आधा दर्जन गांवों के ग्रामीण पानी से होकर जाते हैं प्रखंड मुख्यालय तक

Updated at : 02 Aug 2018 4:22 AM (IST)
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आधा दर्जन गांवों के ग्रामीण पानी से होकर जाते हैं प्रखंड मुख्यालय तक

आधा किलोमीटर के रास्ते का नहीं किया जा रहा पक्कीकरण राजापुर : प्रखंड मुख्यालय के पड़ोसी गांव नवा गांव, बारुपुर, तिलकुराय के डेरा, रूपा पोखर सहित अन्य गांवों के ग्रामीणों को प्रखंड मुख्यालय पर आने के लिए पानी से होकर गुजरना पड़ता है. यह स्थिति प्रत्येक वर्ष की है. जब भी बारिश होती है इस […]

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आधा किलोमीटर के रास्ते का नहीं किया जा रहा पक्कीकरण

राजापुर : प्रखंड मुख्यालय के पड़ोसी गांव नवा गांव, बारुपुर, तिलकुराय के डेरा, रूपा पोखर सहित अन्य गांवों के ग्रामीणों को प्रखंड मुख्यालय पर आने के लिए पानी से होकर गुजरना पड़ता है. यह स्थिति प्रत्येक वर्ष की है. जब भी बारिश होती है इस रास्ते पर जलजमाव हो जाता है. यह जलजमाव लगभग चार से पांच महीने तक रहता है. ऐसे में इन गांवों के ग्रामीणों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. दोपहिया गाड़ी भी ले जाने पर तिलकु राय का डेरा गांव पर खड़ा करके पानी से होकर लोग मुख्यालय पहुंचते हैं. सबसे अधिक परेशानी महिलाओं और पढ़नेवाले बच्चों को होती है. सरकार द्वारा बहुत सारी योजनाओं का संचालन किया जा रहा है
लेकिन छोटे-छोटे रास्ते का पक्कीकरण नहीं करने से अधिक परेशानी झेलनी पड़ रही है. इस संबंध में स्थानीय ग्रामीण योगेंद्र कुमार, गंगासागर राय, चुनमुन राय, ब्रह्मा राय, रागिनी कुमारी, संतोष राय ने बताया कि प्रत्येक दिन बच्चे पानी में गिर जाते हैं, जिसकी वजह से इनका कपड़ा भीग जाने पर वापस घर लौटना पड़ता है. इसके लिए कई बार स्थानीय विधायक के पास लिखित तौर पर गुहार लगायी गयी है लेकिन इसके बाद भी अभी तक इस रास्ते का निर्माण नहीं कराया गया है. यह रास्ता मुख्यालय परिसर से महज 500 मीटर की दूरी पर ही है फिर भी किसी अधिकारी द्वारा इस पर पहल नहीं किया जा रहा है.
खेतों में जमा हुए पानी से धान की रोपनी बाधित: डुमरांव. इलाके में भारी बारिश होने के कारण खेतों में धान की रोपनी बाधित हो गयी है. अधिकतर खेतों में अभी भी घुटने तक पानी लगा हुआ है, जिसके चलते मठिला, कंझरूआ, कोरानसराय आदि क्षेत्रों के किसानों के बीच एक बार फिर अपनी खेती को लेकर चिंता सताने लगी है.
किसान श्रीकांत मिश्रा, शेषनाथ सिंह, संत कुमार, सूर्य कुमार, पारसनाथ पाठक आदि का कहना है कि जिस वक्त खेतों में बीज को डाला गया था उस वक्त पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ था. इसके साथ ही उस वक्त हताश व परेशान किसान अपने खेतों में डाले गये बिचड़े को बचाने के लिए दिन-रात एक कर डीजल पंप के सहारे उसकी पटवन करने में जुटे हुए थे लेकिन होनी के आगे किसी का नहीं चलता. किसानों ने कहा कि जैसे ही खेतों में डाले गये बीज रोपनी करने के लिए तैयार हुए और किसान रोपनी को लेकर ट्रैक्टर के सहारे खेतों को तैयार किये तो उसी वक्त कई दिनों से आसमान में मंडरा रहे बादल एकाएक अपना जलवा दिखाना शुरू कर दिये.
बारिश शुरू हुई तो किसानों के चेहरे खिल गये लेकिन जरूरत से ज्यादा खेतों में पानी जमा होने से अब किसान परेशान हो गये हैं. किसानों का कहना है कि जैसे-जैसे पानी कम होगा. वैसे-वैसे रोपनी का कार्य तेज होगा.
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