वद्यिा से व्यवहार परिवर्तित होना ही शक्षिा

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 27 Nov 2015 8:59 PM

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विद्या से व्यवहार परिवर्तित होना ही शिक्षाफोटो:::::12,13परिचय : उद्घाटन समारोह को संबोधित करती प्रतिकुलपति डा. नीलिमा सिन्हा, स्पर्धा व उपस्थित गण्यमान्य. दो दिवसीय राष्ट्रीय शास्त्री स्पर्धा शुरू दरभंगा : कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विवि के दरबार हॉल में शुक्रवार को राष्ट्रीय संस्कृत संस्थानम नई दिल्ली द्वारा दो दिवसीय राज्य स्तरीय शास्त्रीय स्पर्धा 2015-16 का उद्घाटन […]

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विद्या से व्यवहार परिवर्तित होना ही शिक्षाफोटो:::::12,13परिचय : उद्घाटन समारोह को संबोधित करती प्रतिकुलपति डा. नीलिमा सिन्हा, स्पर्धा व उपस्थित गण्यमान्य. दो दिवसीय राष्ट्रीय शास्त्री स्पर्धा शुरू दरभंगा : कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विवि के दरबार हॉल में शुक्रवार को राष्ट्रीय संस्कृत संस्थानम नई दिल्ली द्वारा दो दिवसीय राज्य स्तरीय शास्त्रीय स्पर्धा 2015-16 का उद्घाटन प्रतिकुलपति डा. नीलिमा सिन्हा ने किया. मौके पर उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए प्रतिकुलपति ने आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि भविष्य में विद्वानों का निर्माण हो सके इसके लिए भावी पीढ़ी को विवि मंच देने का काम करती है. उन्होंने कहा कि जीत हार तो जीवन का एक पक्ष मात्र है. महत्व यह है कि जीवन में गतिशीलता बनी रहे. डा. सिन्हा ने कहा कि जीवन भर सीखना ही हमारा ध्येय नहीं होता बल्कि उसे जीवन में कर्मयुत करना हमारा अभिष्ठ होना चाहिए. रटन्त विद्या किसी कार्य की सिद्धि नहीं करती बल्कि वह ज्ञान जाल में जीवन भर फंसता चला जाता है. विद्या से व्यवहार परिवर्तित होना ही शिक्षा की सच्ची उपयोगिता है. छात्र कल्याण अध्यक्ष सह कुलसचिव डा. सुरेश्वर झा ने कहा कि राज्यस्तरीय दल का चयन होने के बाद अंतिम राष्ट्रीय स्पर्धा तिरुपति के बैंकटेश संस्कृत विवि में आयोजित होगी. कार्यक्रम के समन्वयक डा.शिवलोचन झा ने स्पर्धा में शामिल प्रतिभागियों एवं मंचासीन अतिथियों का स्वागत किया. उद्घाटन सत्र की शुरुआत डा. विधेश्वर झा एवं डा.दिलीप झा के मंगलाचरण से यह शुरु हुआ. आयोजित स्पर्धा में व्याकरण, साहित्य, न्यायदर्शन, सांख्य दर्शन, मीमांसा दर्शन, वेदांत, धर्मशास्त्र एवं ज्योतिष को रखा गया है. विषय के रूप में क्रमश : कर्मकार व्यंजनावृति, कालनिरुपण, प्रकृति-विकृति, धर्मलक्षण, भया, स्त्रीधन एवं नाभ संयोग स्वीकृत है. कार्यक्रम के चयन समिति में प्रो.शशिनाथ झा, प्रो. शिवकांत झा, प्रो. श्रीपति त्रिपाठी, प्रो.बौआनंद झा, प्रो.दिलीप कुमार झा को शामिल किया गया है. यह कार्यक्रम बिहार एवं झारखंड के छात्रों के बीच आयोजित किया गया है. मंच संचालन डा. विश्राम तिवारी ने किया.

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