सुविधाओं के लिए तरस रहा बक्सर कोर्ट
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :21 May 2015 2:00 AM (IST)
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अनदेखी. 100 वर्ष पूरा करने के बाद भी कोर्ट परिसर में नहीं है महिला शौचालय की व्यवस्था बक्सर कोर्ट : बक्सर कोर्ट शताब्दी वर्ष पूरा कर चुका है, मगर आज भी कई तरह की सुविधाएं बक्सर के लोगों को नहीं मिल सकी हैं. 103 साल के सफर में तीन अधिवक्ता से दो हजार हो गये […]
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अनदेखी. 100 वर्ष पूरा करने के बाद भी कोर्ट परिसर में नहीं है महिला शौचालय की व्यवस्था
बक्सर कोर्ट : बक्सर कोर्ट शताब्दी वर्ष पूरा कर चुका है, मगर आज भी कई तरह की सुविधाएं बक्सर के लोगों को नहीं मिल सकी हैं. 103 साल के सफर में तीन अधिवक्ता से दो हजार हो गये है, लेकिन सुविधाएं नहीं बढ़ीं हैं. प्रतिदिन न्यायालय में करीब 10 हजार मुवक्किल, उनके परिजन व अन्य लोग आते हैं, जिसमें महिलाओं की संख्या भी करीब दो हजार रहती है.
बावजूद इसके मूलभूत सुविधाओं से न्यायालय परिसर महरूम है. वैसे 24 मई को शताब्दी वर्ष पूरा करने के उपलक्ष्य में कई कार्यक्रम हो रहे हैं और पटना हाइकोर्ट के चीफ जस्टिस न्यायमूर्ति एल नरसिम्हा रेड्डी आनेवाले हैं. स्वागत के लिए जोरदार तैयारियां चल रही हैं.
कोर्ट में क्या-क्या नहीं हुआ 103 सालों में
प्रतिदिन आनेवाली दो हजार महिलाएं, जो फैमिली कोर्ट के साथ-साथ कई मामलों में बच्चों के साथ भी आती हैं, कई गवाह भी रहती हैं. ऐसी महिलाओं के लिए अभी तक कोई महिला शेड नहीं बना है.
न्यायालय में आनेवाले करीब 10 हजार मुवक्किल व आमजनों के लिए सुविधाएं कम हैं. दो चापाकल परिसर में हैं, लेकिन उसमें से एक खराब है, एक चालू. गरमी में परेशानी लोग ङोल रहे हैं.
कोई पुरुष के लिए अलग से शेड नहीं है कि लोग गरमी से बच सकें.एक शौचालय है, जिसकी गंदगी से लोग परेशान रहते हैं. महिला शौचालय भी यहां नहीं है, जबकि रोज आनेवाले दस हजार से अधिक लोगों के लिए कम-से-कम चार शौचालयों की व्यवस्था होनी चाहिए थीं.
यहां रेलवे कोर्ट नहीं है और न ही इसके मजिस्ट्रेट हैं. बेटिकट यात्राी पकड़े जाने पर उन्हें आरा ले जाकर सुनवाई की जाती है, जिससे काम में बाधाएं आती हैं और परेशानी भी.न्यायालय परिसर में फस्ट एड की व्यवस्था नहीं है.
हाल ही में उच्च न्यायालय के निर्देश पर मेडिकल टीम आयी थी, लेकिन कुछ दिन रह कर चली गयी. यहां स्थायी मेडिकल टीम की व्यवस्था होनी चाहिए.
जज और अधिवक्ता के काम से थकने के बाद रिफ्रेस्पमेंट की व्यवस्था नहीं. कैंटीन नहीं है, जहां बैठ कर अधिवक्ता चाय भी पी सकें. कैंपस से बाहर जाकर लोग यह काम करते हैं.
कैंटीन के लिए जगह है, लेकिन कोई कैंटीन चलाने के लिए सामने नहीं आ रहा है.सुरक्षा की दृष्टि से यहां व्यवस्था नहीं, बाउंड्री भी ठीक नहीं, मात्र एक सीसी टीवी कैमरा, डिस्ट्रिक जज न्यायालय परिसर में है. जबकि, सीसी टीवी कैमरे से लैस करने की बातें कैदियों के भागने के बाद होती रही हैं.कोर्ट हाजत भी सुरक्षित नहीं है, क्योंकि अक्सर यहां से कैदी भाग जाने में सफल होते हैं.
क्या-क्या होगा 24 मई को
24 मई की सुबह नौ बजे हाइकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एल नरसिम्हा रेड्डी का आगमन होगा. उसके बाद उन्हें गॉर्ड ऑफ ऑनर दिया जायेगा, जिसके लिए पुलिस अधिकारी के साथ बल रहेंगे. इसके लिए स्वागत मंच तैयार किया जा रहा है. अधिवक्ता संघ के लिए मिली ढाई कट्ठा जमीन का भूमि पूजन और शिलान्यास भी होगा, जो मुख्य गेट के सटे है.
इन्हें सम्मान पत्र समर्पित किया जायेगा, जिसमें उनकी जीवनी शामिल की जायेगी. बाद में मुख्य न्यायाधीश प्रजातंत्र में अधिवक्ताओं और न्यायपालिका के दायित्वों पर अपना संदेश देंगे.
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