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10 हजार के मुचलके पर रिहा हुए दोनों एएसआइ

Updated at : 06 Dec 2019 6:57 AM (IST)
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10 हजार के मुचलके पर रिहा हुए दोनों एएसआइ

बक्सर, कोर्ट : तीन दिन पूर्व जेल भेजे गये दोनों एएसआइ की जमानत याचिका को गुरुवार को स्वीकृत कर दिया गया लेकिन इसके लिए आरोपितों को घंटों मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के न्यायालय में खड़ा रहना पड़ा. इसके पूर्व बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने जमानत याचिका को संचालित करते हुए न्यायालय से प्रार्थना किया कि दोनों […]

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बक्सर, कोर्ट : तीन दिन पूर्व जेल भेजे गये दोनों एएसआइ की जमानत याचिका को गुरुवार को स्वीकृत कर दिया गया लेकिन इसके लिए आरोपितों को घंटों मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के न्यायालय में खड़ा रहना पड़ा. इसके पूर्व बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने जमानत याचिका को संचालित करते हुए न्यायालय से प्रार्थना किया कि दोनों अभियुक्तों ने जान-बूझकर कोर्ट से अनुपस्थित नहीं हुए थे. ऐसे में उनकी जमानत याचिका को स्वीकृत किया जाये.

कोर्ट ने 10-10 हजार के बंधपत्र पर अभियुक्तों की जमानत याचिका को इस शर्त के साथ स्वीकृत किया कि न्यायालय द्वारा तलब किये जाने पर वे उपस्थित रहेंगे. बताते चलें कि किस सिमरी थाना के गायघाट के रहने वाले बबन राय के साथ उसी गांव के हरेंद्र राय एवं प्रदुम्न राय उर्फ राम प्रवेश राय ने मारपीट किया था. वर्तमान में हरेंद्र राय धनबाद रेलवे में एएसआइ के पद पर एवं प्रदुम्न राय उर्फ राम प्रवेश राय मधेपुरा में एएसआइ के पद पर नियुक्त हैं.
उक्त घटना को लेकर सूचक ने सिमरी थाना में 17 जुलाई 1986 को कई अभियुक्तों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करायी थी. पुलिस को बताया गया था कि सूचक अपने खेत में हल जोत रहा था तभी दोनों अभियुक्त अन्य अभियुक्तों के साथ मिलकर उसके साथ मारपीट कर लहूलुहान कर दिये. घटना को लेकर सिमरी थाना में कांड संख्या 72 सन् 1986 दर्ज करायी गयी थी.
मामले को निष्पादित करने के लिए न्यायालय द्वारा कई बार अभियुक्तों को मौका दिया गया लेकिन वे बार-बार समय आवेदन देकर न्यायालय में उपस्थित होने से बचते रहे. 15 अप्रैल 2015 को अभियुक्तों के वेलबाउंड को खारिज कर दिया गया तथा उनके खिलाफ नॉन बेलेबल वारंट जारी किया गया था, बावजूद वे न्यायालय में उपस्थित नहीं हुए.
बाद में कोर्ट ने अभियुक्तों के खिलाफ कुर्की जब्ती का आदेश भी जारी किया था. विगत मंगलवार को मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के न्यायालय में अभियुक्तों के जमानत आवेदन को संचालित करते हुए बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने कहा कि दोनों छुट्टी नहीं मिलने के कारण न्यायालय में उपस्थित नहीं हो रहे थे. जिसके बाद उन्हें सेंट्रल जेल भेज दिया गया था.
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