अंजना हत्याकांड : मृतका की मां ने अदालत से कहा, मेरी बच्ची की हत्या भी कर दी गयी और अब पुलिस हमसे ही मांग रही सबूत
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 19 Jan 2019 11:06 AM
गया : हुजूर मेरी बच्ची की हत्या हुई, मेरे पति को हत्यारा बता कर जेल में बंद कर दिया गया और अब पुलिस हमें ही मोहरा बना कर सबूत जुटाना चाह रही है. ये बातें अंजना हत्याकांड के बाद परिजनों कोनार्को व पॉलिग्राफिक टेस्ट के लिए दिये गये नोटिस का जवाब देने पहुंची अंजना की […]
गया : हुजूर मेरी बच्ची की हत्या हुई, मेरे पति को हत्यारा बता कर जेल में बंद कर दिया गया और अब पुलिस हमें ही मोहरा बना कर सबूत जुटाना चाह रही है. ये बातें अंजना हत्याकांड के बाद परिजनों कोनार्को व पॉलिग्राफिक टेस्ट के लिए दिये गये नोटिस का जवाब देने पहुंची अंजना की मां आशा देवी ने जज के सामने कहीं. इस मामले में अंजना की बड़ी बहन भारती ने भी नार्को टेस्ट कराने के नाम पर कहाकि बहन की मौत के बाद उसकी मानसि क स्थिति ठीक नहीं है. जेल से लाये गये अंजना के पिता तुराज प्रसाद उर्फ नीना पटवा व इनके दोस्त लीला पटवा ने भी नार्कों टेस्ट कराने से साफ इनकार कर दिया.
कोर्ट से बाहर निकलने के बाद पीड़िता आशा देवी ने पत्रकारों से कहा कि नार्को टेस्ट अपराधियों को पकड़कर पुलिस कराये. जबरदस्ती उसके ही परिवार को हत्यारा साबित करने के लिए हर तरह से लगी है.शुरू के दिन से ही पुलिस के रवैये से यह साबित हो गयी है कि पुलिसिया जांच में उसे न्याय नहीं मिलनेवाला है. उन्होंने बताया कि बेटी की मौत के बाद पूरा परिवार टूटा गया है. ऊपर से पुलिस ने उसके पतिको ही हत्यारा बता कर जेल भेज दिया है. बहुत सारे अधिकारी और नेता पटवाटोली आकर सही जांच किये जाने की बात कर रहे हैं. लेकिन, अब तक ऐसा कोई भी काम नहीं किया जा रहा है, जिससे सही हत्यारा पकड़ा जा सके.
जबर्दस्ती नहीं कराया जा सकता टेस्ट
नार्को और पॉलिग्राफिक टेस्ट के मामले में अदालत ने कहा कि अनुच्छे द 20 (तीन) के तहत किसी भी व्यक्ति को अपने ही विरुद्ध साक्ष्य देने के लिए बाध्य नहीं कियाजा सकता है. यह व्यक्ति के मौलिक अधिकार का हनन है. इस आलोक में न्यायालय इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि जब सहमति नहीं है, तो नार्को टेस्ट नहीं कराया जा सकता. न्यायालय ने यह भी कहा किनाबालिग बच्ची होने के कारण और स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मृतका की बहन से सवाल नहीं पूछे जायें. अदालत ने तीन दिन के पुलिस रिमांड को कायम रखा है. गौरतलब है कि शुक्रवार तक पुलिसतुराज प्रसाद उर्फ नीना पटवा और लीला पटवा को रिमांड पर नहीं ले सकी. बचाव पक्ष के अधिवक्ता परवेज अख्तर ने सुप्रीम कोर्ट के एकफैसले के हवाले (सेल्वि या बनाम कर्नाट क सरकार) से कहा किअपने ही विरुद्ध साक्ष्य के लिए किसी को बाध्य नहीं किया जा सकता है. सहायक अभियोजन पदाधिकारी बलवंत कुमार ने आशा देवी से सवाल किया कि नार्को टेस्ट कराने में क्या परेशानी है. इसके जवाब मेंआशा देवी ने कहा कि मेरी बच्ची मरी और हमें ही आरोपित साबित किया जा रहा है. इसके बाद आशा देवी व उसकी बेटी दोनों चीत्कार मार कर रोने लगी.
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