बक्सर में 2023 के बाद कालाजार का एक भी नया मामला नहीं, स्वास्थ्य विभाग की सख्त निगरानी जारी

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घर-घर जाकर जांच करते स्वास्थ्यकर्मी

Bihar News: बिहार के बक्सर में कालाजार को लेकर फॉलो अप अभियान चलाया गया. साल 2023 से जिले में कालाजार का एक भी मरीज नहीं मिला है. वीडीसीओ ने मरीजों एवं उनके परिजनों को कई अहम दी हैं.

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Bihar News: बक्सर अब कालाजार मुक्त होने की कगार पर पहुंच चुका है. वर्ष 2023 के बाद से जिले में कालाजार का एक भी नया मरीज सामने नहीं आया है. साल 2023 में जिले में कालाजार (वीएल) का एक तथा पोस्ट काला-जार डर्मल लीशमैनियासिस ( PKDL) का एक मरीज मिला था.

जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यालय की ओर से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि जिन क्षेत्रों में पहले कालाजार के मरीज मिले थे, वहां लगातार कड़ी निगरानी रखी जाए. इसी को लेकर बुधवार को वीडीसीओ पंकज कुमार की अगुआई में सदर प्रखंड के छोटका नुआव आयुष्मान आरोग्य मंदिर एवं गोप नुआव गांव में पहले से सूचित कालाजार मरीजों का फॉलो अप किया गया. इस दौरान मरीजों की जांच के साथ-साथ उनसे पूछताछ भी की गई.

घर-घर जाकर मरीजों का फॉलो अप किया गया

फॉलो अप अभियान के दौरान सात मरीजों के घर पहुंचकर मरीजों एवं उनके परिजनों से कालाजार से संबंधित जानकारी ली गई. पूछताछ के दौरान कालाजार के प्रमुख लक्षणों जैसे दो सप्ताह या उससे अधिक समय तक लगातार बुखार रहना, वजन घटना, भूख नहीं लगना, कमजोरी महसूस होना, तिल्ली या जिगर का बढ़ना तथा शरीर पर काले धब्बे पड़ना के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई. फॉलो अप के दौरान सभी मरीज स्वस्थ पाए गए.

वीडीसीओ ने मरीजों एवं उनके परिजनों को सलाह दी कि यदि भविष्य में परिवार या आसपास के किसी व्यक्ति में कालाजार के लक्षण दिखाई दें तो तुरंत आशा कार्यकर्ता को सूचित करें या नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य संस्थान में जाकर जांच एवं इलाज कराएं. उन्होंने बताया कि सरकारी अस्पतालों में कालाजार का इलाज पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध है.

ठीक हो चुके मरीज दोबारा भी हो सकते हैं संक्रमित

जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. शैलेंद्र कुमार ने बताया कि कालाजार को जड़ से मिटाने में आम लोगों की भागीदारी बेहद जरूरी है. लोगों को बीमारी के लक्षण, जांच और इलाज की सही जानकारी होनी चाहिए .उन्होंने कहा कि इस बीमारी की एक विशेषता यह है कि पूरी तरह ठीक हो चुके मरीज भी दोबारा इसकी चपेट में आ सकते हैं. ऐसे मामलों में मरीज के शरीर पर त्वचा संबंधी लीशमैनियासिस रोग होने की आशंका रहती है, जिसे त्वचा का कालाजार या पीकेडीएल कहा जाता है.

कालाजार का इलाज संभव

डॉ. कुमार ने बताया कि पीकेडीएल का इलाज संभव है, लेकिन इसके लिए मरीज को लगातार 12 सप्ताह तक नियमित रूप से दवा का सेवन करना पड़ता है.

Written By: Suryakant Kumar

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अभिनंदन पांडेय

लेखक के बारे में

By अभिनंदन पांडेय

भोपाल से शुरू हुई पत्रकारिता की यात्रा ने बंसल न्यूज (MP/CG) और दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अनुभव लेते हुए अब प्रभात खबर डिजिटल तक का मुकाम तय किया है. वर्तमान में पटना में कार्यरत हूं और बिहार की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को करीब से समझने का प्रयास कर रहा हूं. गौतम बुद्ध, चाणक्य और आर्यभट की धरती से होने का गर्व है. देश-विदेश की घटनाओं, बिहार की राजनीति, और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि रखता हूं. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स के साथ प्रयोग करना पसंद है.

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