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होली में खरीदने जा रहें खोया तो हो जाइए सावधान! ऐसे कर सकेंगे असली-नकली मावा की पहचान

Updated at : 02 Mar 2026 1:59 PM (IST)
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Holi Mawa

मावा (खोया)

Bihar News: होली में जैसे बड़े त्योहार के आते ही बाजार में मिठाइयों और मावे की मांग तेजी से बढ़ जाती है. इसी मौके का फायदा उठाकर कई जगह मिलावटी खोया भी बेचा जा रहा है. अगर आप गुझिया या अन्य मिठाइयां बनाने के लिए मावा खरीद रहे हैं, तो इस्तेमाल से पहले उसकी जांच करना बेहद जरूरी है, वरना स्वाद के साथ सेहत पर भी भारी पड़ सकता है.

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Bihar News: होली का त्योहार हो और घर में गुझिया न बने, ऐसा मुमकिन नहीं है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस मावा (खोया) से आप अपनी पसंदीदा गुझिया तैयार करने जा रहे हैं, वह आपकी सेहत के लिए खतरनाक भी हो सकता है?

मावा केवल दूध से नहीं, बल्कि यूरिया, डिटर्जेंट, घटिया तेल और सफेद पाउडर के मिश्रण से तैयार किया जाता है, इसे खाने से फूड पॉइजनिंग, उल्टी, दस्त और पाचन तंत्र की गंभीर बीमारियां हो सकती हैं. ऐसे में गुझिया बनाने से पहले मावे की शुद्धता की जांच करना बेहद जरूरी है.

त्योहारों में क्यों बढ़ जाती है मिलावट

त्योहारों के समय मांग अचानक बढ़ने से असली मावा तैयार करना मुश्किल हो जाता है. ऐसे में कुछ दुकानदार लागत घटाने के लिए सिंथेटिक दूध, स्टार्च, पाउडर या केमिकल मिलाकर नकली खोया तैयार कर देते हैं. देखने में यह असली जैसा लगता है, लेकिन खाने पर पेट दर्द, उल्टी, दस्त और फूड पॉइजनिंग तक का कारण बन सकता है.

हथेली पर रगड़ कर होती है पहचान मावे की पहचान

शुद्ध मावे की सबसे बड़ी पहचान उसकी बनावट है. बाजार से मावा लाने के बाद उसका एक छोटा सा टुकड़ा लें और अपनी हथेली पर रगड़ें. अगर मावा रगड़ने पर थोड़ा घी छोड़े, चिकना महसूस हो और उससे दूध जैसी महक आए, तो वह असली है.

इसके विपरीत, अगर मावा दानेदार होने के बजाय चिपचिपा या जरूरत से ज्यादा सख्त लगे, तो समझ लीजिए कि इसमें मिलावट की गई है. असली मावे का स्वाद हल्का मीठा और दूध जैसा होता है, जबकि नकली मावा खाने में कड़वा या बेस्वाद महसूस हो सकता है.

स्टार्च और आलू की मिलावट

मावे की मात्रा बढ़ाने के लिए अक्सर इसमें स्टार्च, शकरकंद या उबले हुए आलू मिला दिए जाते हैं. इसे पकड़ने का सबसे आसान तरीका आयोडीन टेस्ट है. इसके लिए मावे को थोड़े से पानी में उबालकर ठंडा कर लें.

अब इसमें दो-तीन बूंद आयोडीन का घोल डालें। अगर मावे का रंग नीला हो जाता है, तो इसका साफ मतलब है कि इसमें स्टार्च या अन्य मिलावटी चीजें मौजूद हैं. शुद्ध मावे का रंग आयोडीन डालने पर नहीं बदलता है.

पानी और आग से करें अग्नि परीक्षा

मावे की शुद्धता जांचने के लिए आप इसे पानी में डालकर भी देख सकते हैं. असली मावा पानी में धीरे-धीरे घुलता है और पानी का रंग हल्का दूधिया हो जाता है. वहीं, सिंथेटिक मावा पानी को तुरंत गाढ़ा और बहुत ज्यादा सफेद बना देता है.

इसके अलावा, मावे के एक टुकड़े को जलाकर देखें. अगर जलते समय इससे प्लास्टिक या केमिकल जैसी बदबू आए, तो इसे तुरंत फेंक दें. शुद्ध मावे को जलाने पर घी और दूध के जलने जैसी सुखद खुशबू आती है.

रंग और चमक का धोखा न खाएं

असली मावे का रंग हमेशा हल्का क्रीम होता है. अगर मावा एकदम सफेद या चमकीला दिख रहा है, तो संभव है कि उसे ब्लीच या अन्य रसायनों से साफ किया गया हो.

होली की खुशियों को फीका न पड़ने दें और हमेशा भरोसेमंद डेयरी या दुकान से ही खरीदारी करें. सतर्क रहें और सेहतमंद होली मनाएं.

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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