मुआवजा बांटने में लगे हैं अधिकारी नहीं बन रहा खेतों का हेल्थ कार्ड
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :08 May 2015 8:20 AM (IST)
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कार्य में विलंब : अभियान 25 अप्रैल से, लेकिन अब तक एक भी नमूना नहीं लिये जा सका खेतों से 25 अप्रैल से जिले में शुरू किये गये मिट्टी जांच अभियान के तहत अब तक एक भी किसान की मिट्टी की जांच नहीं हो सकी. नतीजतन किसानों को इसका लाभ नहीं मिल सका. सरकार के […]
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कार्य में विलंब : अभियान 25 अप्रैल से, लेकिन अब तक एक भी नमूना नहीं लिये जा सका खेतों से
25 अप्रैल से जिले में शुरू किये गये मिट्टी जांच अभियान के तहत अब तक एक भी किसान की मिट्टी की जांच नहीं हो सकी. नतीजतन किसानों को इसका लाभ नहीं मिल सका. सरकार के कर्मियों द्वारा फसल क्षतिपूर्ति कार्य किये जाने के कारण यह महत्वपूर्ण अभियान हवा हवाई हो गया.
सरकारी सूत्रों का कहना है कि फिर से मिट्टी जांच अभियान की तिथि घोषित कर अभियान शुरू किया जायेगा, ताकि किसानों को फसल उत्पादन में वृद्धि का लाभ मिल सके.
बक्सर : 25 अप्रैल से जिले में कृषि विभाग द्वारा शुरू किये गये मिट्टी जांच अभियान की हवा निकल गयी है. अब तक यह अभियान पूरी तरह विफल हुआ है और एक भी किसानों की मिट्टी जांच के नमूने नहीं लिये जा सके हैं.
यह अभियान 10 मई तक चलेगा, लेकिन 12 दिनों में शून्य प्रगति से सरकार की योजना का कोई लाभ किसानों को नहीं मिल पाया है. कारण यह बताया जा रहा है कि जिले के किसान सलाहकारों की देख-रेख में यह काम होना था, लेकिन सरकार द्वारा दिये गये कड़े निर्देश के कारण सारे लोग फसल क्षतिपूर्ति के वितरण कार्य के लिए सूची बनाने और सूची को अंतिम रूप देने में लगे हैं, जिसके कारण यह काम बाधित पड़ा है. एक ही आदमी के जिम्मे दो-दो काम होने से यह अभियान पूरी तरह फ्लॉप हो गया है.
सरकारी सूत्रों की मानें, तो मिट्टी जांच अभियान के लिए फिर से तिथि निर्धारित करके मिट्टी की जांच की जायेगी, तभी जिले में कृषि उत्पादों में बढ़ोतरी एवं सुधार संभव हो पायेगा. हालांकि अभी तक इस संबंध में नयी तिथि को लेकर कोई चर्चा नहीं है.
ज्ञात हो कि किसानों के हित में मिट्टी जांच की व्यवस्था व्यापक हित में सरकार द्वारा की गयी थी, ताकि मिट्टी में उपस्थित पोषक तत्वों की जानकारी और उनकी मात्र जान कर किसानों को उर्वरकों के बारे में सही जानकारी दी जा सके, जिससे फसल उत्पादन बेहतर हो सके.
कैसे होती है मिट्टी की जांच : सर्वप्रथम किसान अपने खेतों के पांच से छह जगहों की मिट्टी कम-से-कम छह इंच गहरे गड्ढे खोद कर निकाले. सभी मिट्टी को एक साथ अच्छी तरह मिलाते हुए आधा किलो मिट्टी प्राप्त करते हैं. इसे अब साफ सफेद रंग की पॉलीथिन में पैक कर मिट्टी जांच के लिए तैयार करते हैं.
जांच में क्या प्राप्त होता है : मिट्टी जांच से मिट्टी में तत्कालीक पोषक तत्वों की जानकारी प्राप्त होती है. तत्वों की उपस्थिति के आधार पर उसमें ठगनेवाले फसल के लिए आवश्यक पोषक तत्व का आंकलन किया जाता है.
इस तरह ज्यादा उत्पादन के लिए फसल के प्रभेद का चयन किया जाता है. मिट्टी जांच से नाइट्रोजन, पोटाश, फॉस्फोरस वगैरह की मात्र की उपस्थिति की जानकारी प्राप्त होती है. इससे उगनेवाले फसल के लिए आवश्यक तत्व की कमी की पूर्ति की जा सकती है.
किसानों को क्या है फायदे : अभी तक किसान ज्यादा-से-ज्यादा उत्पादन पाने के लिए अनावश्यक उर्वरक का प्रयोग करते आ रहे हैं. इससे मिट्टी की उर्वरा क्षमता का लगातार ह्रास होता रहा है. मिट्टी जांच के बाद अब आवश्यक व संतुलित पोषक तत्व ही किसान अपने मिट्टी में डालेंगे, जिससे किसानों की मिट्टी की उर्वरा हमेशा बरकरार रहेगी तथा अपेक्षित उत्पादन भी प्राप्त होगा.
भूमि नहीं होगी बंजर : अशिक्षा व जागरूकता की कमी की वजह से किसानों द्वारा अत्यधिक उत्पादन को ध्यान में रख आवश्यकता से काफी उर्वरक का प्रयोग किया जाता है. अब शायद लोगों में जागरूकता आयेगी और कृषि योग्य हमारी उपजाऊ भूमि बंजर होने से बच जायेगी. इससे जागृत किसान संतुलित उर्वरक का प्रयोग करेंगे, जिससे मिट्टी की उर्वरा हमेशा बरकरार रहेगी.
क्या कहते हैं मिट्टी जांच केंद्र के एआरओ
इस संबंध में मिट्टी जांच केंद्र के एआरओ कृष्ण कुमार ने बताया कि एसएमएस एवं किसान सलाहकार अपने क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदा से किसानों के हुए फसल क्षतिपूर्ति में लगे हुए हैं. इस वजह से अब तक मिट्टी नमूनों के संग्रहण की तरफ ध्यान नहीं गया है. अभी मिट्टी के नमूने इकट्ठा प्रखंडों में ही नहीं हो सकी है, तो जिले में कैसे आयेगा.
क्या कहते हैं किसान
सिमरी प्रखंड के किसान विनोद सिंह ने बताया कि मिट्टी जांच में उपजाये गये फसल तथा आगे उपजाये जानेवाली फसल की जानकारी भी देनी पड़ती है. मिट्टी जांच से कम लागत में ज्यादा उत्पादन लिया जा सकता है. किसानों को फायदा होगा तथा कृषि में विकास तेजी से होगा. पर मिट्टी जांच विभाग द्वारा सही ढंग से नहीं किया जाता है.
डुमरांव प्रखंड के किसान हरेराम पांडेय ने बताया कि सरकार की यह पहल अच्छी है, पर विभाग द्वारा समय पर मिट्टी जांच कर किसानों को उपलब्ध नहीं करा पाती है. रोपनी एवं फसल बुआई के बाद विभाग अपना जांच रिपोर्ट देती है.
किसान सुदर्शन पांडेय इटाढ़ी ने बताया कि पिछली बार भी किसानों की मिट्टी का नमूना लिया गया था. सरकार किसी भी किसान का समय पर मिट्टी नमूने की जांच नहीं करा पाती है, जो भी अधिकारी हैं, केवल खानापूर्ति कर अपने कर्तव्य की इतिश्री मान लेते हैं. अब किसान मिट्टी जांच के प्रति उदासीन हो गये हैं. यह केवल कोरम मात्र रह गया है.
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