एक दिन पैकेट मिलल रहे, ओकरा बाद...

Updated at : 24 Aug 2017 5:07 AM (IST)
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एक दिन पैकेट मिलल रहे, ओकरा बाद...

मोतिहारी : लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में, तुम तरस नहीं खाते बस्तियां जलाने में’. शायर बसीर बद्र ने यह शेर भले ही इतर संदर्भ में लिखी हो. लेकिन, जिले में बाढ़ की विभीषिका ने उजारे कई सपनों के आशियाने पर यह शेर सटीक बैठती है. बाढ़ ने आशियाने ही नहीं, बल्कि बाढ़ […]

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मोतिहारी : लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में, तुम तरस नहीं खाते बस्तियां जलाने में’. शायर बसीर बद्र ने यह शेर भले ही इतर संदर्भ में लिखी हो. लेकिन, जिले में बाढ़ की विभीषिका ने उजारे कई सपनों के आशियाने पर यह शेर सटीक बैठती है. बाढ़ ने आशियाने ही नहीं, बल्कि बाढ़ पीड़ितों जिंदगी व्यापक असर डाला है,

जो उम्र भर के दर्द से कम नहीं. स्थिति यह है कि नंदपुर गांव के लोगों को बाढ़ ने सड़कों पर ला दिया है. उनके घरों में बाढ़ का पानी अब भी जमा है. कब अपने घर में जायेंगे, उनके लिए अब भी यह बड़ा सवाल है.

स्थिति जानने की कोशिश कर ही रहा था कि देखता हूं कि नंदपुर गांव स्थित सड़क किनारे रोजी रोटी के एकमात्र सहारा ठेले पर बचिया देवी गेहूं सूखा रही थी. बिना कुछ पूछे बोलने लगती है.
‘गेहूं सुखी त कल के खाना बनी, आजे भर के आटा बा’, कुछ लोग राहत बांटे के नाम पर कुछ दिन पहले आइल रहन, राहत पॉकेट देलन. ओकरा बाद दोबारा न अइलन. बोलते बोलते बचिया देवी का गला भर आता है. गेहूं सुखाव तानी, ताकि बचवा सब भूखा न रहे. मां नु बानी बचवा सब के कैसे भूखा रख सकीले. बाढ़ सब छीन लेलक… खुद-व-खुद बुदबुदाने लगती है. प्रशासन की ओर से राहत सामग्री का वितरण हो रहा है, आपके पास भी पहुंचेगा का हवाला देकर मन बहलाने की कोशिश की. ‘अच्छा देख तानी’ बोल अपने काम में व्यस्त हो जाती हैं. यही दास्तान जमुना साह, बलिराम कुमार सहित अन्य लोगों की भी है,
जो बाढ़ के पानी निकलने तक सड़क किनारे शरणस्थली बनाये हुए हैं, जो घर से बाढ़ का पानी उतरने के इंतजार में हैं. इसी तरह राजकीय मध्य विद्यालय, कोल्हुअरवा परिसर में लोगों की चहलकदमी दिखी. पूछने पर पता चला कि प्रशासन की ओर से बनाये गये बाढ़ पीड़ितों की शरणस्थली(राहत शिविर) है. इसमें बाढ़ प्रभावित क्षेत्र कोल्हुअरवा व नकछेद टोला के लोग शरण लिए हुए हैं. पूछने पर कुसुम तारा, खैरून नेशा, रानी देवी, शहनाज बेगम, शोभा देवी आदि ने बताया कि बाढ़ से घर क्षतिग्रस्त हो गया है. बाढ़ का पानी घर में अब भी जमा है. प्रशासन की ओर से नियमित राहत सामग्री मिल रही है. लेकिन, बाढ़ ने जमा-जमाया रोजगार छीन गया है. बाढ़ का पानी उतरेगा तो घर जायेंगे. ऐसे बाढ़ पीड़ितों के लिए यह बड़ा सवाल भी है कि उजड़े आशियाने को फिर से कैसे बसायेंगे.
बाढ़ पीड़ितों की दास्तान
शहर के नंदपुर, नकछेद टोला, कोल्हुअरवा आदि में बाढ़ का असर
सड़क किनारे झुग्गी बनाकर रह रहे हैं लोग
बाढ़ का पानी उतड़ने के इंतजार में हैं पीड़ित
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