Darbhanga News: क्षेत्र के समुचित विकास के लिए विरासत का संरक्षण जरूरी- कुलपति

Published by : PRABHAT KUMAR Updated At : 03 Nov 2025 9:46 PM

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Darbhanga News:53वें मिथिला विभूति पर्व समारोह का उद्घाटन करते हुए कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. लक्ष्मीनिवास पांडेय ने कहा कि विद्यापति महान साहित्यकार थे.

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Darbhanga News: दरभंगा. 53वें मिथिला विभूति पर्व समारोह का उद्घाटन करते हुए कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. लक्ष्मीनिवास पांडेय ने कहा कि विद्यापति महान साहित्यकार थे. उनके साहित्य को जिंदा रखने का कार्य विद्यापति सेवा संस्थान कर रहा है. साथ ही संस्थान मिथिला-मैथिली को भी जिंदा रखने का काम कर रहा है. कहा कि किसी भी क्षेत्र के समुचित विकास के लिए विरासत का संरक्षण जरूरी है. निवर्तमान मंत्री संजय सरावगी ने कहा कि मिथिला के विकास में सभी मिथिलावासियों का अहम योगदान रहा है. लेकिन, बैद्यनाथ चौधरी बैजू के योगदान की तुलना किसी से नहीं की जा सकती है. देश भर में मिथिला की सांस्कृतिक ललक जगाने में उनका अहम योगदान रहा है. प्रो. दिलीप कुमार चौधरी ने कहा कि विद्यापति मिथिलावासियों को एकसूत्र में बांधने का कार्य कर रहे हैं. उद्घाटन सत्र का संचालन मैथिली अकादमी के पूर्व अध्यक्ष कमला कांत झा ने किया.

भारत की उत्ष्कृटता में भी मिथिला का अहम योगदान

अध्यक्षता करते हुए पूर्व कुलपति सह संस्थान के अध्यक्ष प्रो. शशिनाथ झा ने कहा कि भारत की उत्ष्कृटता में भी मिथिला का अहम योगदान है. मिथिलावासी अपनी भाषा को जिंदा रखे हुए हैं. मिथिला भाषा उड़िया और बंगला को भी अपना योगदान दिया है.

मैथिली भाषा को अभी तक नहीं मिला पूरा अधिकार- डॉ बैजू

इससे पहले अतिथियों का स्वागत करते हुए विद्यापति सेवा संस्थान के महासचिव डॉ बैद्यनाथ चौधरी बैजू ने मिथिला और मैथिली की स्थिति की विस्तार से चर्चा की. कहा यह अत्यंत खेद का विषय है कि मैथिली को भले ही संवैधानिक भाषा का दर्जा मिल गया है, लेकिन वह राजनीतिक उपेक्षा का शिकार होकर अभी भी अपने अधिकार से वंचित है. कार्यक्रम में डॉ महेंद्र नारायण राम एवं प्रवीण कुमार झा के संपादन में प्रकाशित संस्थान की मुख पत्रिका अर्पण का लोकार्पण किया गया.

13 लोगों को मिला मिथिला विभूति सम्मान

आयोजन के दौरान 13 लोगों को मिथिला विभूति सम्मान दिया गया. जानकी जन्मभूमि मंदिर, पुनौरा धाम के पीठाधीश्वर महंत कौशल किशोर दास, जानकी मंदिर जनकपुर के उत्तराधिकारी महंत राम रोशन दास, प्रसिद्ध कथावाचक आचार्य धर्मेंद्र नाथ मिश्र, मखाना वैज्ञानिक डॉ राजेश कुमार विश्वकर्मा, संस्कृत साहित्य के विद्वान प्रो. वशिष्ठ नारायण झा एवं डॉ गोविन्द झा, कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ ब्रजेश पति त्रिपाठी, मुंगेर विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ घनश्याम राय, रिजनल सेकेंडरी स्कूल, मधुबनी के निदेशक डॉ राम श्रृंगार पांडे को सम्मान दिया गया. मिथिला चित्रकला के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए पद्मश्री शांति देवी, प्रो. रमण झा तथा मैथिली प्रकाशन के क्षेत्र में उत्कृष्ट अवदान के लिए मुरलीधर प्रेस को मिथिला विभूति सम्मान दिया गया.

कवि सम्मेलन एवं गीत-संगीत की प्रस्तुति

कवि कोकिल महाकवि विद्यापति एवं आचार्य सुरेंद्र झा सुमन की प्रतिमा पर श्रद्धा सुमन अर्पित करने के साथ शुरू हुए इस आयोजन में कवि सम्मेलन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम देर रात तक जारी रहा. नामचीन कवियों की प्रस्तुतियों के साथ मैथिली मंच के स्थापित कलाकारों की मनोहारी प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र बना रहा.

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