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प्राइवेट प्रोफेशनल कॉलेजों की फीस अब सरकार करेगी तय, मनमानी की तो बंद हो जाएगा संस्थान

Updated at : 27 Feb 2026 1:20 PM (IST)
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Bihar News

सांकेतिक तस्वीर

Bihar News: बिहार में शिक्षा क्षेत्र में बड़ा बदलाव होने जा रहा है. विधानसभा से नया कानून पारित होने के बाद अब निजी व्यावसायिक शिक्षण संस्थान मनमाने ढंग से फीस नहीं ले सकेंगे और नामांकन से लेकर परीक्षा तक का शुल्क सरकार तय करेगी.

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Bihar News: बिहार सरकार ने राज्य के किसी भी प्राइवेट प्रोफेशनल कॉलेजों की इतनी हिम्मत नहीं होगी कि वह आपसे मनमाना शुल्क वसूल सके. विधानसभा में एक ऐसा कानून पास हुआ है, जिसके बाद कॉलेजों की मनमानी अब बीते दौर की बात हो जाएगी.

मनमानी फीस पर सरकार का नियंत्रण

बिहार विधानसभा से पारित ‘निजी व्यावसायिक शैक्षणिक संस्थान (नामांकन विनियमन एवं शुल्क निर्धारण) बिल 2026’ के बाद अब निजी कॉलेजों का पूरा कंट्रोल सरकार के हाथ में होगा. अब चाहे वह मेडिकल कॉलेज हो, इंजीनियरिंग हो या कोई अन्य प्रोफेशनल कोर्स, नामांकन से लेकर परीक्षा फॉर्म भरने तक की फीस अब कॉलेज नहीं, बल्कि सरकार द्वारा गठित एक उच्चस्तरीय समिति तय करेगी.

इस फीस में लाइब्रेरी, लैब, कंप्यूटर, हॉस्टल और यहां तक कि कॉशन मनी को भी शामिल किया गया है. यानी अब कॉलेज ‘हिडन चार्ज’ के नाम पर आपको ठग नहीं पाएंगे.

हाई-लेवल कमेटी तय करेगी फीस

फीस पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने एक बेहद शक्तिशाली 9 सदस्यीय समिति बनाने का निर्णय लिया है. इस कमेटी की कमान किसी प्रख्यात शिक्षाविद् या सेवानिवृत्त उच्चाधिकारी के हाथ में होगी. स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त सचिव इसके सदस्य सचिव होंगे. यह कमेटी न केवल फीस का ढांचा तैयार करेगी, बल्कि समय-समय पर संस्थानों का निरीक्षण भी करेगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि छात्रों का शोषण तो नहीं हो रहा है.

सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी संस्थान द्वारा कैपिटेशन फीस लेने या नियमों का उल्लंघन करने की पुष्टि होती है, तो समिति संस्थान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की सिफारिश कर सकती है. इसमें सीटों में कटौती से लेकर संस्थान बंद करने तक की कार्रवाई शामिल हो सकती है.

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद कानून

यह कानून सुप्रीम कोर्ट के उस निर्देश के आधार पर तैयार किया गया है, जिसमें फीस नियंत्रण के लिए एक वैधानिक व्यवस्था बनाने की बात कही गई थी. बिहार अब उन चुनिंदा राज्यों में शामिल हो गया है जहां शिक्षा को व्यापार बनने से रोकने के लिए इतने कड़े प्रावधान किए गए हैं.

यह कदम उन हजारों मेधावी छात्रों के लिए वरदान साबित होगा जो केवल पैसों की कमी के कारण अच्छे प्रोफेशनल कोर्स नहीं कर पाते थे.

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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