Darbhanga News: सामाजिक न्याय, समानता व मानव मूल्यों की ओर प्रेरित करती हैं प्रेमचंद की रचनाएं

Darbhanga News:प्रेमचंद की जयंती का समापन सह पुरस्कार वितरण समारोह प्रेक्षागृह में रविवार को प्रेमचंद के साहित्य सृजन में सामाजिक व राष्ट्रीय संवेदना विषय पर विमर्श हुआ.
Darbhanga News: दरभंगा. प्रेमचंद जयंती समारोह समिति के तत्वावधान में प्रेमचंद की जयंती का समापन सह पुरस्कार वितरण समारोह प्रेक्षागृह में रविवार को प्रेमचंद के साहित्य सृजन में सामाजिक व राष्ट्रीय संवेदना विषय पर विमर्श हुआ. अध्यक्षता समिति के उपाध्यक्ष डॉ हीरा लाल सहनी तथा संचालन समिति के संयुक्त सचिव मुजाहिद व महाकांत प्रसाद ने किया. इस अवसर पर जन सरोकार स्मारिका के 10वाें अंक का लोकार्पण भी किया गया. अतिथियों का स्वागत समिति की मानसी व नाजनी ने प्रेमचंद समिति के प्रतीक चिह्न के साथ बैज लगाकर किया. वहीं विषय प्रवेश समिति के सचिव डॉ लाल कुमार ने किया. उन्होंने प्रेमचंद के साहित्य सृजन की महत्ता पर विस्तार से चर्चा की. उपाध्यक्ष डॉ श्याम भास्कर ने प्रेमचंद के जीवन और साहित्य पर विचार साझा किया. उपाध्यक्ष डॉ अमरकांत कुमर ने भी प्रेमचंद के साहित्य और उनके योगदान पर अपने विचार रखे. विशिष्ट अतिथि लनामिवि के भू-संपदा पदाधिकारी डॉ कामेश्वर पासवान ने प्रेमचंद के साहित्य और उनके योगदान की महत्ता पर प्रकाश डाला. कहा कि प्रेमचंद की रचनाएं न केवल साहित्यिक उत्कृष्टता का प्रतीक हैं, बल्कि समाज के विभिन्न पहलुओं पर गहरा प्रभाव भी डालती हैं. प्रेमचंद की रचनाएं आज भी प्रासंगिक है और हमें सामाजिक न्याय, समानता और मानवता के मूल्यों की ओर प्रेरित करती हैं. मुख्य अतिथि डॉ भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ नंद किशोर नंदन ने कहा कि प्रेमचंद एक ऐसे साहित्यकार थे, जिन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों के जीवन को प्रभावित किया. उन्होंने प्रेमचंद की लेखन शैली और उनके द्वारा उठाए गए सामाजिक मुद्दों की सराहना की. प्रेमचंद की कहानियों में आम आदमी की जिंदगी, उनकी समस्याओं और संघर्षों का मार्मिक चित्रण है, जो पाठकों को सोचने और आत्ममंथन के लिए प्रेरित करता है. समिति के संरक्षक प्रो. धर्मेन्द्र कुमर ने प्रेमचंद जयंती समारोह समिति के उद्देश्यों और गतिविधियों पर प्रकाश डाला. कहा कि समिति का मुख्य उद्देश्य प्रेमचंद के साहित्य और उनके आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाना है, ताकि उनकी रचनाओं का प्रभाव और भी व्यापक हो सके. डीएवी पब्लिक स्कूल के कक्षा नौ के छात्र ऋषभ तिवारी ने अपनी प्रस्तुति से दुष्यंत कुमार की प्रसिद्ध ग़ज़ल कहां तो तय था चिरागां हर एक घर के लिए को जीवंत बना दिया.रंगग्राम जन सांस्कृतिक मंच भागलपुर द्वारा प्रस्तुत लावारिश नाटक ने समाज के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला. नृत्यार्पण कलाश्रम दरभंगा के छात्र पीयूष आनंद ने कत्थक नृत्य प्रस्तुत किया. इस दौरान गत 24 सितंबर को सांस्कृतिक प्रतियोगिता में 360 सफल छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत किया गया. दूसरी ओर उत्कृष्ट प्रदर्शन एवं सर्वश्रेष्ठ सहभागिता के अवार्ड और प्रमाण पत्र से सम्मानित डीएवी पब्लिक स्कूल दरभंगा को किया गया. कार्यक्रम में डॉ उमेश कुमार शर्मा, डॉ शैलेश कुमार सिंह, डॉ ज्वाला चंद्र चौधरी, डॉ जमील हसन अंसारी, डॉ जयशंकर सिंह, डॉ संजय कुमार सहनी, डॉ अजय कुमार, डॉ अमृता कर्मकार, डॉ संगीता कुमारी, डॉ रौशन कुमार राही आदि ने बातें रखी.
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