रबी फसलों पर ग्लोबल वार्मिंग का असर

जाले : ग्रीन हाउस गैस (कार्बन डाइआॅक्साइड, मिथेन, क्लोरीफ्लोरो कार्बन इत्यादि) के उत्सर्जन में लगातार हो रही बढ़ोत्तरी से ग्लोबल वाॅर्मिंग की समस्या उत्पन्न हो रही है़ सन 1970 से 2000 तक में लगभग 0़ 6 डिग्री सेल्सियस औसत तापममान में वृद्धि हो गयी है़ अगर इसी रफ्तार से ग्लोबल वाॅर्मिंग होता रहा तो 2050 […]
जाले : ग्रीन हाउस गैस (कार्बन डाइआॅक्साइड, मिथेन, क्लोरीफ्लोरो कार्बन इत्यादि) के उत्सर्जन में लगातार हो रही बढ़ोत्तरी से ग्लोबल वाॅर्मिंग की समस्या उत्पन्न हो रही है़ सन 1970 से 2000 तक में लगभग 0़ 6 डिग्री सेल्सियस औसत तापममान में वृद्धि हो गयी है़ अगर इसी रफ्तार से ग्लोबल वाॅर्मिंग होता रहा तो 2050 तक तापमान में 3 डिग्री सेल्सियस तक वृद्धि की आशंका जताई जा रही है़ कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर उच्च तापमान में एक डिग्री सेल्सियस तथा निम्न तापमान में डेढ़ डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हो जाये तो खाद्यान्न का उत्पादन 35 प्रतिशत कम हो जायेगा़
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