लीड : गंगा नदी में 56 प्रजातियों के करीब नौ हजार व गोकुल जलाशय में 64 प्रजातियों के 2,500 प्रवासी पक्षी मिले
Published by : Parshant Kumar Rai Updated At : 23 Feb 2026 6:25 PM
सुबह में बाजार समिति सीवेज पौंड में लगता है पक्षी क्या जमौडा
प्राकृतिक सौंदर्य. होली आते ही साइबेरिया और लेह-लद्दाख की ओर लौटने लगे मेहमान पक्षी
सुबह में बाजार समिति सीवेज पौंड में पक्षियों का लगता है जमावड़ा, कलरव कर रहा आकर्षित23 फरवरी- फोटो – 9- सीवेज पौंड.
23 फरवरी- फोटो – 10- बगबद प्रवासी पक्षी.28 फरवरी- फोटो – 11- बड़ा बाटन गंगा प्रवासी पक्षी.
23 फरवरी- फोटो – 12= शाह चकवा गंगा प्रवासी पक्षी.23 फरवरी- फोटो – 13- गजपांव सोनकी सुहिया प्रवासी पक्षी.
प्रशांत कुमार राय, बक्सरजिले में प्रवासी पक्षियों की गणना एक से चार फरवरी तक गंगा नदी और अन्य जल स्रोतों में वन विभाग की देखरेख में की गयी. गणना के दौरान स्थानीय और प्रवासी पक्षियों की संख्या एक साथ दर्ज की गयी. प्रवासी पक्षी दशहरे-दीवाली के समय आते हैं और होली के आसपास अपने देश लौट जाते हैं. बक्सर शहर स्थित बाजार समिति के निकट सीवेज पौंड में विभिन्न प्रकार के पक्षी आये, जो देखने में मनोहर लगे. नया भोजपुर के परमानपुर क्षेत्र के कोलियाखाप, गोकुल जलाशय और चौसा के रानी घाट से बयासी पुल तक गंगा के करीब 50 किमी क्षेत्र में भारी संख्या में प्रवासी और स्थानीय पक्षी देखे गये. गणना कार्य का नेतृत्व पक्षीविद अरविंद मिश्रा, भोजपुर वन प्रमंडल पदाधिकारी प्रद्युम्न गौरव और वन क्षेत्र पदाधिकारी सुरेश कुमार ने किया. यह सर्वेक्षण वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, बिहार सरकार और बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी के सहयोग से हुआ.
कोलियाखाप में पाये गये 29 प्रजातियों के सैकड़ों पक्षी
सीवेज पौंड में जलकुम्भी की अधिकता के कारण ब्लैक विंग्ड स्टिल्ट (गजपांव) नहीं दिखे, जबकि डुमरी प्रखंड के कोलियाखाप में 29 प्रजातियों के सैकड़ों पक्षी पाये गये, ज्यादातर स्थानीय. प्रवासी पक्षियों में टेमिंक स्टिंट, यूरेशियन कूट (सरार), ब्लू थ्रोट (नीलकंठी) और सिट्रीन वैगटेल (पिलकिया खंजन) शामिल थे.
रानी घाट से बयासी पुल तक गंगा में 56 प्रजातियों के करीब नौ हजार पक्षी
चौसा के रानी घाट से बयासी पुल तक गंगा में 56 प्रजातियों के करीब 9 हजार पक्षियों की गिनती हुई. स्थानीय पक्षियों में स्मॉल प्रेटिंकोल (छोटा धोबैचा) लगभग 5 हजार, रिवर लैपविंग (गंग टिटहरी) 150 और ग्रेट क्रेस्टेड ग्रीब (शिवा हंस) 175 पक्षी पाये गये.
गोकुल जलाशय में 64 प्रजातियों के 2500 पक्षी
गोकुल जलाशय के लगभग 25 किमी क्षेत्र में 2,500 पक्षी देखे गये, जिनमें 64 प्रजातियां शामिल थीं. प्रवासी बतख में गडवाल (मैल), यूरेशियन वीजन (पियासन), नॉर्दर्न शोवलर (तिदारी), कॉमन पोचार्ड (छोटा लालसर) और स्थानीय लेसर व्हिसलिंग डक (छोटी सिल्ली), कॉटन पिग्मी गूज (गिर्री) प्रमुख थे. ब्लैक रेडस्टार्ट (थिरथिरा), यूरेशियन कूट (सरार) और वुड सैंडपाइपर (भूरा चौबाहा) की भी अच्छी संख्या रही. नैनिजोरे क्षेत्र में यूरेशियन थिक नी (करवानक) भी दिखायी दिये. सर्वेक्षण में पटना के युवा पक्षी विशेषज्ञ आरूष, खगड़िया के प्रशांत कुमार, सासाराम के प्रियांशु प्रभाकर के अलावा वनरक्षक अनीश कुमार, नितीश कुमार, संतोष कुमार, धीरज सिंह और वनपाल राजेश कुमार शामिल रहे.
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