरियावां व परेवा गांव के बीच फल्गु नदी पार करना मौत के मुंह में जाने के समान होगा. बालू के ठेकेदार फल्गु नदी में बालू का उठाव करते-करते इतना मदहोश हो गये कि उन्हें पता ही नहीं चल सका कि नदी में कितनी गहराई तक उन्होंने बालू का […]

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कलेंद्र प्रताप, बोधगया : इस बरसात में खिरियावां व परेवा गांव के बीच फल्गु नदी पार करना मौत के मुंह में जाने के समान होगा. बालू के ठेकेदार फल्गु नदी में बालू का उठाव करते-करते इतना मदहोश हो गये कि उन्हें पता ही नहीं चल सका कि नदी में कितनी गहराई तक उन्होंने बालू का उठाव कर लिया. बालू का उठाव करने की फिराक में नदी में कई स्थानों पर काफी बड़े क्षेत्र में पांच से 10 फुट तक के गड्डे बना दिये गये हैं.

अब बरसात का पानी नदी में आने के बाद इन गड्डों में बालू तो कमोबेश भर जायेगा, पर वह जानलेवा होगा. इस क्षेत्र में प्रवेश करते ही लोग बालू के अंदर समा जायेंगे व उन्हें बाहर निकलने का कोई विकल्प नहीं मिल पायेगा. क्योंकि, गड्डे वाले क्षेत्र में बालू की परत काफी दलदल के समान होगी. इनमें प्रवेश करते ही लोग अंदर की तरफ धंस जायेंगे व पानी में डूब जायेंगे. ज्यादा गहराई होने के कारण लोग बाहर भी नहीं निकल पायेंगे और दम तोड़ देंगे.
बरसात के दिनों में कम पानी रहने पर इस रास्ते से आवाजाही करते हैं 25 से ज्यादा गांवों के लोग
काफी गहराई तक बालू का उठाव करने से बढ़ी परेशानी बालू में फंस कर मौत होने की बढ़ी आशंका
लोगों ने प्रशासन से गड्ढों को भरवाने की लगायी गुहार
लोगों ने जतायी चिंता और नाराजगी
फल्गु नदी में खिरियावां-सूर्यपुरा व परेवा और मनकोसी के बीच ठंड, गर्मी व बरसात के दिनों में हर दिन और हर वक्त लोगों की आवाजाही लगी रहती है. नदी के पूर्वी क्षेत्र के गांव परेवा, लारपुर, मनकोसी सहित कन्हौल व गांफाखुर्द पंचायत के गांवों के लोगों का भी इस रास्ते से आना-जाना होता है.
साथ ही, सूर्यपुरा-खिरियावां गांव के पास हर शुक्रवार को लगनेवाले साप्ताहिक बाजार में फतेहपुर व टनकुप्पा प्रखंड क्षेत्र के भी हजारों लोगों का आना-जाना होता है. नदी में कमर व उससे ज्यादा पानी होने के बाद भी लोग नदी पार कर जाते हैं. वर्षों से पूर्वी क्षेत्र के लोगों का यह आम रास्ता बना हुआ है. इस रास्ते से महिलाएं व बच्चे भी आवाजाही करते हैं.
लेकिन, इस वर्ष इस रास्ते से गुजरना मौत के मुंह में जाने के समान होगा. इस खतरे को देखते हुए नदी पार कर अपने गांव तक पहुंचने वाले लोगों ने आपत्ति के साथ ही चिंता भी जतायी है कि इस बार की बरसात में वे नदी पार कर आवाजाही कैसे कर पायेंगे. इस रास्ते से हर दिन सैकड़ों मजदूर भी गया व बोधगया पहुंच कर कामकाज किया करते हैं. लोगों ने प्रशासन से गुहार लगायी है कि बालू के ठेकेदार से सभी गड्डों को अविलंब भराया जाये.
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