टंकी में नहीं चढ़ रहा पानी, पहाड़ी के नीचे एक चापाकल पर ही निर्भर हैं 1500 लोग
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :19 Nov 2017 5:57 AM (IST)
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मुहल्ले में पांच साल पहले तक ठीक थी पानी की व्यवस्था निगम अधिकारी भी समस्या दूर करने के प्रति गंभीर नहीं गया : जिस हाथ में किताब-कलम होनी चाहिए उन हाथों में सुबह से ही पानी का बाल्टी थाम लेते हैं. फिर भी सुबह से शाम तक महज चार बाल्टी पानी ही घर पहुंच पाता […]
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मुहल्ले में पांच साल पहले तक ठीक थी पानी की व्यवस्था
निगम अधिकारी भी समस्या दूर करने के प्रति गंभीर नहीं
गया : जिस हाथ में किताब-कलम होनी चाहिए उन हाथों में सुबह से ही पानी का बाल्टी थाम लेते हैं. फिर भी सुबह से शाम तक महज चार बाल्टी पानी ही घर पहुंच पाता है. यह स्थिति और कही नहीं नगर निगम के वार्ड नंबर छह के रामशिला मुहल्ले का है. यहां के घरों से बड़े लोग काम पर जाते हैं और बच्चे सुबह से ही बोतल, तसला व अन्य बरतन लेकर पानी के इंतजाम में जुट जाते हैं. शाम तक बच्चे घर की जरूरत पूरी करने के लिए मुश्किल से पानी का इंतजाम कर पाते हैं. लोगों का कहना है कि यहां पांच साल पहले तक पानी की व्यवस्था ठीक थी. रामशिला पहाड़ी पर बने टंकी से पानी पंचायती अखाड़ा, वागेश्वरी, छोटकी नवादा व रामशिला में सप्लाइ दिया जाता था.
पाइप पुराना होने के कारण अन्य जगहों पर वाटर सप्लाइ के लिए दूसरा इंतजाम कर दिया गया. टंकी सिर्फ रामशिला पहाड़ी पर बसे मुहल्ले के लिए रह गया. यहां करीब 200 घरों में 1500 से अधिक की आबादी है. धीरे-धीरे पानी टंकी में डालना बंद कर दिया गया. लोगों ने बताया कि कई बार आंदोलन करने के बाद पानी टंकी में डाला जाता है. अब वह भी नहीं दिया जाता है. पहाड़ी के नीचे लगे मंदिर के पास चापाकल से सुबह से यहां के लोग पानी का इंतजाम करने में लग जाते हैं.
होल्डिंग टैक्स वसूलता है निगम: लोगों ने बताया कि पानी के इंतजाम के लिए कई बार रोड जाम करने के साथ अधिकारियों के पास जा कर भी गुहार लगायी, लेकिन कुछ नहीं हुआ. अधिकारी हमलोगों का मुहल्ला सरकारी जमीन पर होने का हवाला देते हैं, लेकिन यहां के घरों से निगम होल्डिंग टैक्स वसूलता है. साथ ही इस बार निगम द्वारा सभी घरों को यूनिक नंबर प्लेट भी दिया गया है. इसके अलावा यहां ज्यादातर घरों में बिजली का कनेक्शन भी है.
बच्चों का भविष्य अंधकारमय : बच्चे व उनके अभिभावक पानी के इंतजाम में पढ़ाई जैसे शब्द को भूल गये हैं. लोगों का साफ कहना है कि पानी के बिना जिंदा नहीं रहा जा सकता है. इसलिए सबसे पहले इसके इंतजाम में लगते हैं. इससे फुर्सत मिलने पर ही पढ़ाई के बारे में सोचा जा सकता है. हालांकि कुछ बच्चे पानी लाने के बाद भी स्कूल जाते हैं, लेकिन इनकी संख्या बहुत कम ही होती है.
जल्द दी जायेगी वाटर सप्लाई
पानी की किल्लत दूर करने के लिए मुरारपुर पंपिंग केंद्र से भी पाइपलाइन का विस्तार किया जा रहा है. पंचायती अखाड़ा में मोटर हर वक्त जलने के कारण यह परेशानी हो रही है. जल पर्षद के अधिकारियों ने हमें बताया कि दो दिन पहले तक टंकी में पानी गया है. नहीं गया है, तो इसकी जांच की जायेगी. बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का अधिकार किसी को नहीं है. नाजायज-जायज मुहल्ले का फैसला अधिकारियों को करना होता है. आबादीवाली जगह पर लोगों को बुनियादी सुविधा निगम मुहैया करायेगा. यह सच है कि रामशिला में नीचे से पानी लेकर चढ़ना आसान नहीं है. जल्द ही यहां की समस्या दूर कर ली जायेगी.
वीरेंद्र कुमार, मेयर
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