झम्मन हत्याकांड : चार अभियुक्तों को उम्रकैद

Updated at : 24 Aug 2018 4:50 AM (IST)
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झम्मन हत्याकांड : चार अभियुक्तों को उम्रकैद

हत्याकांड के अभियुक्त शिवजी पांडेय ने राजनीतिक षड्यंत्र का लगाया आरोप बक्सर( कोर्ट) : चर्चित पैक्स अध्यक्ष रामाशंकर पांडेय उर्फ झम्मन पांडेय हत्याकांड के सभी अभियुक्तों को न्यायालय ने गुरुवार को आजीवन कारावास के साथ 70 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनायी है. अभियुक्तों में पूर्व मुखिया एवं विधानसभा प्रत्याशी रह चुके शिवजी पांडेय, प्रकाश […]

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हत्याकांड के अभियुक्त शिवजी पांडेय ने राजनीतिक षड्यंत्र का लगाया आरोप

बक्सर( कोर्ट) : चर्चित पैक्स अध्यक्ष रामाशंकर पांडेय उर्फ झम्मन पांडेय हत्याकांड के सभी अभियुक्तों को न्यायालय ने गुरुवार को आजीवन कारावास के साथ 70 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनायी है. अभियुक्तों में पूर्व मुखिया एवं विधानसभा प्रत्याशी रह चुके शिवजी पांडेय, प्रकाश रंजन मिश्रा उर्फ छोटू मिश्रा, घनश्याम पांडेय उर्फ मंटू पांडेय, शेखर कुमार पांडेय उर्फ सीटू पांडेय हैं. इसके पूर्व न्यायालय द्वारा अभियुक्तों को दोषी करार दिया गया था. गुरुवार को फैसला सुनाया गया. उक्त मामला स्पीडी ट्रायल के तहत निष्पादित किया गया है. फैसले को लेकर सुबह से ही न्यायालय में गहमागहमी का माहौल बना रहा तथा फैसला सुनने के लिए लोगों की निगाहें लगी रही. दिन के लगभग ढाई बजे अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वितीय ज्योति स्वरूप श्रीवास्तव ने फैसला सुनाया.
क्या था मामला: 4 जनवरी 2016 को आरा-बक्सर मुख्य सड़क पर बसे चुरामनपुर गांव के पैक्स अध्यक्ष रामाशंकर पांडेय उर्फ झम्मन पांडेय की गोली मारकर हत्या कर दी गयी थी. जब वे एक पान के दुकान पर खड़े थे. हत्या को लेकर मृतक के भाई धनजी पांडेय ने उसी गांव के रहने वाले पूर्व मुखिया एवं विधानसभा प्रत्याशी रह चुके शिवजी पांडेय, प्रकाश रंजन मिश्रा उर्फ छोटू मिश्रा, घनश्याम पांडेय उर्फ मंटू पांडेय,शेखर कुमार पांडेय उर्फ सीटू पांडेय के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करायी थी.दर्ज प्राथमिकी में हत्या के पीछे चुनावी रंजिश को बताया गया था. मामले को लेकर काफी राजनीतिक हलचल भी जिले में देखने को मिली थी. 4 जनवरी 2016 को घटना की प्राथमिकी बक्सर औद्योगिक थाने में दर्ज करायी गयी थी.बाद में पुलिस दबिश में अभियुक्तों ने न्यायालय में सरेंडर कर दिया था. उच्च न्यायालय के आदेश के बाद स्पीडी ट्रायल के तहत मामले की सुनवाई की गयी.
आजीवन कारावास के साथ जुर्माने की सुनायी गयी सजा: दोनों पक्षों के दलीलों को सुनने के बाद अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ज्योति स्वरूप श्रीवास्तव ने अभियुक्तों को भारतीय दंड विधान की धारा 302 के तहत मृत्यु तक आजीवन कारावास एवं 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा, भादवि की धारा 307 के तहत 10 वर्ष के कारावास एवं 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनायी. सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी. वहीं 27(सी) आर्म्स एक्ट के तहत भी आजीवन कारावास की सजा सुनायी गयी. बताते चलें कि 27(सी) आर्म्स एक्ट वैसे हथियारों से संबंधित है जिसका उपयोग सिर्फ केंद्र सरकार से अधिकृत व्यक्ति कर सकते हैं. ऐसे में प्रतिबंधित हथियारों से होने वाली हत्याओं में मृत्यु दंड का प्रावधान है, लेकिन संविधान में दिये गये जीने के अधिकार को लेकर उक्त दफा में परिवर्तन किया गया है.
कई दफाओं में की गयी सुनवाई
पैक्स अध्यक्ष हत्याकांड में भारतीय दंड विधान की धारा 302, 307 एवं 120(बी)तथा आर्म्स एक्ट की धारा 27(सी) के तहत मामला दर्ज किया गया था. सुनवाई में अभियोजन के पक्ष की तरफ से कुल सात गवाहों की गवाही कलमदर्ज की गयी. वहीं बचाव पक्ष की ओर से सिर्फ दो गवाहों की गवाही दी गयी. गुरुवार को फैसले से पूर्व न्यायाधीश ने दोनों पक्षों को अपनी-अपनी दलील पेश करने को कहा. जहां अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक सरिता सहाय ने उक्त मामले को रेयरेस्ट ऑफ रेयर बताते हुए अधिकतम सजा देने की प्रार्थना की, जिसके बाद न्यायालय ने कहा कि इस संबंध में क्या आधार प्रस्तुत किया गया है.
बताते चलें कि हत्या के रेयरेस्ट ऑफ रेयर मामलों में मृत्यु दंड देने का प्रावधान है. वहीं बचाव पक्ष के अधिवक्ता कृपाशंकर राय, शशिकांत उपाध्याय एवं अरुण राय ने कहा कि इस संबंध में अभियोजन पक्ष की तरफ से कोई आवेदन नहीं दिया गया है और न ही हत्या के इस मामले को रेयरेस्ट ऑफ रेयर की श्रेणी में रखा जा सकता है.
बायोमेट्रिक सिस्टम का बटन हुआ बॉक्स में कैद, फिंगर प्रिंट से बनेगी उपस्थिति
अस्पताल आते नहीं हैं लेकिन बन जाती है साहब की हाजिरी. खबर प्रभात खबर में प्रकाशित होने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया. खबर प्रकाशित होने के बाद विभाग के अधिकारियों ने बायोमेट्रिक सिस्टम में लगे बटन को बॉक्स में पूरी तरह लॉक कर दिया है. विभाग की इस कार्रवाई के बाद कामचोर चिकित्सकों एवं कर्मियों में खलबली मच गयी है. वहीं केवल फिंगरप्रिंट से उपस्थिति दर्ज होने के बाद समय से अस्पताल नहीं आने वाले चिकित्सक व कर्मियों में समय से अस्पताल पहुंचने का भय दिखने लगा है.
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