अलग-अलग बाेली-भाषा के दिखे लोग, आेटीए में झलकी देश की संस्कृति

गया : अवसर था आेटीए में 12वीं पासिंग आउट परेड में पिपिंग सेराेमनी का. देश के काेने-काेने से कैडेट जाे यहां ट्रेनिंग ले रहे, उनकी पासिंग परेड के बाद पिपिंग सेराेमनी हाे रही थी. उनके कंधे पर अभिभावक वह बैज लगा रहे थे, जाे उन्हें आर्मी में लेफ्टिनेंट अफसर बना रहा था. इस माैके पर […]
गया : अवसर था आेटीए में 12वीं पासिंग आउट परेड में पिपिंग सेराेमनी का. देश के काेने-काेने से कैडेट जाे यहां ट्रेनिंग ले रहे, उनकी पासिंग परेड के बाद पिपिंग सेराेमनी हाे रही थी. उनके कंधे पर अभिभावक वह बैज लगा रहे थे, जाे उन्हें आर्मी में लेफ्टिनेंट अफसर बना रहा था. इस माैके पर ऐसा लग रहा था जैसे देश की संस्कृति आेटीए के ग्राउंड पर उतर आयी हाे. अलग-अलग वेश-भूषा, कद-काठी व बाेली-भाषा से हर काेई उनके प्रांत काे अपने जेहन में उतार सकता था. कश्मीर से कन्याकुमारी तक का नजारा था. बड़ा ही मनभावक दृश्य था. अनेकता में एकता का भारत दिख रहा था. अपने बेटे, भाई, पति के कंधे पर बैज लगाते बड़े भावुक थे.
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