बिहार दिवस पर राष्ट्रपति, PM मोदी और अमित शाह के संदेश? विकसित बिहार का संकल्प दोहराया

Updated at : 22 Mar 2026 12:40 PM (IST)
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Bihar Diwas

बिहार दिवस

Bihar Diwas 2026: बिहार दिवस पर इस बार सिर्फ बधाई नहीं, बल्कि बड़े राजनीतिक संकेत भी देखने को मिले. राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के संदेशों ने राज्य की विरासत के साथ-साथ सियासी संदेश भी दिया. आम लोगों के लिए ये शब्द जहां गर्व की बात हैं.

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Bihar Diwas 2026: आज बिहार अपना गौरवशाली स्थापना दिवस मना रहा है. इस ऐतिहासिक अवसर पर देश की शीर्ष हस्तियों ने राज्यवासियों को दिल जीतने वाला संदेश भेजा है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के जरिए बिहार की महानता को नमन किया.

इन शुभकामनाओं के पीछे केवल बधाई नहीं, बल्कि बिहार के भविष्य और आगामी राजनीतिक समीकरणों के लिए ‘विरासत और विकास’ का एक साझा विजन देखने को मिला.

‘लोकतंत्र की जननी’ को नमन

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने संदेश में बिहार को विश्व के प्रथम गणराज्य की भूमि बताते हुए इसे लोकतंत्र की जननी के रूप में सम्मान दिया. उन्होंने लिखा कि इस धरती ने महान साम्राज्यों और सांस्कृतिक-आध्यात्मिक धाराओं को जन्म देकर भारत-भूमि को सदैव समृद्ध किया है.

राष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि राज्य के निवासी अपनी असीम प्रतिभा और परिश्रम से बिहार और पूरे देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे.

उनका यह संदेश बिहार की वैश्विक पहचान और बौद्धिक संपदा को रेखांकित करने वाला रहा.

भारतीय विरासत को दिव्यता प्रदान करने वाला प्रदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संदेश में बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं और ऐतिहासिक गौरव को देश का मार्गदर्शक बताया. उन्होंने बड़े ही भावनात्मक शब्दों में लिखा कि बिहार वह प्रदेश है जिसने भारतीय विरासत को भव्यता और दिव्यता प्रदान की है.

पीएम ने बिहार के लोगों को ‘कर्मठ और ऊर्जावान’ बताते हुए भरोसा जताया कि ‘विकसित बिहार’ ही ‘विकसित भारत’ के संकल्प को साकार करेगा.

उनके इस संदेश को राज्य के युवाओं और विकास की आस लगाए बैठे आम नागरिकों से सीधे जुड़ाव के तौर पर देखा जा रहा है.

अमित शाह का ‘सामाजिक न्याय’ और ‘शिक्षा’ वाला मास्टरस्ट्रोक

गृह मंत्री अमित शाह का संदेश में बिहार को ‘सामाजिक न्याय और बौद्धिक चेतना’ की भूमि बताकर राज्य की रग-रग में बसी राजनीति को छूने की कोशिश की है. नालंदा और विक्रमशिला जैसे प्राचीन विश्वविद्यालयों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बिहार के गौरवशाली अतीत को राष्ट्रीय पहचान से जोड़ा.

‘सामाजिक न्याय’ शब्द का इस्तेमाल कर शाह ने बिहार की उन वैचारिक जड़ों को सम्मान दिया है, जो राज्य के राजनीतिक समीकरणों में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं.

बिहार दिवस पर इस बार सिर्फ बधाई नहीं,आम लोगों के लिए ये शब्द जहां गर्व की बात हैं.

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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