खुले आसमान के नीचे बरबाद हो रहा सामान

Published at :21 Sep 2016 6:34 AM (IST)
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खुले आसमान के नीचे बरबाद हो रहा सामान

रेलवे. बुक सामान की सुरक्षा की चिंता नहीं दरभंगा : दरभंगा जंकशन पर लाखों के सामान यूं ही खुले आसमान के नीचे पड़े रहते हैं. ये वो सामान हैं, जिससे विभाग को प्रतिवर्ष करोड़ों की आय होती है. आश्चर्यजनक पहलू यह है कि इसके प्रति भी रेलवे संजीदा नहीं है. ब्रॉड गेज में कन्वर्सन के […]

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रेलवे. बुक सामान की सुरक्षा की चिंता नहीं

दरभंगा : दरभंगा जंकशन पर लाखों के सामान यूं ही खुले आसमान के नीचे पड़े रहते हैं. ये वो सामान हैं, जिससे विभाग को प्रतिवर्ष करोड़ों की आय होती है. आश्चर्यजनक पहलू यह है कि इसके प्रति भी रेलवे संजीदा नहीं है. ब्रॉड गेज में कन्वर्सन के दो दशक बाद भी आज तक इन सामान को सुरक्षित रखने के लिए एक केज तक का प्रबंध नहीं किया जा सका. फलत: शहर के व्यापारियों के सामान बरबाद होते रहते हैं.
धूप व बारिश में पड़ा रहता है सामान : रेलवे की ओर से दिए जानेवाले दर्जे में सर्वोच्च दर्जा दरभंगा जंकशन को प्राप्त है. जाहिर तौर पर यात्रियों की भीड़ अधिक होती है. इस कारण पार्सल की बुकिंग भी खूब होती है. बाहर से माल भी पर्याप्त मात्रा में मंगवाया जाता है. आवक तथा जावक दोनों पार्सल खुले आसमान के नीचे पड़े रहते हैं. धूप व बरसात में बरबाद होते रहते हैं.
सामान की सुरक्षा के प्रति विभाग लापरवाह: इन सामान की रेलवे को तनिक भी फिक्र नहीं है. 2 फरवरी 1996 को समस्तीपुर तक आमान परिवर्त्तन का कार्य पूरा हुए बीस साल हो गये. अब तक पार्सल सामान को सुरक्षित रखने का कोई प्रबंध नहीं किया गया है. पहले प्लेटफॉर्म एक के दक्षिण पार्सल कार्यालय सटे हिस्से में सामान रखने की जो व्यवस्था थी, उसे भी समाप्त कर दिया गया.
संपर्क क्रांति से आता है सर्वाधिक पार्सल: दरभंगा से चलनेवाली प्राय: सभी ट्रेनों में पार्सल की बुकिंग होती है, लेकिन सबसे ज्यादा पार्सल नई दिल्ली से आनेवाली बिहार संपर्क क्रांति सुपरफाॅस्ट से आते हैं. वहीं जावक पार्सल की सर्वाधिक बुकिंग यहां से पुणे के लिए चलनेवाली साप्ताहिक ट्रेन ज्ञान गंगा एक्सप्रेस में होती है. वैसे कोलकाता-दरभंगा एक्सप्रेस, मिथिलांचल एक्सप्रेस, गंगासागर एक्सप्रेस, बागमती एक्सप्रेस आदि में भी माल की बुकिंग होती है.
मखाना व एल्यूमिनियम के सामान की बुकिंग अधिक: दरभंगा से बाहर के लिए मुख्य रूप से मखाना व एल्यूमिनिमय के बने बरतन आदि की बुकिंग होती है. इसमें मखाना अधिक रहता है. आवक में रेडिमेड कपड़े अधिक होते हैं. सामान के बारिश में खराब होने की आशंका अधिक रहती है.
कार्यालय का रिकार्ड भी सुरक्षित नहीं : आलम यह है कि पार्सल कार्यालय की छत जगह-जगह से टपकती है. इससे पार्सल के सामान को तो नुकसान पहुंचता ही है, इस कार्यालय के महत्वपूर्ण रिकार्ड भी बरबाद हो रहे हैं. इन महत्वपूर्ण कागजात की सुरक्षा के प्रति भी विभाग गंभीर नहीं है.
यात्रियों को होती है परेशानी : प्लेटफॉर्मों पर पार्सल का सामान पड़ा रहने के कारण यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ती है. जब ट्रेन आती है तो यात्रियों का आवागमन बढ़ जाता है. बीच में सामान पड़े होने की वजह से यात्रियों को दिक्कत होती है.
पार्सल सामान के लिए केज नहीं
खुले आसमान के नीचे पड़ा पार्सल का सामान.
पांच महीने में
2.39 करोड़ आय
पार्सल से रेलवे को अच्छी आय होती है. चालू वित्तीय वर्ष के पांच महीने यानि अप्रैल से अगस्त तक 2 करोड़ 39 लाख, 28 हजार 807 रूपये की आय हो चुकी है. इसमें आवक से अधिक आमद हुई है. आवक पार्सल से 1 करोड़ 76 लाख, 3 हजार 65 रुपये तथा जावक पार्सल से 63 लाख, 25 हजार, 742 रुपये की आय हुई है. स्पष्ट है कि जावक से कहीं अधिक आवक पार्सल से रेलवे को आमदनी हो रही है.
ट्राली पाथ की सुविधा नहीं
जंकशन पर केज की व्यवस्था तो नहीं ही है, ट्राली पाथ भी नहीं है. इस वजह से यदि गाड़ी प्लेटफॉर्म संख्या दो, तीन, चार या पांच पर आती है तो वहां से सामान लाना काफी मुश्किल भरा होता है. इन प्लेटफॉर्मों पर केज भी नहीं है, जिसमें सामान को सुरक्षित रखा जा सके. बस ट्रेन से उता रकर उसे खुले आसमान के नीचे प्लेटफॉर्म पर ही छोड़ दिया जाता है. रात के वक्त सामान आने पर कारोबारी चाहकर भी उसे ले नहीं जा पाते. भगवान भरोसे छोड़ देते हैं.
डीएमयू चलने से घटा पार्सल का ग्राफ
दरभंगा सेक्शन में डीएमयू सवारी गाड़ी का परिचालन आरंभ होने का यात्रियों को जो लाभ हुआ हो, लेकिन इस वजह से पार्सल का ग्राफ गिरा है. वहीं कुछ ट्रेनों का आगे विस्तार ने इसे प्रभावित किया है. विशेषकर सीतामढ़ी के लिए यहां आने तथा यहां से बुक होने वाले सामानों पर ब्रेक सा लग गया है.
पहले यहां से सवारी ट्रेन की एसएलआर बोगी में माल बंद कर वहां भेजा जाता था, लेकिन डीएमयू की रेक में यह सुविधा नहीं है. इससे पार्सल का ग्राफ गिरता जा रहा है. भाड़ा बढ़ने का भी इस पर असर पड़ा है. इस कारण संपर्क क्रांति व सिकंदराबाद एक्सप्रेस को छोड़ प्राय: बांकि सभी ट्रेनों में लीज समाप्त हो गया है. कारोबारी इसमें कम दिलचस्पी ले रहे हैं.
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