बोधगया बम प्लांट मामला : आईएम ने ही जेयूएम के आतंकियों से रखवाये थे बम
Updated at : 06 Feb 2018 7:29 AM (IST)
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पटना : बोधगया में महाबोधि मंदिर के आसपास आईईडी बम रखने के मामले का खुलासा तकरीबन हो चुका है. एनआईए को जांच में अहम जानकारियों मिली हैं. पता चला कि इन बमों को मंदिर में प्लांट करने की योजना थी, पर सुरक्षा चाक-चौबंद होने से यह संभव नहीं हो सका. हालांकि, अभी इसका आधिकारिक स्तर […]
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पटना : बोधगया में महाबोधि मंदिर के आसपास आईईडी बम रखने के मामले का खुलासा तकरीबन हो चुका है. एनआईए को जांच में अहम जानकारियों मिली हैं. पता चला कि इन बमों को मंदिर में प्लांट करने की योजना थी, पर सुरक्षा चाक-चौबंद होने से यह संभव नहीं हो सका. हालांकि, अभी इसका आधिकारिक स्तर पर खुलासा नहीं किया गया है. लेकिन सूत्रों के अनुसार बम से भरे दोनों बैगों को इंडियन मुजाहिद्दीन (आईएम) ने ही मंदिर के पास रखवाये थे.
उसने इस बार इस साजिश को अंजाम देने के लिए अपने सहयोगी आतंकी संगठन जमात-उल-मुजाहिद्दीन (जेयूएम) को माध्यम बनाया है. जेयूएम का मुख्यालय बांग्लादेश में है और इसका ऑपरेशन एरिया भी मुख्य रूप से वहीं है. इस संगठन को आईएम ने ही खड़ा किया है और आर्थिक रूप से आईएम ही इसे मदद देता है. इसमें बड़ी संख्या में रोहिंग्या मुस्लिम युवाओं के भी शामिल होने की बात सामने आ रही है.
इस संगठन का ऑपरेशन एरिया बांग्लादेश के अलावा भारत में पश्चिम बंगाल समेत अन्य सीमावर्ती इलाका है. इससे संबंधित फाइनल रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को जल्द ही सौंपे जाने की संभावना है. जांच रिपोर्ट में इस बात का भी खुलासा हुआ है कि जेयूएम के नवप्रशिक्षित आतंकियों ने इस साजिश को अंजाम दिया है. यह माना जा रहा है कि इन लोगों ने बौद्ध वेशभूषा धारण करके इन बैगों को चुनिंदा स्थानों पर रखा था. बौद्ध वेशभूषा में होने के कारण इन्हें पहचान पाना बेहद मुश्किल हुआ. लेकिन सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद होने के कारण वे बैगों को मंदिर के अंदर नहीं ले जा सके. इसी वजह से इन बैगों को रखने के लिए उन स्थानों को चुना गया, जो परिसर के सबसे नजदीक थे और जहां से बड़ा नुकसान हो सकता था.
वे बहुत सावधानी से इस घटना को अंजाम देने के फिराक में थे, लेकिन दुरुस्त सुरक्षा व्यवस्था के कारण यह संभव नहीं हो सका. इस बात की तरफ भी इशारा जा रहा है कि इसके लिए आतंकी संगठनों ने अपने किसी स्लीपर सेल का इस्तेमाल किया है. इसके अलावा जेयूएम के तार पश्चिम बंगाल से भी जुड़े हुए हैं.
वहां भी कुछ लोगों को इस साजिश की आशंका में गिरफ्तार किया गया है. फिलहाल एनआईए की टीम उन सभी संदिग्धों से पूछताछ कर रही है. पश्चिम बंगाल के मालदा, 24 परगाना जैसे कुछ जिलों में जेयूएम की सक्रियता काफी देखी जा रही है. जांच में इन जिलों में इसके एजेंट या कुछ स्लीपर सेल के छिपे होने की सूचना मिली है, जिनकी तलाश चल रही है.
बिहार में भी कुछ संदिग्ध जिलों में इनकी तलाश जारी है.एनआईए ने दर्ज किया मामला: बोधगया मंदिर परिसर में बम रखे जाने के मामले में एनआईए ने सोमवार को मामला दर्ज किया. यह मामला पटना एनआईए के विशेष जज मनोज कुमार सिन्हा की अदालत में अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज किया गया है.
एनआईए की जांच में खुलासा, सबूत व केस को किया टेकओवर
बोधगया (गया) : 19 जनवरी को बोधगया में तीन स्थानों पर बम प्लांट किये जाने के मामले की जांच में जुटी एनआईए की टीम बोधगया पहुंच चुकी है. रविवार की देर रात ही एनआईए की टीम बोधगया पहुंच कर तफ्तीश शुरू कर दी.
आठ सदस्यीय टीम ने उन स्थानों का जायजा लिया, जहां पर आतंकियों ने बमों को प्लांट किया था. इसके बाद बोधगया थाने में रखे कुछ सबूतों और इस मामले में दर्ज एफआईआर को टेकओवर किया. टीम में डीएसपी व इंस्पेक्टर स्तर के पदाधिकारी शामिल हैं.
वे सोमवार की शाम तक बोधगया थाने से केस और सबूतों को टेकओवर करने की प्रक्रिया में लगे रहे. उल्लेखनीय है कि बोधगया थानाध्यक्ष शिव कुमार महतो के बयान पर बोधगया थाने में मामला दर्ज किया गया था और इसके अनुसंधानकर्ता बोधगया एसडीपीओ रविशंकर प्रसाद को बनाया गया था. अब इस मामले को एनआईए के हवाले किया जा रहा है.
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