सुरक्षा के लिए तैनात सुरक्षा कर्मियों का कोई अता-पता नहीं

Updated at : 30 Aug 2018 6:09 AM (IST)
विज्ञापन
सुरक्षा के लिए तैनात सुरक्षा कर्मियों का कोई अता-पता नहीं

बक्सर कोर्ट : सुबह के करीब साढ़े दस बजे थे. लोगबाग बगैर किसी जांच के धड़ल्ले से कोर्ट परिसर में प्रवेश रहे थे. कोई सुरक्षा कर्मी उन्हें नहीं टोक रहा था. कोर्ट परिसर में जानेवाले लोग अपने हाथों में बैग भी ले रखे थे. कई बाइक सवार भी धड़ल्ले से कोर्ट में प्रवेश कर रहे […]

विज्ञापन

बक्सर कोर्ट : सुबह के करीब साढ़े दस बजे थे. लोगबाग बगैर किसी जांच के धड़ल्ले से कोर्ट परिसर में प्रवेश रहे थे. कोई सुरक्षा कर्मी उन्हें नहीं टोक रहा था. कोर्ट परिसर में जानेवाले लोग अपने हाथों में बैग भी ले रखे थे. कई बाइक सवार भी धड़ल्ले से कोर्ट में प्रवेश कर रहे थे. वहां सुरक्षा के लिए तैनात सुरक्षा कर्मियों का कोई अता-पता नहीं था. मंगलवार को सीतामढ़ी कोर्ट में घटी घटना के बाद भी सुरक्षा कर्मी नहीं चेते हैं. नियमत: कोर्ट में प्रवेश के दौरान उनकी तलाशी होनी चाहिए. स्थानीय व्यवहार न्यायालय के ऐसे दृश्यों को प्रत्येक दिन देखा जा सकता है. कोर्ट की सुरक्षा का दायित्व स्थानीय पुलिस प्रशासन का होता है. अभी तीन माह पूर्व शहर का कुख्यात मेंहदी हसन वहां के सुरक्षा कर्मियों को चकम देकर फरार होने में सफल हो गया था.

पूर्व में बंदी की न्यायालय परिसर में गोली मारकर हुई थी हत्या : कुख्यात शेरू सिंह ने बक्सर न्यायालय से ही पुलिस को गोली मारकर फरार हो गया था. घटना को अंजाम देने के लिए न्यायाधीश के पास से निकलने के बाद उसने पुलिसवालों से बाथरूम जाने की इच्छा जतायी थी, जहां पूर्व से ही मिर्च पाउडर के साथ लोडेड पिस्टल भी रखा गया था. बाहर निकलते के साथ उसने पुलिसवालों की आंखों में मिर्च पाउडर झोंक दिया तथा भागने में रोक रहे पुलिसवाले को गोली मारते हुए दीवार फांदकर दूसरी तरफ खड़े अपने साथियों की गाड़ी में बैठ कर फरार हो गया था. इसके अलावा सात मई 2014 को कोर्ट परिसर में अपराधियों ने पेशी के लिए लाये गये बंदी कमलेश यादव को गोलियों से भून डाला था. इसके अलावा अगर कोर्ट परिसर से भागनेवाले अपराधियों पर नजर डाली जाये तो इनकी संख्या लगभग आधा दर्जन है.
सुरक्षाकर्मी की संख्या में है भारी कमी : न्यायालय परिसर को सुरक्षित रखने के लिए सुरक्षाकर्मियों में भारी कमी है. मुख्य द्वार पर जितने सुरक्षाकर्मियों की आवश्यकता है. उसके आधे भी तैनात नहीं किये गये हैं. बार-बार होनेवाली घटनाओं के बाद पुलिस अधीक्षक द्वारा सुरक्षाकर्मियों की संख्या में बढ़ोतरी की जाती है लेकिन समय के साथ-साथ फिर उन्हें हटा दिया जाता है. मुख्य द्वार के अलावे न्यायालय में प्रवेश के लिए मेटल डिटेक्टर लगाया गया है लेकिन वो महज एक शोभा की वस्तु बना हुआ है. इस संबंध में सूत्रों ने बताया कि पुलिस अधीक्षक द्वारा सारे सिस्टम को वापस ले लिया गया है. न्यायालय परिसर के पिछले दरवाजे का इस्तेमाल सिर्फ न्यायालय के कर्मचारियों, अधिवक्ताओं एवं अधिकारियों के लिए सुनिश्चित था लेकिन प्रशासनिक उपेक्षा के कारण अब यह आम रास्ता बन गया है. स्टेशन जाने के लिए शहर के आम लोग भी शॉर्ट-कट रास्ता के रूप में इस्तेमाल करते हैं.
मंगलवार को सीतामढ़ी कोर्ट में दिनदहाड़े भारी सुरक्षा-व्यवस्था के बीच कुख्यात संतोष झा की हुई हत्या के बाद पुलिस महकमे में खलबली मच गयी है. कोर्ट की सुरक्षा-व्यवस्था पर सवालिया निशान लगने लगे हैं. बुधवार को प्रभात खबर बक्सर ने स्थानीय व्यवहार न्यायालय की सुरक्षा-व्यवस्था की सुध ली. इस दौरान कई तरह की खामियां उजागर हुईं. सुरक्षा को लेकर सुरक्षा कर्मियों की संख्या तय अनुपात से काफी कम मिली. इतना ही नहीं मेटल डिटेक्टर जैसे उच्चस्तरीय उपकरण भी खराब पाये गये. अब यक्ष्य प्रश्न यह उठता है कि इस कमजोर सुरक्षा-व्यवस्था का जिम्मेदार आखिर कौन है.
न्यायालय परिसर में आने-जानेवालों की नहीं होती जांच, पुलिस सुस्त
बुधवार को सदर एसडीपीओ सतीश कुमार सुरक्षा का जायजा लेने बक्सर कोर्ट पहुंचे. वहां उन्होंने सुरक्षा में तैनात सुरक्षा कर्मियों से कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा की. एसडीपीओ ने कहा कि कोर्ट परिसर पर्याप्त सुरक्षा-व्यवस्था जैसी होनी चाहिए वैसी नहीं पायी गयी है. कई तरह की खामियां मिली हैं. सुरक्षा को लेकर दो महिला सिपाही की प्रतिनियुक्ति की जा रही है. खराब मेटल डिटेक्टर को सही किया जायेगा.
लगभग 300 बंदियों का होता है आना-जाना
बक्सर सेंट्रल जेल में 800 से ज्यादा बंदी मौजूद हैं, जिनमें 500 के करीब सजायाफ्ता हैं. बाकी 300 बंदियों का न्यायालय में नियमित रूप से आना-जाना होता है. विभिन्न न्यायिक कार्यों में हिस्सा लेने के लिए आनेवाले बंदियों में कई खतरनाक किस्म के बंदी भी शामिल हैं. ऐसे कुख्यात बंदियों की पेशी के दौरान खतरा बना रहता है. हालांकि सुरक्षा में तैनात हथियारबंद जवान काफी मुस्तैद रहते हैं.
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन