श्रम विभाग से मिलनेवाली सुविधाओं से वंचित हैं मजदूर

Published at :01 May 2015 8:31 AM (IST)
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श्रम विभाग से मिलनेवाली सुविधाओं से वंचित हैं मजदूर

विभाग की लापरवाही से अब तक सभी मजदूरों का नहीं हो पाया है निबंधन एक मई यानी मजदूर दिवस. इस दिवस को लेकर पूरे देश में अवकाश घोषित है, लेकिन सही मायने में मजदूरी करनेवाले लोग मजदूर दिवस पर भी काम करते नजर आते हैं और इन्हें न तो इस दिवस के बारे में पता […]

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विभाग की लापरवाही से अब तक सभी मजदूरों का नहीं हो पाया है निबंधन
एक मई यानी मजदूर दिवस. इस दिवस को लेकर पूरे देश में अवकाश घोषित है, लेकिन सही मायने में मजदूरी करनेवाले लोग मजदूर दिवस पर भी काम करते नजर आते हैं और इन्हें न तो इस दिवस के बारे में पता है और न ही काम बंद करेंगे. हर दिन की तरह विभिन्न जगहों पर काम करते नजर आयेंगे. बहरहाल, जिले में असंगठित क्षेत्र के मजदूरों की दशा काफी खराब है. इन्हें न, तो अपना अधिकार पता है और न ही श्रम विभाग इनकी बेहतरी के लिए कोई कार्य करता है.
बक्सर : जिले की आबादी 17 लाख है. इनमें से कितने मजदूरी करते हैं. इसका आकड़ा श्रम विभाग के पास नहीं है. श्रम विभाग ने अब तक असंगठित क्षेत्रों के मजदूरों का निबंधन भी सही तरीके से नहीं किया है. विभाग ने दस हजार मजदूरों का निबंधन केवल भवन निर्माण कामगार के रूप में किया है. जबकि अब तक संगठित और असंगठित क्षेत्र के हजारों मजदूरों का निबंधन नहीं हो पाया है. ऐसे में मजदूर श्रम विभाग से मिलनेवाली सुविधाओं से वंचित हो जाते हैं. विभाग की लापरवाही के कारण शहर में नियोजकों(दुकान मालिक) द्वारा कम मजदूरी पर मजदूरों से काम लिया जाता है.
असंगठित क्षेत्र को 88 भागों में बांटा गया है : असंगठित क्षेत्र को 88 भागों में बांटा गया है, जिनमें कामगार आते हैं. वहीं, संगठित क्षेत्र में लिमिटेड कंपनी में काम करनेवाले मजदूर शामिल हैं. सबका अलग-अलग मजदूरी तय किया गया है, लेकिन जिन क्षेत्रों में वे काम करते हैं, उन्हें यदि मजदूरी मिल भी जाती है, तो जानकारी के अभाव में श्रम विभाग से मिलनेवाली सुविधाओं से वंचित हो जाते हैं. सबसे अहम बात यह है कि नियोजकों के यहां काम करनेवाले मजदूरों को कम मजदूरी दी जाती है.
इनमें महिला मजदूरों की मजदूरी और भी कम दी जाती है. बक्सर जिले में ऐसे सैकड़ों दुकान और नियोजक हैं, जहां मजदूरों को कम मजदूरी दी जाती है. महिला श्रम सस्ता होने के कारण नियोजक महिलाओं को भी कई कामों में लगाये हुए हैं. बावजूद इसके श्रम विभाग इन पर नकेल कसने में विफल है.
योजनाओं की नहीं है जानकारी : जिले में बिहार शताब्दी असंगठित कर्मकार दुर्घटना योजना के तहत स्थायी रूप से आंशिक विकलांग होने पर मजदूर को 33 हजार पांच सौ रुपये मिलता है. जबकि स्थायी विकलांगता होने पर 75 हजार रुपये की राशि दी जाती है.
वहीं, सामान्य मृत्यु पर 30 हजार और दुर्घटना में मृत्यु होने पर एक लाख की राशि मजदूर को मिलती है. बिहार प्रवासी मजदूरों को दुर्घटना में मृत्यु पर एक लाख रुपये दी जाती है. जिले में श्रम विभाग ने दो वर्षो में बिहार शताब्दी असंगठित कर्मकार दुर्घटना योजना के तहत लगभग 30 मजदूरों को ही लाभ मिला है. जानकारी के अभाव में कई मजदूर इसे लेने में वंचित हो जा रहे हैं.
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