बच्चों के मन की बात के प्रति सजग हों अभिभावक
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :17 May 2018 5:42 AM (IST)
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गया : प्रभात खबर के बचपन बचाओ अभियान के तहत बुधवार को शहर में आनंदी माई मंदिर के पास स्थित वत्सला परिवार के परिसर में परिचर्या का आयोजन किया गया. इस मौके पर कई कक्षाओं के विद्यार्थियों के साथ-साथ अभिभावकों व शिक्षकों से गया कॉलेज के शिक्षा विभाग के अध्यक्ष डॉ धनंजय धीरज व अन्य […]
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गया : प्रभात खबर के बचपन बचाओ अभियान के तहत बुधवार को शहर में आनंदी माई मंदिर के पास स्थित वत्सला परिवार के परिसर में परिचर्या का आयोजन किया गया. इस मौके पर कई कक्षाओं के विद्यार्थियों के साथ-साथ अभिभावकों व शिक्षकों से गया कॉलेज के शिक्षा विभाग के अध्यक्ष डॉ धनंजय धीरज व अन्य एक्सपर्ट्स ने बातचीत की.
अपने बचपन व कैरियर से संबंधित बच्चों द्वारा पूछे गये सवालों से अभिभावक भी अचंभित थे. उन्हें विश्वास नहीं हो पा रहा था कि उनके बच्चों के मन में ऐसे भी सवाल छिपे थे. बच्चों ने खुल कर अपनी बातें रखीं. साथ ही इस मौके पर वत्सला परिवार के संस्थापक प्रणय कुमार सिन्हा व संस्थापिका रेशमा प्रसाद ने भी संबोधित किया और जीवन दर्शन से संबंधित बातें रखीं.
वहीं, वत्सला परिवार की मुख्य संयोजिका सत्यावती कुमारी गुप्ता ने कहा कि वत्सला परिवार नियमित रूप से ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन करता रहता है. इस मौके पर शालिनी शांडिल्य व मनीष चखैय्यार सहित अन्य लोग मौजूद थे.
शैलेंद्र का सवाल: कहा गया है कि सब्र करें. क्या सब्र करने से ही सफलता मिल जायेगी.
समय सबके लिए बराबर है. रही बात सब्र करने की, तो सब्र से पहले जो आपको करना है, उसपर अपनी एकाग्रता बनाइए. पहले संघर्ष करना है और आपके वश में कर्म करना मात्र ही है. परिणाम व फल अपने वश में नहीं है. सब्र करने का संदर्भ संघर्षरत रहते हुए सब्र करना है. अर्थात संघर्ष को जारी रखना है. संघर्ष को रोक कर फल के लिए सब्र करना, आपके लक्ष्य की प्राप्ति में बाधक हो सकता है. कर्म करते रहिए और सब्र का फल मीठा होता है.
अदिति का सवाल : स्लम एरिया के बच्चों को हम कैसे समाज की मुख्यधारा से जोड़ सकते हैं.
मलाला यूसूफजेई ने इस संदर्भ में पूरे विश्व के लिए एक आदर्श व एक इतिहास रचा है. उनको प्रेरणाश्रोत मान कर यदि आप में से हर व्यक्ति इस क्षेत्र में जन जागरूकता लाये, और जीवन के कुछ बहुमूल्य क्षण ऐसे बच्चों के साथ बिताये और उन्हें जीवन की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए अभिप्रेरित करे तो देश की सूरत बदल सकती है और प्रतिभाओं को सही राह मिल सकती है.
सुधांशु गौरव का सवाल : लक्ष्य निर्धारण को लेकर बच्चों और अभिभावकों के बीच मतभेद को कैसे दूर किया जाये.
प्राय: ऐसा देखा गया है कि बच्चे व उनके अभिभावकों के बीच सीधा संपर्क नहीं होने या झिझक के कारण संवादहीनता की स्थिति बन जाती है. इसी कारण ऐसा होता है. बच्चों को आत्मविश्वास के साथ अपनी बात अभिभावक के साथ रखनी चाहिए और अभिभावक को अपने बच्चों के अंदर छिपी हुई प्रतिभा को पहचान कर आगे की रणनीति बनानी चाहिए.
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