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बिहार में शुरू हो रहा शिव सर्किट प्रोजेक्ट, कोटेश्वरनाथ के लिए 3.19 करोड़ मंजूर

Updated at : 14 Feb 2018 8:55 PM (IST)
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बिहार में शुरू हो रहा शिव सर्किट प्रोजेक्ट, कोटेश्वरनाथ के लिए 3.19 करोड़ मंजूर

गया : बिहार में भगवान शिव के कई पुरातन मंदिर हैं. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की रिपोर्ट में इसका उल्लेख है. यहां पांचवीं और छठी शताब्दी के भी शिवलिंग मौजूद हैं. राज्य सरकार ने इन शिव मंदिरों को पर्यटन की दृष्टि से एक साथ जोड़ने का निर्णय लिया है और इसके लिए शिव सर्किट प्रोजेक्ट […]

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गया : बिहार में भगवान शिव के कई पुरातन मंदिर हैं. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की रिपोर्ट में इसका उल्लेख है. यहां पांचवीं और छठी शताब्दी के भी शिवलिंग मौजूद हैं. राज्य सरकार ने इन शिव मंदिरों को पर्यटन की दृष्टि से एक साथ जोड़ने का निर्णय लिया है और इसके लिए शिव सर्किट प्रोजेक्ट की तैयारी चल रही है. बुधवार को महाशिवरात्रि के मौके पर गया के बेलागंज प्रखंड के मेन गांव स्थित बाबा कोटेश्वरनाथ धाम महोत्सव में पहुंचे उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी व पर्यटन मंत्री प्रमोद कुमार ने शिव सर्किट योजना की जानकारी दी.

पर्यटन मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पर्यटन रोड मैप तैयार कर रही है. बाबा कोटेश्वर नाथ का यह मंदिर छठी शताब्दी का अमूल्य धरोहर है. शिव सर्किट प्रोजेक्ट में यह मंदिर महत्वपूर्ण होगा. इससे पहले लोकायुक्त श्याम किशोर शर्मा ने अतिथियों को कोटेश्वरनाथ धाम की महत्ता के बारे में बताया. वहीं, कार्यक्रम में मौजूद हाइकोर्ट पटना के न्यायमूर्ति राजीव रंजन ने कहा कि उनका सौभाग्य है कि वह यहां आये हैं.

मंदिर का होगा जीर्णोद्धार, ऐतिहासिक वृक्षों का संरक्षण भी
उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि राज्य सरकार ने कोटेश्वरनाथ के विकास के लिए तीन करोड़ 19 लाख रुपये की योजना स्वीकृत की है. इन पैसों से यहां प्रवेशद्वार, विवाह मंडप, हवन मंडप, पार्किंग, सोलर लाइट सिस्टम, मंदिर का जीर्णोद्धार, मंदिर के पास ऐतिहासिक वृक्षों के संरक्षण के लिए चहारदीवारी समेत कई अन्य काम होने हैं. उन्होंने कहा कि हालांकि इस योजना को शुरू करने में थोड़ी अड़चन भी है. यहां सरकार को जमीन की जरूरत है, जिसके लिए गांव के लोगों को भी पहल करनी होगी. जमीन के बदले सरकारी पैसे भी देगी.

जैविक ग्राम बनेगा मेन गांव
मेन गांव और कोटेश्वरनाथ के विकास के लिए लगातार हो रही घोषणाओं में डाॅ प्रेम कुमार ने भी एक कड़ी जोड़ दी. उन्होंने कहा कि बतौर कृषि मंत्री उन्होंने राज्य में जैविक खेती को बढ़ावा देने का लक्ष्य बनाया है. इसके लिए हर जिले से एक गांव का चयन किया गया है. गया में मेन गांव को इस योजना के तहत चुना गया है. एक महीने के भीतर इस गांव के लोगों को मशरूम उत्पादन, मधुमक्खी पालन व अन्य चीजों का प्रशिक्षण दिया जायेगा. वहीं, शिक्षा मंत्री कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा ने कहा कि शिक्षा से जुड़ी जो भी योजनाएं बनेंगी, उसका लाभ यहां के लोगों को भी दिया जायेगा.

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