फर्श पर होता है इलाज

Published at :25 Aug 2016 6:39 AM (IST)
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फर्श पर होता है इलाज

डीएमसीएच . बढ़ रहे मरीज, घट रहा संसाधन 17 की जगह डॉक्टरों की लगती हैं छह कुर्सियां दरभंगा :डीएमसीएच में मरीजों की तादाद बढ़ी है, लेकिन संसाधन घटे हैं. आलम यह है कि उपचार व्यवस्था का ग्राफ नीचे खिसक गया है. यही कारण है कि मरीजों का इलाज फर्श पर लिटाकर होता है. यह मेडिकल […]

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डीएमसीएच . बढ़ रहे मरीज, घट रहा संसाधन

17 की जगह डॉक्टरों की लगती हैं छह कुर्सियां
दरभंगा :डीएमसीएच में मरीजों की तादाद बढ़ी है, लेकिन संसाधन घटे हैं. आलम यह है कि उपचार व्यवस्था का ग्राफ नीचे खिसक गया है. यही कारण है कि मरीजों का इलाज फर्श पर लिटाकर होता है. यह मेडिकल एथिक्स के मानक के खिलाफ है.
मरीजों से भरा रहता है परीक्षण टेबुल
इस वार्ड के दो परीक्षण कक्ष में आधा दर्जन परीक्षण टेबुल है. वार्ड में तिल रखने की जगह नहीं रहती है. सभी परीक्षण टेबुल फुल रहता है. आने वाले मरीजों का फर्श पर लिटाया जाता है. डॉक्टरों को परीक्षण कक्ष में खड़ा रहने की भी जगह नहीं मिलती है. फर्श पर लेटे मरीजों को डाक्टर बैठकर परीक्षण करते हैं. ओटी रूम का एक टेबुल अलग जमाने का है. टेबुल पर मरीज का सिर उपर और पैर नीचे लटका रहता है.
पंखा सिर्फ हिलता है. एसी गायब है. डॉक्टरों का चैंबर काल कोठरी की तरह है. एक शिफ्ट में 17 डाक्टरेां की ड‍्यूटी है लेकिन कुर्सी की संख्या आधा दर्जन है. एसओडी-पीओडी के शयनकक्ष में एनजीओ कर्मी रहते हैं. अन्य कर्मियों के बैठने तक की जगह नहीं है.
एक दर्जन यूनिट ठप
प्रतिदिन 1700 मरीजों की जांच
डीमएसीएच में हरेक दिन ओडीपी में औसतन 1700 मरीजों की जांच होती है. ओपीडी में गत मंगलवार को 2390 मरीजों की रेकार्डतोड़ जांच हुई. सबसे अधिक मेडीसीन विभाग में 672 मरीजों की जांच की गयी. सामान्य दिनों में यहां प्रतिदिन औसतन 350 से 420 मरीजों की जांच होती है. वार्डों में 685 मरीज भरती है.
डीएमसीएच में फर्श पर लेटे मरीज.
संसाधनों की कमी : गत 10 सालों में 13 वार्ड और यूनिट बंद हो गये. इसमें चर्मरोग, मनोरोग, कैंसर, आइडीएच, बर्न वार्ड, पेइंग वार्ड, आलीशान नर्सिंग होम, इमरजेंसी, शिशु रोग वार्ड का एक्सरे यूनिट, गायनिक, शिशुरोग और इमरजेंसी वार्ड का अल्ट्रासाउंड जांच घर आदि शामिल है. इसक अलावा कई कीमती मशीनें आलमीरों में बंद पड़े हैं.
वार्डों का शीघ्र होगा िवस्तार
इस संबंध में अस्पताल अधीक्षक डॉ एसके मिश्रा ने बताया कि इमरजेंसी वार्ड समेत अन्य वार्डों का विस्तारीकरण के प्रस्ताव पर विचार-विमर्श चल रहा है. शीघ्र ही इसका असर दिखने लगेगा.
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