पांच किमी दूर चारा काटने गयीं बाढ़ पीड़ितों को लोगों ने रोका, क्या खायेंगे मवेशी ?

कमतौल : घर से पांच किमी दूर पशुओं के लिए चारा काटने पहुंची महिलाओं को स्थानीय लोगों द्वारा चारा काटने से मना करने पर वे बिफर पड़ी, कहा ‘अपना लेल त कहियो अपशब्द नई सुनलौं, खूंटा पर बान्हल निमुधन लेल त सेहो सुनय पड़ैय. अहीं कहियौ बाबू, जौं ई डकूबा नई आयल रहितियै त हम […]
कमतौल : घर से पांच किमी दूर पशुओं के लिए चारा काटने पहुंची महिलाओं को स्थानीय लोगों द्वारा चारा काटने से मना करने पर वे बिफर पड़ी, कहा ‘अपना लेल त कहियो अपशब्द नई सुनलौं, खूंटा पर बान्हल निमुधन लेल त सेहो सुनय पड़ैय. अहीं कहियौ बाबू, जौं ई डकूबा नई आयल रहितियै त हम दोसर गाम में किएक अईतियै.
मिल्की निवासी सुमित्रा देवी, मुन्नी देवी व कौशल्या देवी कहती हैं ढढ़िया-बेलबाड़ा पंचायत में पानी कम हुआ है. लेकिन, मिल्की व बेलबाड़ा अब भी टापू बना हुआ है. पशुओं को हरा चारा के लिए चार-पांच किमी से दूर जाना पड़ रहा है. वह अन्य ग्रामीणों के साथ पड़ोस के एक गांव में रविवार को आयी थी. वहां उनलोगों को एक व्यक्ति ने चारा काटने से मना किया. गिड़गिड़ाने के बावजूद खरी-खोटी सुनायी. इसलिए वे सभी गुस्से में थी.
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