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Darbhanga News: हथिया नक्षत्र की बारिश से बेहाल हुई धान की फसल, चक्रवाती तूफान ने रबी पर भी लगा दिया ग्रहण

Updated at : 08 Nov 2025 10:32 PM (IST)
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Darbhanga News: हथिया नक्षत्र की बारिश से बेहाल हुई धान की फसल, चक्रवाती तूफान ने रबी पर भी लगा दिया ग्रहण

Darbhanga News:हथिया नक्षत्र की बारिश किसानों के लिए जहां अमंगल साबित हुई, वहीं चक्रवात के कारण हुई बारिश कोढ़ में खाज का काम कर गया.

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Darbhanga News: कमतौल. हथिया नक्षत्र की बारिश किसानों के लिए जहां अमंगल साबित हुई, वहीं चक्रवात के कारण हुई बारिश कोढ़ में खाज का काम कर गया. किसानों की फसल लगी खेतों में पानी जमा हो गया. किसान हर तरह की जुगत लगाकर खेतों से पानी निकालने व सूखाने के प्रयास में लगे हैं. खेतों से पानी निकलने में जितनी देर होगी, फसल को उतना ही नुकसान होगा. पानी निकालने के बाद ही धान फसल की कटनी संभव हो सकेगी. अब तो जलजमाव की वजह से रबी फसल की खेती पर भी ग्रहण लगता दिख रहा है. इस कारण सबसे अधिक दलहन व तेलहन फसल के साथ गेंहू के नुकसान की आशंका प्रबल हो गयी है. अगात गेहूं की फसल लगाना तो मुमकिन नहीं है. पिछात बोआई वाली फसल में भी नुकसान की आशंका है. सामान्य मौसम के दौरान नवंबर माह से ही गेहूं के अगात प्रभेद की खेती शुरू हो जाती है. इसी तरह 15 अक्तूबर से 20 नवंबर तक दलहनी व पूरे नवंबर माह में तेलहनी फसल लगायी जाती है, लेकिन इस बार बारिश के कारण खेतों में काफी जलजमाव होने से धान के फसल की कटनी मुश्किल हो गयी है. जहां जलजमाव कम है, वहां किसान मिट्टी सूखने का इंतजार कर रहे हैं. साथ ही धान की पकी हुई गिरी फसल को भी किसी तरह काटकर खेतों में ही सूखा रहे हैं. अहियारी के किसान शिवलाल पासवान, जगन्नाथ पासवान, सुधीर ठाकुर, मोहन महतो, राजगीर महतो आदि ने बताया कि खेतों की वर्तमान परिस्थिति को देखकर नवंबर तक भी नई फसल लगने की संभावना बहुत कम ही दिखती है. यही स्थिति रही तो किसानों को दलहनी व तेलहनी फसल लगाने में बहुत ज्यादा देरी होगी. किसानों के लिए इस बार बहुत ही विपरीत परिस्थिति बनी हुई है. किसानों ने बताया कि पानी लगे खेतों में धनकटनी करने के लिए मजदूर नहीं मिल रहे हैं. कई किसान स्वयं परिजनों के साथ जैसे-तैसे खेत खाली करने में जुटे हैं. धान काट रही महिला किसान सरस्वती देवी ने बताया कि शुरू में पानी के लिए खेत तरसते रहे, किसी तरह पटवन कर फसल को बचाये रखे. बाद में इतना पानी हुआ कि फसल बर्बाद होने के कगार पर पहुंच गया. साल भर परिजनों का भरण-पोषण कैसे होगा, इसकी चिंता सता रही है. गेंहू की बोई के लिए न्यूनतम तापमान 20 डिग्री से कम व दहलन की बोआई के लिए 25 डिग्री से कम सही होता है. आमतौर पर गेहूं की फसल दिसंबर माह के मध्य तक लगायी जा सकती है, लेकिन उसका अगात प्रभेद अक्तूबर से नवंबर के मध्य तक लगाया जाता था. इस बार उसकी खेती मुश्किल होगी. गेहूं की बोआई के लिए न्यूनतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस से कम ही ठीक होता है, जबकि दलहनी फसल के लिए यह 25 डिग्री सेल्सियस से कम अच्छा माना जाता है. इसके अलावा बोआई के समय मिट्टी भुरभुरी होनी चाहिए. यह बीजों के अंकुरण के लिए बेहतर होता है. प्रगतिशील किसान धीरेन्द्र कुमार ने बताया कि किसानों को बोआई के पहले बीज उपचार करना चाहिए. बीज का अंकुरण के बाद शिशु पौधे की प्रतिरोधक क्षमता काफी कम होती है. बीज के उपचार से पौधे की कीट-व्याधि से सुरक्षा होती है. 25 से 30 दिनों में पौधों की जड़ विकसित हो जाती है. इससे पौधे स्टेबल हो जाते हैं. इन बातों का ध्यान रखकर बेहतर फसल प्राप्त की जा सकती है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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PRABHAT KUMAR

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