वैज्ञानिक अनुसंधान पर निर्भर होगा ट्रायल
Updated at : 11 Dec 2019 6:58 AM (IST)
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विष्णु दत्त द्विवेदी, बक्सर कोर्ट : कुकड़ा गांव में अधजली युवती के शव को लेकर पूरे देश में सनसनी फैल गयी थी. अब इस घटना को लेकर पुलिस ने खुलासा कर लिया है. घटना पर से पर्दा उठने के बाद अब यह मामला न्यायालय का रुख करेगा. वहां ट्रायल में अभियुक्त को दोषी या दोषमुक्त […]
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विष्णु दत्त द्विवेदी, बक्सर कोर्ट : कुकड़ा गांव में अधजली युवती के शव को लेकर पूरे देश में सनसनी फैल गयी थी. अब इस घटना को लेकर पुलिस ने खुलासा कर लिया है. घटना पर से पर्दा उठने के बाद अब यह मामला न्यायालय का रुख करेगा. वहां ट्रायल में अभियुक्त को दोषी या दोषमुक्त साबित किया जायेगा. लाश के जला देने के कारण मामला पूरी तरह वैज्ञानिक अनुसंधान पर निर्भर करेगा, साथ ही परिस्थिति जन साक्ष्य महत्वपूर्ण पहलू के रूप में न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जायेगा.
अभियुक्त पिता का बचना मुश्किल दिखाई दे रहा है क्योंकि अगर परिजन संलिप्त नहीं थे तो युवती के लंबे दिनों तक गायब रहने के बाद पुलिस को सूचित क्यों नहीं किया गया था, जबकि मामला पूरी तरह चर्चा में था तथा जिले एवं समीपवर्ती जिले के सभी लोग घटना से अवगत हो चुके थे .पुलिस ने सावधानीपूर्वक पूरे मामले की वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जांच की थी तथा सप्ताह बीत जाने के बाद अधजली लाश को दफनाया गया था .अगर भारतीय दंड विधान की धाराओं पर नजर डालें तो घटना को लेकर 302, 201 एवं 120 बी आइपीसी की दफा लगायी जायेगी.
302 हत्या संबंधित धारा है, जिसमें आजीवन कारावास से लेकर मृत्युदंड तक का प्रावधान है, वही 201 भादवि की धारा साक्ष्य छिपाने को लेकर है .बताते चलें कि लाश को जलाने का एकमात्र उद्देश्य अभियुक्त का यह रहा होगा कि उसे कोई पहचान न सके .वही 120b की धारा अपराधिक षड्यंत्र के लिए बनायी गयी है.
इस धारा के अधीन वे सभी व्यक्ति दोषी करार दिये जा सकते हैं जो हत्या के मामले में संलिप्त थे या सहयोग दिये थे. इस तरह की हत्याओं में परिस्थिति जन साक्ष्य एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण से किया गया अनुसंधान काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. ऐसे में केस के अनुसंधान पदाधिकारी के कुशलता पर बहुत कुछ निर्भर करेगा जहां हत्या एवं इससे जुड़ी हुई सभी कड़ियों को एक सुनियोजित एवं साक्ष्य पर आधारित कहानी के रूप में न्यायालय में पेश करना होगा.
रेयरेस्ट ऑफ रेयर का है मामला : शशिकांत
वरीय अधिवक्ता शशिकांत उपाध्याय ने हत्याकांड के बारे में बताया कि ऑनर किलिंग के उक्त मामले को रेयरेस्ट ऑफ रेयर मानना चाहिए, क्योंकि सगे बाप ने अपनी बेटी को गोली मारकर हत्या करने के बाद लाश को जलाकर सबूत मिटाने का प्रयास किया था . उक्त हत्या क्षणिक आक्रोश का नहीं है बल्कि हत्या के लिए सुनियोजित तरीका अपनाया गया है .अतः ऐसे मामलों में अभियुक्त को कड़ी से कड़ी सजा होनी चाहिए.
ऑनर किलिंग अपराध है
गलत प्रवृत्ति पर रोक और अनुशासन के प्रति माता-पिता का कर्तव्य है. उन्हें भी समझना होगा. ऑनर किलिंग अपराध है. प्यार में अच्छाई और बुराई दोनों मन-मस्तिष्क पर प्रभाव डालता है. वहीं कई मायनों में युवा हद पार कर बैठते है. गलत सोच से आत्महत्या या हत्या जैसी घटना के अंजाम से गुजरना पड़ता है― .
प्रो मंजर हुसैन, मनोविज्ञान विभाग.
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