सुबह खुलनेवाली बसों में गिने-चुने ही होते हैं यात्री

Published at :06 Jan 2018 5:52 AM (IST)
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सुबह खुलनेवाली बसों में गिने-चुने ही होते हैं यात्री

निजी बस स्टैंड में अलाव की भी नहीं है व्यवस्था शाम ढलते ही बस पड़ावों में छा जाती है वीरानगी हाथों में टिकट लेकर यात्री खोज रहे एजेंट गया : पिछले एक सप्ताह से जिले में पड़ रही कड़कड़ाती ठंड के कारण सरकारी व निजी बस स्टैंडों से खुलने वाली बसों में पैसेंजरों की कमी […]

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निजी बस स्टैंड में अलाव की भी नहीं है व्यवस्था

शाम ढलते ही बस पड़ावों में छा जाती है वीरानगी
हाथों में टिकट लेकर यात्री खोज रहे एजेंट
गया : पिछले एक सप्ताह से जिले में पड़ रही कड़कड़ाती ठंड के कारण सरकारी व निजी बस स्टैंडों से खुलने वाली बसों में पैसेंजरों की कमी देखी जा रही है. हालांकि रांची, टाटा व दूसरे दूरी वाले जिलों के लिए जो बस खुल रही है, वह बसें करीब-करीब फुल जा रही हैं. इन दोनों बस स्टैंडों में ठंड के कारण शाम छह बजे के बाद सन्नाटा हो जाता है. शुक्रवार को प्रभात खबर की टीम ने जब बिहार राज्य पथ परिवहन निगम के अधीन गांधी मैदान स्थित सरकारी बस स्टैंड और प्राइवेट बस स्टैंड सिकड़िया मोड़ का जायजा लिया तो दोनों जगह पैसेंजर कम ही दिखे, जो गाड़ियां निकल रही थी, उसमें पैसेंजर कम दिखे.
दो बसे खड़ी थी, कम दिखे पैसेंजर
गांधी मैदान स्थित सरकारी बस स्टैंड. सुबह के ग्यारह बजे. गया-टिकारी जाने वाली दो बसें खड़ी दिखाई दी. एक बस में कुल मिला कर चार पैसेंजर दिखे. इस बस के कंडक्टर अरुण शर्मा व दूसरे बस के कंडक्टर पंकज हाथों में टिकट का बंडल लिये गया टिकारी कहते नजर अाये. पांच से दस मिनट बीत जाने के बाद एक भी पैसेंजर वहां नहीं पहुंचा. बातचीत की तो पता चला कि पिछले एक सप्ताह से प्राय: हर रूट के लिए खुलने वाली बसों का यही हाल है. इन्होंने बताया कि यहां से पहली बस सुबह साढ़े पांच बजे खुलती है. पिछले एक सप्ताह से सुबह दस बजे तक जितनी बस खुल रही है, उसमें पैसेंजर इक्का दुक्का ही सवारी कर रहे हैं. इसी स्टैंड के एक ओर दो और बसें खड़ी दिखाई दी. आमतौर पर इस स्टैंड के बाहर व अंदर पैसेंजरों की भीड़ रहती है, लेकिन आज हालात काफी बदले हुए थे. प्राइवेट बस स्टैंड नगर निगम के जिम्मे हैं. यहां कुछ ऑपरेटरों ने बताया कि नगर निगम की ओर से यहां अलाव की व्यवस्था नहीं की गयी है. बस स्टैंड परिसर में यहां वहां बिखरे पड़े कागज व लकड़ी के द्वारा यहां अलाव की व्यवस्था कर किसी तरह रात गुजारते हैं. वहीं इस मामले में जब नगर निगम प्रशासन का कहना है कि हर सार्वजनिक जगह पर अलाव जलाये जा रहे हैं.
42 सीटों की क्षमता पैसेंजर 10 से 12
सिकड़िया मोड़ स्थित प्राइवेट बस स्टैंड. दोपहर के बारह बजे. स्टैंड के अंदर प्रवेश करते ही सामने तीन से चार गाड़ियां खड़ी दिखायी दी. कुछ में पैसेंजर थे, कुछ में नहीं. थोड़ा आगे बढ़ने पर अलग-अलग दिशाओं में खड़ी दर्जनों गाड़ियां दिखायी दी. मां मंगला ट्रेवल्स के श्रीकांत प्रसाद से मुलाकात हुई. बताया कि ठंड ने कारोबार को ठंडा कर दिया है. सुबह चार बजे यहां से पहली गाड़ी खुलती है, लेकिन उसमें दस पैसेंजर भी नहीं होते. यहां से रोजाना 150 बसे अलग-अलग रूटों के लिए खुलती है. श्रीकांत से बातचीत के बाद एक बस पर नजर पड़ी जो चतरा जाने के लिए तैयार खड़ी थी. 42 सीट वाले इस छोटी बस में महिला, पुरुष व बच्चे मिलाकर बारह लोग चादर ओढ़े बैठे नजर आये. कुछ देरी के बाद यह बस खुल गयी, लेकिन इसमें पैसेंजर की संख्या उतनी ही रही.
जेल में मुलाकातियों की संख्या भी हुई कम
ठंड का असर सेंट्रल जेल में बंदियों से मिलने आने वाले मुलाकातियों पर भी दिख रहा है. जेल प्रबंधन से प्राप्त आंकड़ा इसकी पुष्टि करती है. नवंबर 2017 में 4833 मुलाकाती जेल में बंद अपने लोगों से मिलने पहुंचे थे. वहीं दिसंबर में यह आंकड़ा घटकर 2929 पर पहुंच गया है.
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