बक्सर में शराब तस्करी का बड़ा नेटवर्क उजागर, लग्जरी वाहनों से सप्लाई जारी; पुलिस की निगरानी पर सवाल

Published by : Ragini Sharma Updated At : 26 May 2026 10:58 AM

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सांकेतिक तस्वीर

Bihar Liquor Ban: यूपी–बिहार सीमा से शराब तस्करी का बड़ा नेटवर्क सक्रिय होने के आरोप लगे हैं. गोकुल जलाशय और बिशेश्वर डेरा मार्ग से रात के अंधेरे में लग्जरी वाहनों से शराब की खेप बिहार में प्रवेश करने की बात सामने आई है.

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Bihar Liquor Ban:(संतोष कांत) बक्सर जिले के ब्रह्मपुर और चक्की थाना क्षेत्र के अंतर्गत यूपी–बिहार सीमा पर स्थित इलाकों में शराब तस्करी का एक संगठित नेटवर्क सक्रिय होने के गंभीर आरोप सामने आए हैं. गोकुल जलाशय के समीप बलुआ मार्ग और बिशेश्वर डेरा का रास्ता तस्करों के लिए सुरक्षित कॉरिडोर बन चुका है.

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, इन रास्तों से रात के समय बड़े पैमाने पर विदेशी शराब की खेपें लग्जरी वाहनों और बंद बॉडी वाली पिकअप वैन के जरिए बिहार में प्रवेश कराई जा रही हैं.

रात 11 बजे से सुबह तक सक्रिय रहता है सिंडिकेट

ग्रामीणों का कहना है कि दिन के समय सामान्य दिखने वाले ये रास्ते रात 11 बजे के बाद पूरी तरह तस्करों के नियंत्रण में आ जाते हैं. रात के समय स्कॉर्पियो, फॉर्च्यूनर, बोलेरो और अन्य चार पहिया वाहनों की आवाजाही अचानक बढ़ जाती है.

सूत्रों के मुताबिक, शराब की खेपें पहले उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों से लोड की जाती हैं और फिर गोकुल जलाशय व बिशेश्वर डेरा जैसे ग्रामीण रास्तों के जरिए बिहार की सीमा में प्रवेश कराई जाती हैं. इन रास्तों पर पुलिस पिकेट की कमी और गश्त की सुस्ती का फायदा उठाया जा रहा है.

पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल

इस पूरे मामले में चक्की और ब्रह्मपुर थाना पुलिस की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं. स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस छोटी-मोटी कार्रवाई कर केवल बाइक सवारों को पकड़कर अपनी कार्रवाई दिखा रही है, जबकि बड़े पैमाने पर चल रहे तस्करी नेटवर्क पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है. हर दूसरे दिन दोपहिया वाहनों से शराब बरामदगी और गिरफ्तारी की खबरें सामने आती हैं, लेकिन चार पहिया वाहनों से होने वाली बड़े पैमाने की तस्करी पर प्रभावी रोक नहीं लग पा रही है.

ग्रामीणों में बढ़ रहा आक्रोश

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि तेज रफ्तार लग्जरी वाहनों के कारण रात के समय दुर्घटना का खतरा भी बना रहता है. इसके साथ ही तस्करों के स्थानीय सहयोगियों की सक्रियता से इलाके का माहौल भी प्रभावित हो रहा है. ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि पुलिस को इन गतिविधियों की जानकारी होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं की जाती, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ रही है.

जनप्रतिनिधियों ने भी उठाए सवाल

स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी इस स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा है कि जब आम लोगों के दोपहिया वाहनों की सघन जांच की जाती है, तो वहीं दूसरी ओर रात के समय गुजरने वाले भारी वाहनों की अनदेखी क्यों की जाती है. उन्होंने इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही बताते हुए जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है.

निगरानी और पिकेट की मांग

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इन संवेदनशील मार्गों पर ड्रोन कैमरे से निगरानी, नियमित पुलिस गश्त और स्थायी पिकेट की व्यवस्था की जाए, ताकि शराब तस्करी पर रोक लग सके. लोगों का कहना है कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो शराबबंदी कानून केवल कागजों तक सीमित रह जाएगा और तस्करी का यह नेटवर्क और मजबूत होता जाएगा.

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