भाई-बहन का पर्व रक्षाबंधन आज

Updated at : 07 Aug 2017 1:29 PM (IST)
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भाई-बहन का पर्व रक्षाबंधन आज

पीपराकोठी : क्षेत्र में रक्षाबंधन की तैयारी में लोग जूट गये हैं. दुकानों से बहनें राखी की खरीदारी करते नजर आयी. वैसे रक्षाबंधन का त्योहार का इतिहास बहुत पुराना है. धर्म शास्त्र से लेकर इतिहास के पन्नों में भी रक्षा बंधन का उल्लेख है. बताया जाता है कि इतिहास के पन्नों को देखें तो इस […]

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पीपराकोठी : क्षेत्र में रक्षाबंधन की तैयारी में लोग जूट गये हैं. दुकानों से बहनें राखी की खरीदारी करते नजर आयी. वैसे रक्षाबंधन का त्योहार का इतिहास बहुत पुराना है. धर्म शास्त्र से लेकर इतिहास के पन्नों में भी रक्षा बंधन का उल्लेख है. बताया जाता है कि इतिहास के पन्नों को देखें तो इस त्योहार की उत्पत्ति लगभग छह हजार साल पहले हुई है.
रक्षाबंधन की शुरुआत कर्णावती से मध्यकालीन युग में राजपूत व मुसलिमों के बीच संघर्ष चल रहा था. रानी कर्णावती चित्तौड़ के राजा की विधवा थी. उस दौरान गुजरात के सुल्तान बहादुर शाह से अपनी और अपनी प्रजा की सुरक्षा का कोई रास्ता न निकलता देख रानी ने हुमायूं को राखी भेजी थी.
सिकंदर की जान बचायी थी राखी
एलेग्जेंडर व पुरु के बीच का माना जाता है. कहा जाता है कि हमेशा विजयी रहने वाला एलेग्जेंडर भारतीय राजा पुरु की प्रचंडता से काफी विचलित हुआ. इससे एलेग्जेंडर की पत्नी काफी तनाव में आ गयी थी. उन्होंने रक्षाबंधन के त्योहार के बारे में सुना था. उन्होंने भारतीय राजा पुरु को राखी भेजी. तब जाकर युद्ध की स्थिति समाप्त हुई थी. क्योंकि भारतीय राजा पुरु ने एलेग्जेंडर की पत्नी को बहन मान लिया था.
द्रौपदी और कृष्ण से जुड़ी है राखी
कृष्ण व द्रौपदी को इसका श्रेय जाता है. कृष्ण भगवान ने दुष्ट राजा शिशुपाल को मारा था. युद्ध के दौरान कृष्ण के बाएं हाथ की अंगुली से खून बह रहा था. इसे देखकर द्रौपदी बेहद दुखी हुयी और उन्होंने अपनी साड़ी का टुकड़ा फाड़कर कृष्ण की अंगुली में बांधा जिससे उनका खून बहना बंद हो गया. तभी से कृष्ण ने द्रौपदी को अपनी बहन स्वीकार कर लिया था. वर्षों बाद जब पांडव द्रौपदी को जुये में हार गये थे और भरी सभा में उनका चीरहरण हो रहा था तब कृष्ण ने द्रौपदी की लाज बचायी थी. इसके अलावा भी इतिहास में रक्षा बंधन पर्व के कई साक्ष्य हैं.
सहकारिता मंत्री को छात्राओं ने बांधी राखी
मधुबन. सहकारिता मंत्री राणा रणधीर का रविवार को गुरमिया में भव्य स्वागत किया गया. इस दौरान छात्राओं ने मंत्री को चंदन लगाकर राखी बांधी. अध्यक्षता मधुबन युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष इ. हिमांशु ने की. राखी बंधन में खुशी, नीतू, स्वाती, खुशबू, जुली आदि शामिल थी. मधुबन से अरेराज सोमेश्वर नाथ मंदिर जाने के क्रम आयोजित अभिनंदन समारोह को संबोधित करते हुए मंत्री राणा रणधीर ने कहा कि सरकार छात्राओं विकास के लिये लगातार प्रयास कर रही है. मधुबन युवा मोर्चा के संस्थापक राणा, अनिल, डा.राकेश सिंह, किशोरी, अरविंद, अनुज, संतोष कुमार, आयुष कुमार, मो.काशिम, बहारूदीन, मेथूर ठाकुर, सुजीत सिंह, मो. मनीर, शंभु सिंह, राम सागर पासवान, हरिशंकर, विश्वनाथ सिंह, सुबोध सिंह आदि मौजूद थे.
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